लंदन: विंबलडन की हरी-भरी घासों पर जब खिलाड़ी रैकेट लहराते हैं, तो सिर्फ खेल नहीं, कहानियां भी बनती हैं। इस साल के टूर्नामेंट में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। एक तरफ हैं टेनिस के 'शहंशाह' नोवाक जोकोविच, जो उम्र को सिर्फ एक आंकड़ा बताकर कोर्ट पर जादू बिखेर रहे हैं, तो दूसरी तरफ हैं डिफेंडिंग चैंपियन जैनिक सिनर, जो हर मुकाबले में अपनी पकड़ और अनुभव का लोहा मनवा रहे हैं। इन दोनों दिग्गजों ने टूर्नामेंट के तीसरे दौर में अपनी जगह पक्की कर ली है, लेकिन उनके मुकाबले सिर्फ जीत-हार का गणित नहीं थे, बल्कि उनमें टेनिस का पूरा रोमांच भरा था।
बुधवार का दिन विंबलडन के सेंटर कोर्ट पर खास रहा। दुनिया की निगाहें सर्बिया के नोवाक जोकोविच पर टिकी थीं, जो ग्रीस के स्टेफानोस सितसिपास के सामने थे।
ये मुकाबला सिर्फ एकतरफा नहीं था, बल्कि जोकोविच के उस हुनर का नमूना था, जो उन्हें महान बनाता है। दूसरी तरफ, इटली के युवा स्टार जैनिक सिनर को पुर्तगाल के नूनो बोर्गेस ने खूब पसीना छुड़ाया, लेकिन अंततः सिनर का अनुभव भारी पड़ा।
दोनों खिलाड़ियों ने अपने-अपने अंदाज में फैंस का दिल जीता और साबित किया कि विंबलडन में अभी बहुत कुछ देखने को बाकी है।
मैदान पर रैकेट की सनसनाहट और दर्शकों की तालियां गवाह थीं कि इतिहास फिर से लिखा जा रहा है। नोवाक जोकोविच ने जहां अपने चिर-परिचित अंदाज़ में विरोधी को ढेर किया, वहीं सिनर ने दबाव में भी हार नहीं मानी और एक कड़े मुकाबले में जीत का परचम लहराया।
इन मैचों ने न सिर्फ उनकी प्रतिभा को दर्शाया, बल्कि यह भी दिखाया कि विंबलडन का खिताब जीतने के लिए कितनी दृढ़ता और मानसिक शक्ति की जरूरत होती है।
जोकोविच का 'विंटेज' प्रदर्शन और अगले दौर में धमाकेदार एंट्री
नोवाक जोकोविच ने जब सेंटर कोर्ट पर कदम रखा, तो शायद ही किसी ने सोचा होगा कि मुकाबला इतनी जल्दी खत्म हो जाएगा। ग्रीस के स्टेफानोस सितसिपास जैसे दमदार खिलाड़ी को महज 98 मिनट में धूल चटाना, वो भी सीधे सेटों में, जोकोविच की बेजोड़ फॉर्म का सबूत है।
39 साल के इस सर्बियाई खिलाड़ी ने 6-3, 6-4, 6-2 के स्कोर से यह मैच अपने नाम किया और आसानी से तीसरे दौर में जगह बना ली। उनकी सर्विस, फोरहैंड और बैकहैंड हर शॉट में वो धार दिख रही थी, जिसने सालों से उन्हें टेनिस की दुनिया का बेताज बादशाह बनाए रखा है।
मैच के दौरान जोकोविच काफी सहज और आत्मविश्वास से भरे दिखे, मानो यह उनके लिए किसी पार्क में टहलने जैसा हो। उनकी फुर्ती और कोर्ट कवरेज किसी युवा खिलाड़ी से कम नहीं थी, जो यह साबित करता है कि उम्र उनके लिए वाकई बस एक नंबर है।
मैच खत्म होने के बाद, नोवाक जोकोविच ने अपने चिर-परिचित अंदाज में दर्शकों का अभिवादन किया और मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, 'मुझे 'विंटेज' शब्द पसंद है।
यह सुनना अच्छा लगता है क्योंकि यह पुराने बेहतरीन दिनों की याद दिलाता है। जब आप कोर्ट पर इस तरह का खेल दिखाते हैं, तो आपको बहुत खुशी और संतुष्टि मिलती है।
' जोकोविच ने आगे बताया कि वह खुद को बहुत अच्छा महसूस कर रहे हैं और विंबलडन के सेंटर कोर्ट पर खेलने के हर पल को संजोते हैं। उनके लिए यह टूर्नामेंट बचपन का सपना था और 30 साल से ज्यादा की उम्र में भी इस कोर्ट पर कदम रखना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
उन्होंने साफ कहा, 'मुझे लगता है कि उम्र सिर्फ एक नंबर है और यह बात बिल्कुल सच है।' उनकी बातों में आत्मविश्वास और खेल के प्रति गहरा प्यार साफ झलक रहा था।
उम्र बस एक नंबर है: जोकोविच का अंदाज़ और दिल जीतने वाले पल
