सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 7वां दिन; वजन 5 किलो घटा
सारांश
परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ी। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों का गुणगान करने वाली किताबों पर बड़ा एक्शन।

परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ी। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों का गुणगान करने वाली किताबों पर बड़ा एक्शन।

नई दिल्ली: जंतर-मंतर की तपती धूप और शोर-शराबे के बीच एक शख्स पिछले कई दिनों से चुपचाप अपनी लड़ाई लड़ रहा है। बात हो रही है सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की, जो परीक्षा प्रणाली में फैली अनियमितताओं के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के इस विरोध प्रदर्शन का 15वां दिन था, लेकिन वांगचुक के लिए यह समय काफी मुश्किल होता जा रहा है।
सोनम वांगचुक अब 7वें दिन की भूख हड़ताल पर हैं और उनका शरीर धीरे-धीरे जवाब देने लगा है। खबर है कि अनशन के कारण उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई है और पिछले कुछ दिनों में उनका वजन लगभग 5 किलो घट गया है।
शरीर कमजोर हो चुका है, लेकिन उनकी मांग अब भी वही है—वे चाहते हैं कि परीक्षा सिस्टम की बड़ी गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय हो और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से हटाया जाए।
कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले चल रहा यह प्रदर्शन अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में इतनी खामियां हैं कि छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है।
वांगचुक का मानना है कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी और शीर्ष स्तर पर बदलाव नहीं होगा, तब तक सुधार संभव नहीं है। जंतर-मंतर पर मौजूद समर्थकों के बीच उनकी गिरती सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है।
इस बीच, देश के अन्य हिस्सों से भी कुछ बड़ी खबरें सामने आई हैं, जो शासन और सुरक्षा के लिहाज से काफी गंभीर हैं। जम्मू-कश्मीर में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं।
वहां सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में ऐसी किताबें मिली हैं, जिनमें हाफिज सईद और मकबूल भट्ट जैसे खूंखार आतंकियों और अलगाववादियों का महिमामंडन किया गया था। इन किताबों में उन्हें 'महान' बताकर पेश किया गया था।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा ने इस लापरवाही को बेहद गंभीरता से लिया है। किताबों में आपत्तिजनक सामग्री मिलने के बाद उन्होंने तुरंत एक्शन लिया और इस मामले में जिम्मेदार 8 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है।
प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि ऐसी किताबें आखिर लाइब्रेरी तक पहुंची कैसे और इसे रोकने वाले अधिकारी क्या कर रहे थे।
वहीं, मणिपुर से एक बड़ी राजनीतिक और सामाजिक खबर आई है। राज्य के मुख्यमंत्री एन.
बी. केमचंद सिंह करीब साढ़े चार महीने बाद पहली बार चूराचांदपुर जिले में पहुंचे हैं।
यह यात्रा एक दुखद मौके पर हुई, जहां दिवंगत भाजपा विधायक वुंग्जागिन वाल्टे का अंतिम संस्कार किया गया।
हैरानी की बात यह है कि हिंसा के कारण विधायक की पार्थिव देह को करीब साढ़े चार महीने तक चूराचांदपुर में सुरक्षित रखा गया था, क्योंकि हालात ऐसे नहीं थे कि अंतिम संस्कार किया जा सके। शनिवार को मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर के जरिए कुकी-बहुल इस इलाके में पहुंचे।
मई 2023 में भड़की जातीय हिंसा के बाद यह मुख्यमंत्री की इस इलाके की पहली यात्रा मानी जा रही है, जिसे राजनीतिक और सामाजिक नजरिए से काफी महत्वपूर्ण देखा जा रहा है।
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