वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की वर्दी की गरिमा को तार-तार किया है और कई लोगों के सपनों को चूना लगाया है। सोचिए, एक नौजवान, जिसकी उम्र सिर्फ 22 साल, पुलिस की चमचमाती वर्दी पहनकर इलाके में रौब झाड़ता था। कभी दोस्तों पर धौंस जमाता, कभी रिश्तेदारों को अपनी 'पहुंच' का एहसास कराता। लेकिन ये सब बस दिखावा था, एक ऐसा जाल जिसे उसने सरकारी नौकरी के भूखे लोगों को फंसाने के लिए बुना था। मामला वाराणसी के चोलापुर थाना क्षेत्र का है, जहाँ पुलिस ने एक ऐसे ही फर्जी सब-इंस्पेक्टर को दबोचा है, जो नौकरी के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठता था और जब बात पोल खुलने की आती, तो जेल भेजने की धमकी देता था।
ये कहानी है इंदरपुर, शिवपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले राजन की। सुबह के करीब 10 बजे थे, जब पुलिस ने उसे धर दबोचा।
राजन की चाल-ढाल और बात करने का तरीका ऐसा था कि किसी को शक तक नहीं होता था कि ये आदमी असली पुलिसवाला नहीं है। उसने अपने इस नकली रुतबे का खूब फायदा उठाया।
सरकारी नौकरी की तलाश में भटक रहे कई नौजवानों को उसने मीठी-मीठी बातों में फंसाया, उनसे पैसे बटोरे और बदले में उन्हें सिर्फ खोखले वादे दिए।
वर्दी की आड़ में चलता था ठगी का धंधा
राजन सिर्फ वर्दी पहनकर धौंस ही नहीं जमाता था, बल्कि उसने इसे अपने ठगी के धंधे का सबसे बड़ा हथियार बना रखा था। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों के लिए मारामारी किसी से छिपी नहीं है।
ऐसे में राजन लोगों को विश्वास दिलाता था कि उसकी पहुंच ऊपर तक है और वह आसानी से किसी को भी यूपी पुलिस या अन्य सरकारी महकमों में नौकरी दिलवा सकता है। लोग भी उसकी बातों में आ जाते थे, क्योंकि सामने एक वर्दीधारी शख्स बैठा होता था, जो कॉन्फिडेंस के साथ बातें करता था।
पैसों का लेन-देन होता था और राजन अपने शिकार को यकीन दिलाता था कि अब उसकी नौकरी पक्की है।
जैसे-जैसे दिन बीतते गए, नौकरी मिलने की उम्मीद में पैसे गंवाने वाले लोग परेशान होने लगे। जब वे राजन से अपनी नौकरी या कम से कम अपने पैसे वापस मांगने जाते, तो राजन का असली चेहरा सामने आ जाता।
जो शख्स कुछ दिन पहले तक मीठी-मीठी बातें कर रहा था, अब वह धमकियां देने लगता। 'अगर ज्यादा पूछताछ की, तो जेल भिजवा दूंगा,' ऐसे ही शब्दों का इस्तेमाल करके वह लोगों को चुप करा देता था।
उसकी इन धमकियों के आगे लोग डर जाते और चुपचाप अपने नुकसान को सह लेते। इस तरह, राजन ने अपनी झूठी पहचान और पुलिस की वर्दी की आड़ में एक पूरा ठगी का नेटवर्क चला रखा था।
एक दोस्त को हुआ शक, ऐसे खुला राज
राजन की इस नकली दुनिया पर आखिरकार शक की सुई घूमने लगी। उसके एक करीबी दोस्त को उसकी हरकतों पर कुछ अटपटा लगा।
राजन जिस तरह से पुलिस की वर्दी पहनकर घूमता था, बातें करता था और लोगों को नौकरी दिलाने के झांसे देता था, यह सब उसके दोस्त की नजरों में खटकने लगा। दोस्त ने पहले खुद अपने स्तर पर थोड़ी जांच-पड़ताल की और जब उसे राजन की दाल में कुछ काला लगा, तो उसने बिना देर किए पुलिस से शिकायत करने का फैसला किया।
यह शिकायत चोलापुर थाना पुलिस तक पहुंची। सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत हरकत में आई और राजन के इंदरपुर स्थित घर पर पहुंची।
असली पुलिस को अपने दरवाजे पर देखकर राजन शायद भौचक्का रह गया होगा, लेकिन उसने अपनी पुरानी आदत नहीं छोड़ी। उसने पुलिसकर्मियों पर भी अपना 'रौब' झाड़ने की कोशिश की।
उसने सोचा होगा कि जिस तरह वह आम लोगों को डराता-धमकाता आया है, वैसे ही इन पुलिसवालों को भी चुप करा देगा। लेकिन यह उसकी सबसे बड़ी गलती थी।
असली पुलिस के सामने उसकी एक न चली। पुलिस ने उसे तुरंत हिरासत में ले लिया और सीधे थाने ले गई।
पुलिस हिरासत में फर्जी दरोगा, जांच जारी
चोलापुर थाने पहुंचते ही राजन का सारा 'रौब' हवा हो गया। अब वह पुलिस की गिरफ्त में था और उससे गहन पूछताछ की जा रही थी।
चोलापुर थाना प्रभारी सधुबन राम गौतम ने इस पूरे मामले की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि आरोपी राजन के खिलाफ लगे आरोपों की सच्चाई जानने के लिए पूरी जांच की जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि राजन ने कितने लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगा है और उसने कुल कितनी रकम ऐंठी है। इसके साथ ही, पुलिस राजन के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और उसकी अन्य गतिविधियों को भी खंगाल रही है, ताकि इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचा जा सके।
पुलिस के लिए यह जानना भी अहम है कि उसने यह वर्दी कहां से हासिल की, कौन लोग इस ठगी में उसके साथ शामिल थे या उसे मदद कर रहे थे। एक फर्जी सब-इंस्पेक्टर का पकड़ा जाना यह भी दिखाता है कि समाज में ऐसे ठग सक्रिय हैं, जो लोगों की सरकारी नौकरी पाने की चाहत का फायदा उठाते हैं।
पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे ऐसे झांसेबाजों से सावधान रहें और किसी भी तरह की सरकारी नौकरी या अन्य प्रलोभनों के लिए अनजान व्यक्तियों पर भरोसा न करें। जांच पूरी होने के बाद ही राजन के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तब तक, असली पुलिस अपना काम कर रही है और फर्जी दरोगा सलाखों के पीछे अपनी करतूतों का हिसाब दे रहा है।