मैदान पर सिर्फ रैकेट ही नहीं बोलता, खिलाड़ियों का व्यक्तित्व भी बोलता है। जोकोविच ने मैच के दौरान और बाद में कई ऐसे पल दिए, जिन्होंने फैंस का दिल जीत लिया।
तीसरे सेट से पहले जब ब्रेक हुआ, तो उन्होंने अपनी टी-शर्ट से धागा काट रही एक बॉल किड के साथ शरारत की। उन्होंने ऐसे रिएक्ट किया, जैसे कि उस छोटी-सी बच्ची ने उन्हें चोट पहुंचा दी हो।
यह पल उनकी खिलंदड़ी प्रकृति को दिखाता है और दर्शकों को हंसा गया।
इतना ही नहीं, जोकोविच ने रॉयल बॉक्स में बैठे जाने-माने गोल्फर रोरी मैक्लरॉय को भी मजाकिया अंदाज में टेनिस मैच खेलने का चैलेंज दे दिया। उन्होंने कहा कि जो भी यह मैच जीतेगा, उसे वह 'मास्टर्स ग्रीन ब्लेजर' मिलेगा, जिसे पहनकर मैक्लरॉय मैच देखने आए थे।
ये छोटे-छोटे पल दिखाते हैं कि जोकोविच सिर्फ एक महान खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि एक दिलदार इंसान भी हैं, जो कोर्ट पर भी अपने सहज और मस्ती भरे अंदाज से फैंस को खूब एंटरटेन करते हैं। उनका ये अंदाज़ उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता है और उनकी लोकप्रियता का एक बड़ा कारण भी है।
डिफेंडिंग चैंपियन सिनर को मिली कड़ी टक्कर
एक तरफ जहां जोकोविच ने आसानी से जीत दर्ज की, वहीं दूसरी तरफ टूर्नामेंट के डिफेंडिंग चैंपियन और वर्ल्ड नंबर-1 जैनिक सिनर को पुर्तगाल के नूनो बोर्गेस के खिलाफ कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। वर्ल्ड रैंकिंग में 48वें नंबर पर काबिज बोर्गेस ने कई मौकों पर सिनर से बेहतर खेल दिखाया।
उन्होंने दूसरे सेट में एक समय सेट पॉइंट तक पहुंच कर सिनर को चौंका दिया था, लेकिन सिनर ने दबाव के क्षणों में अपना अनुभव दिखाया और शानदार वापसी की। यह मैच करीब 2 घंटे 32 मिनट तक चला, जिसमें सिनर ने 7-6 (7-4), 7-6 (7-2), 6-4 से जीत दर्ज की।
यह सिनर की विंबलडन में लगातार 9वीं जीत थी, लेकिन यह जीत उनकी मानसिक दृढ़ता का भी प्रमाण थी, क्योंकि बोर्गेस ने उन्हें हर पॉइंट के लिए लड़वाया। सिनर ने साबित किया कि चैंपियन यूं ही नहीं बनते, उनके अंदर आखिरी दम तक लड़ने की जिद होती है।
सिनर के लिए यह जीत कई मायनों में अहम है। फ्रेंच ओपन के दूसरे दौर में मिली हार के बाद उन्होंने ग्रास कोर्ट पर अभ्यास के लिए किसी टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लिया था, जिससे उनकी मैच फिटनेस को लेकर सवाल उठ रहे थे।
इस जीत ने उन सभी सवालों का जवाब दे दिया और यह साफ कर दिया कि सिनर विंबलडन में अपना खिताब बचाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। बोर्गेस के खिलाफ कड़ा मुकाबला जीतकर उन्होंने न सिर्फ अपनी फिटनेस बल्कि अपनी फॉर्म को भी साबित किया।
यह जीत उन्हें आगे के मुकाबलों के लिए और भी आत्मविश्वास देगी।
अगले दौर में किसके सामने होगा मुकाबला?
अब जब दोनों दिग्गज तीसरे दौर में पहुंच गए हैं, तो फैंस की निगाहें उनके अगले मुकाबलों पर टिकी हैं। नोवाक जोकोविच का मुकाबला फ्रांस के 25वें सीड आर्थर रिंडरनेच से होगा।
रिंडरनेच एक युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, जो जोकोविच को कड़ी चुनौती दे सकते हैं। वहीं, जैनिक सिनर अगले दौर में अमेरिका के जेनसन ब्रूक्सबी से भिड़ेंगे, जो वर्ल्ड रैंकिंग में 81वें नंबर पर हैं।
ब्रूक्सबी एक जुझारू खिलाड़ी हैं और सिनर को उन्हें हराने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। विंबलडन का रोमांच अब और बढ़ने वाला है, क्योंकि जैसे-जैसे टूर्नामेंट आगे बढ़ रहा है, हर मुकाबला एक नई कहानी लेकर आ रहा है।
देखना होगा कि ये दिग्गज खिलाड़ी आगे क्या कमाल करते हैं और क्या वे अपने खिताब की तरफ मजबूती से कदम बढ़ा पाते हैं।


