कोडरमा: झारखंड के कोडरमा घाटी का नाम सुनते ही कई लोगों की धड़कनें तेज हो जाती हैं। यहां की सड़कें पहले से ही खतरों से भरी मानी जाती हैं, लेकिन बुधवार की रात तो जैसे आफत ने खुद ही दस्तक दे दी। मूसलाधार बारिश का कहर था और इसी के बीच नौवां माइल नाम की कुख्यात जगह पर सड़क पर गाड़ियों का तांडव शुरू हो गया। क्या पता था कि बिहार से रेडीमेड कपड़े लेकर आ रहा एक ट्रक, जिसने रात के अँधेरे में अपना सफर शुरू किया था, वो कोडरमा घाटी के इसी मोड़ पर आकर पलट जाएगा। रात के करीब 8 बजे का वक्त था, जब अचानक ट्रक बेकाबू हुआ और सड़क पर ढेर हो गया। पलक झपकते ही ट्रक में लदे कपड़ों के हज़ारों कार्टून पूरी सड़क पर बिखर गए, मानो किसी ने जानबूझकर रास्ता रोकने की साजिश रची हो।
सड़क पर बिछी कपड़ों की चादर ने तुरंत ही रांची-पटना मेन रोड पर चीख़-पुकार मचा दी। यातायात पूरी तरह से ठप हो गया।
इस पहले हादसे में गनीमत ये रही कि ट्रक चालक सुनील साव को हल्की-फुल्की चोटें ही आईं, लेकिन जो मंजर उसके सामने था, वो किसी भयावह सपने से कम नहीं था। घटना की सूचना बिजली की गति से कोडरमा सदर थाने तक पहुंची।
थाना प्रभारी अरविंद कुमार और एसआई धनेश्वर कुमार अपनी टीम के साथ तुरंत मौके की तरफ लपके। उन्हें पता था कि ये कोई मामूली दुर्घटना नहीं है, खासकर इस खतरनाक इलाके में और ऐसी बारिश के मौसम में।
रात के अंधेरे में दूसरी और तीसरी आफत
पुलिस की टीम अभी पहली दुर्घटना से निपटने की जुगत भिड़ा ही रही थी कि उसी जगह पर एक और बड़ी मुसीबत टूट पड़ी। केटीपीएस (Koderma Thermal Power Station) से राख यानी 'डस्ट' लेकर बिहार की तरफ जा रहा एक भारी-भरकम हाईवा (डंपर) भी बारिश की वजह से गीली और फिसलन भरी सड़क पर अपना संतुलन खो बैठा।
देखते ही देखते वो हाईवा भी पलट गया, और उससे निकली राख (डस्ट) सड़क पर ऐसी फैली, जैसे किसी ने जानबूझकर पूरी सड़क पर पाउडर छिड़क दिया हो। अब सोचिए, एक तरफ कपड़ों के कार्टून बिखरे पड़े थे और दूसरी तरफ राख की मोटी परत।
यह स्थिति ऐसी थी, जो किसी भी वाहन चालक के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं।
अभी लोग इस दूसरे हादसे को समझ ही पाते कि पीछे से आ रहे 3-4 वाहन भी बेकाबू होकर एक के बाद एक आपस में टकरा गए। यह किसी चेन रिएक्शन जैसा था, जहाँ एक गलती के बाद दूसरी और फिर तीसरी।
सड़क पर अचानक हुए इन लगातार हादसों ने एक भयावह माहौल बना दिया। गाड़ियां एक-दूसरे में धंस गईं, कांच टूट गए और चारों तरफ सिर्फ जाम ही जाम था।
रांची-पटना मेन रोड पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं, जो दूर तक सिर्फ रोशनी की लकीरें दिखा रही थीं।
जो लोग अपने घरों को लौट रहे थे या किसी ज़रूरी काम से जा रहे थे, वे सब के सब इस अनचाही आफत में फंस गए।
यात्रियों की रात; पुलिस का संघर्ष
रात के उस पहर में, जब झमाझम बारिश लगातार बरस रही थी और कोडरमा घाटी का अँधेरा अपनी डरावनी छाया फैला रहा था, पुलिस और स्थानीय प्रशासन के लिए राहत और बचाव कार्य शुरू करना एक बड़ी चुनौती बन गया था। पलटे हुए ट्रकों और हाईवा को हटाना कोई आसान काम नहीं था।
क्रेन मंगाई गईं, लेकिन बारिश और सड़क पर फैली फिसलन ने काम को बहुत धीमा कर दिया। पुलिसकर्मी और बचाव दल के सदस्य पूरी रात पसीना बहाते रहे, लेकिन प्रकृति का प्रकोप उनके काम में लगातार बाधा डाल रहा था।
सड़क पर फंसे यात्री हज़ारों की तादाद में थे। छोटे बच्चों से लेकर बूढ़े तक, सब इस अनचाहे जाम में कैद हो गए थे।
किसी को अपनी मंजिल तक पहुंचने की जल्दी थी, तो कोई सिर्फ रात गुजारने की जगह ढूंढ रहा था। खाने-पीने का इंतज़ाम नहीं था, शौचालय की समस्या थी, और सबसे बढ़कर, अनिश्चितता का डर हर चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था।
पूरी रात वे इसी तरह भारी परेशानियों का सामना करते रहे, अपनी घड़ियों की तरफ देखते रहे कि कब सुबह हो और कब ये मुसीबत टले। कुछ वाहन चालकों ने समझदारी दिखाते हुए बरही-गया मार्ग से एक वैकल्पिक रास्ता तलाश लिया, लेकिन ज़्यादातर लोग तो फंस ही चुके थे।
सुबह होते-होते राहत की सांस
जैसे-तैसे रात कटी। सुबह का सूरज जब अपनी किरणें बिखेरने लगा, तब जाकर राहत और बचाव कार्य में थोड़ी तेजी आई।
पुलिस और प्रशासन की टीम ने अथक प्रयास करके धीरे-धीरे जाम को हटाना शुरू किया। सबसे पहले पलटे हुए वाहनों को क्रेन की मदद से सड़क से हटाया गया, फिर बिखरे हुए कपड़ों के कार्टून और राख को साफ किया गया।
यह एक लंबा और थका देने वाला ऑपरेशन था, लेकिन अंततः सुबह होते-होते सड़क को आंशिक रूप से खोला जा सका।
वाहनों की आवाजाही शुरू हुई, लेकिन गति धीमी थी। कई घंटे फंसे रहने के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली।
यह घटना कोडरमा घाटी की उन डरावनी कहानियों में से एक बन गई, जो बताती है कि प्रकृति का रौद्र रूप और सड़क दुर्घटनाएं, खासकर बारिश के मौसम में, कितनी जानलेवा हो सकती हैं। पुलिस अभी भी स्थिति पर नज़र बनाए हुए है ताकि यातायात पूरी तरह से सामान्य हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।


