वाराणसी: भई वाह! मौसम का मिजाज भी गजब की ‘नटखटी’ दिखा रहा है काशी में. पहले झमाझम बारिश हुई तो लगा चलो भैया, अब कुछ दिन तक तो सुहाना मौसम रहेगा, किसानों की भी बल्ले-बल्ले होगी. लेकिन ये क्या, बारिश के बाद अब ऐसी उमस भरी गर्मी ने लोगों की हालत पतली कर दी है कि पूछो मत. जैसे किसी ने गरमा-गरम हवा में ढेर सारी नमी घोल दी हो, और अब वही हवा हर तरफ चिपचिप चिपचिप घूम रही है. अब लोग समझ नहीं पा रहे कि बारिश से खुश हों या इस चिपचिपी गर्मी से परेशान!
असल में, बुधवार को शहर में 52.5 मिलीमीटर की जोरदार बारिश हुई थी.
इस बारिश ने किसानों के चेहरों पर जो रौनक लाई थी, वो देखने लायक थी. बेचारे किसान लंबे समय से लू, तेज गर्मी और उमस की मार झेल रहे थे.
धान की नर्सरियां सूखने लगी थीं, कितनों की तो ठीक से तैयार भी नहीं हो पाई थीं. लेकिन इस एक बारिश ने जैसे उनकी उम्मीदों को नया जीवन दे दिया.
लगा कि अब तो धान की फसल अच्छी होगी, पानी की कमी नहीं होगी. लेकिन गुरुवार सुबह से ही मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली.
आसमान में हल्के बादल तो हैं, लेकिन सूरज देवता भी बादलों की ओट से अपनी तेज किरणें फेंक रहे हैं, जिससे उमस और भी बढ़ गई है. मानो बारिश के बाद वाली ठंडक को उमस ने निगल लिया हो.
शहर का अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, और हवा भी 8 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही है. हवा में नमी का स्तर 67 प्रतिशत बना हुआ है, जो इस उमस का असली खलनायक है.
मौसम विभाग ने दोपहर 2 बजे तक तो तेज बारिश का अनुमान लगाया था, लेकिन अभी तक माहौल में सिर्फ उमस का ही बोलबाला है. लोगों को समझ नहीं आ रहा कि छाता लेकर निकलें या पसीना पोंछने के लिए रुमाल!
बारिश के बाद की कहानी: किसानों के चेहरे पर रौनक
इस बारिश से सबसे ज्यादा राहत मिली है हमारे अन्नदाताओं को. कृषि विशेषज्ञ देवमणि त्रिपाठी बताते हैं कि ये बारिश किसानों के लिए अमृत के समान है.
उन्होंने कहा कि मौसम साफ होने के बाद किसान भाइयों को चाहिए कि वे अपने खेतों की जुताई का काम शुरू कर दें. इसके बाद तिलहनी और दलहनी फसलों के साथ-साथ मक्का, ज्वार और बाजरा की बुआई का काम शुरू किया जा सकता है.
यानी, इस बारिश ने न सिर्फ धान की नर्सरियों को बचाया है, बल्कि अगली फसलों के लिए भी जमीन तैयार कर दी है. एक तरह से कहें तो, कुदरत ने किसानों को दूसरा मौका दिया है.
सोचिए, कितने दिनों से किसान आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे थे, लेकिन बादल थे कि रूठे हुए थे. खेतों में दरारें पड़ने लगी थीं, और धान की पौध सूखने लगी थी.
ऐसे में ये 52.5 मिमी की बारिश किसी वरदान से कम नहीं थी.
जिन किसानों ने अभी तक नर्सरी नहीं डाली थी या जिनकी नर्सरी खराब हो गई थी, उन्हें अब फिर से उम्मीद की किरण दिखने लगी है. वे अब नए सिरे से अपनी खेती की योजना बना रहे हैं, क्योंकि ये बारिश सिर्फ पानी नहीं, उम्मीदें लेकर आई है.
मौसम वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी: अगले तीन दिन का हाल
मौसम वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव के अनुसार, मानसून अब पूरी तरह से सक्रिय हो चुका है. यानी, अब सिर्फ वाराणसी ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश को मानसून ने अपनी आगोश में ले लिया है.
उनकी मानें तो अगले कुछ दिनों तक वाराणसी और आसपास के इलाकों में बारिश का सिलसिला जारी रहने वाला है. तो भैया, छाता और रेनकोट तैयार रखना! हालांकि, उन्होंने एक चिंता वाली बात भी बताई है.
उनका कहना है कि इस साल कुल बारिश सामान्य से कम रहने के संकेत मिल रहे हैं.
मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि जून महीने में बारिश बेहद कम हुई थी. लेकिन जुलाई के अंत तक स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है, जिससे किसानों और आम लोगों, दोनों को फायदा मिलेगा.
मतलब, अभी थोड़ी और बारिश की दरकार है ताकि पानी की कमी पूरी हो सके और खेतों को पर्याप्त नमी मिल सके. फिलहाल, अगले तीन दिनों तक तो बारिश का अलर्ट है, इसलिए अगर बाहर निकलने का प्लान हो तो मौसम का हाल देखकर ही निकलें.
जून की बारिश का हिसाब किताब: उम्मीद से बहुत कम
अब जरा जून महीने के आंकड़ों पर गौर करते हैं, तो पता चलता है कि मामला वाकई में चिंताजनक था. मौसम विज्ञानी डॉ.
अतुल कुमार सिंह ने जो आंकड़े दिए हैं, वे बताते हैं कि जून के महीने में वाराणसी में सामान्य से 92 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी. पूरे जून में औसतन 88.
2 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस बार सिर्फ 6.8 मिलीमीटर बारिश ही रिकॉर्ड की गई.
आप समझ रहे हैं, कितना बड़ा अंतर है ये!
डॉ. अतुल कुमार सिंह ने यह भी साफ कर दिया है कि जुलाई में भी बहुत अच्छी बारिश की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही है.
हां, ये बात अलग है कि बीच-बीच में अच्छे बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं. यानी, ऐसा नहीं है कि बिल्कुल ही सूखा पड़ेगा, लेकिन लगातार झमाझम वाली बारिश की उम्मीद कम है.
ऐसे में ये जो थोड़ी-बहुत बारिश हो रही है, वही किसानों के लिए संजीवनी का काम कर रही है. उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मानसून और सक्रिय होगा और काशी के लोगों को इस उमस भरी गर्मी से राहत मिलेगी, साथ ही किसानों की भी चिंताएं दूर होंगी.


