दिल्ली: भैया, बिजली की कहानी अब बस इतनी सी नहीं रही कि कितनी चाहिए और कहाँ से आएगी। कहानी में एक नया ट्विस्ट आ गया है, और इसका नाम है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जिसे हम शॉर्ट में AI कहते हैं। ये जनाब इतनी बिजली पी रहे हैं कि बड़े-बड़े बिजली सप्लायरों के भी पसीने छूट रहे हैं। हालत ये है कि हमारे आस-पास जो बिजली का ग्रिड है, वो कहीं AI डेटा सेंटरों की भूख शांत करने के चक्कर में खुद ही हांफने न लगे। जो बिजली कभी सिर्फ टीवी, फ्रिज या AC चलाने के लिए चाहिए होती थी, अब वो AI के जटिल एल्गोरिदम और डेटा प्रोसेसिंग के लिए चाहिए, और उसकी मांग इतनी तेजी से बढ़ रही है कि आंखें फटी की फटी रह जा रही हैं।
आप सोच रहे होंगे कि इसमें क्या बड़ी बात है, बिजली तो और भी बहुत चीज़ें खाती हैं। लेकिन दिक्कत ये है कि AI का कामकाज भैया, बिल्कुल अनप्रेडिक्टेबल है।
कभी एकदम से फुल पावर चाहिए होती है, कभी एकदम शांति। ये झटकेदार मांग बिजली कंपनियों को परेशान कर रही है।
एक तरफ जहाँ डेटा सेंटर धड़ाधड़ लग रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बिजली बनाने वाली कंपनियां और सप्लायर इस बात से टेंशन में हैं कि वो इस बढ़ती हुई और मनमौजी मांग को कैसे पूरा करेंगे। मानो या न मानो, तीन चौथाई यानी करीब 77% बिजली कंपनियों के बड़े अधिकारी अब मान चुके हैं कि डेटा सेंटरों की बिजली की मांग इतनी तेजी से बढ़ेगी कि वे इसे पूरा नहीं कर पाएंगे।
और भैया, 68% तो ये भी मान रहे हैं कि AI की बढ़ती मांग के कारण बिजली कटौती अब आम बात हो जाएगी। कहानी में और भी पेंच है, आइए समझते हैं।
बिजली संकट की नई चुनौती: AI का बढ़ता बोझ
कैपजेमिनी (Capgemini) की एक ताजा रिपोर्ट ने आँखें खोलने वाले खुलासे किए हैं। रिपोर्ट बताती है कि AI की ऊर्जा मांग कितनी अप्रत्याशित हो सकती है।
बिजली सेक्टर के 77% अधिकारी तो खुद मानते हैं कि AI के कभी भी बदल जाने वाले वर्कलोड के चलते मांग का सही अनुमान लगाना उनके लिए टेढ़ी खीर बन गया है। इसका नतीजा क्या है? एक तो ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है, और दूसरा, बिजली की मांग में ऐसे भयंकर और अप्रत्याशित उछाल आ रहे हैं जिनकी किसी को उम्मीद ही नहीं होती।
मतलब, बिजली सप्लायरों को समझ ही नहीं आ रहा कि कब, कहाँ और कितनी बिजली की जरूरत पड़ेगी।
आप सोचिए, पहले बिजली की खपत का अनुमान लगाना एक गणित होता था, जिसमें आप गर्मी में AC की मांग या त्योहारों पर लाइटों की खपत जोड़ लेते थे। लेकिन AI ने सारे गणित बिगाड़ दिए हैं।
अब अचानक से किसी बड़े AI मॉडल की ट्रेनिंग शुरू हो गई या कोई बड़ा डेटा एनालिसिस चल पड़ा, तो बिजली की मांग ऐसी ऊपर जाती है कि ग्रिड में भी कंपन होने लगता है। और ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं है।






































