चतरा: सोमवार की सुबह हर आम दिन की तरह थी, जब चतरा के नगवा मुहल्ले से अजीत कुमार नाम के एक आदमी अपने घर से निकले। घर वालों को लगा कि जैसे हर दिन वो हेरुआ डैम के पास शौच के लिए जाते हैं, वैसे ही आज भी गए होंगे। लेकिन फिर एक के बाद एक घंटे बीते, दोपहर ढली, शाम हुई और रात भी घिर आई, पर अजीत घर नहीं लौटे। परिवार को चिंता हुई, खोजबीन शुरू हुई, लेकिन अजीत का कहीं कोई अता-पता नहीं चला। रातभर बेचैनी में गुजरी। फिर अगली सुबह यानी मंगलवार को हेरुआ नदी ने एक ऐसी खबर दी, जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया। नदी में तैरती मिली एक लाश, जो किसी और की नहीं, बल्कि उसी 40 वर्षीय अजीत कुमार की थी, जिनकी तलाश सोमवार सुबह से चल रही थी।
यह खबर चतरा जिले के सदर थाना क्षेत्र से आई है, जहां हेरुआ नदी से एक गुमशुदा शख्स का शव मिलने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। मृतक की पहचान नगवा मुहल्ला निवासी अजीत कुमार के तौर पर की गई है, जिनके पिता का नाम शंभू साव है।
इस घटना ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है और स्थानीय लोग भी सकते में हैं कि आखिर ऐसा कैसे हो गया।
सोमवार सुबह घर से निकले थे अजीत, नहीं लौटे वापस
परिजनों के मुताबिक, अजीत कुमार सोमवार सुबह करीब 7 बजे के आस-पास घर से निकले थे। उनका रोजाना का काम था कि वो हेरुआ डैम के पास खुले में शौच के लिए जाते थे।
उस दिन भी वो इसी आदत के तहत निकले थे। लेकिन, जब दोपहर तक वह घर नहीं लौटे, तो परिवार के सदस्यों को कुछ अजीब लगा।
उन्होंने सोचा कि शायद किसी काम से रुक गए होंगे, लेकिन जब शाम ढलने लगी और रात होने को आई, तब भी अजीत का कोई पता नहीं चला, तो परिवार की चिंताएं बढ़ने लगीं।
परिवार के लोग और स्थानीय परिचितों ने मिलकर अजीत की खोजबीन शुरू की। उन्होंने आसपास के गांवों में पूछा, रिश्तेदारों से संपर्क किया और उन सभी संभावित जगहों पर ढूंढा, जहां अजीत अक्सर जाते थे।
पूरी रात खोजबीन चलती रही, लेकिन अजीत कुमार का कोई सुराग नहीं मिला। हर गुजरते पल के साथ परिवार की उम्मीदें धूमिल होती जा रही थीं और दिल में एक अनजाना डर बैठता जा रहा था।
उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर अजीत कहां चले गए और उनके साथ क्या हुआ होगा?
भाई ने नदी में देखा तैरता शव, मचा कोहराम
मंगलवार की सुबह परिजनों के लिए एक ऐसी सुबह बनकर आई, जिसे वे जीवनभर नहीं भूल पाएंगे। अजीत के छोटे भाई कृष्ण, जो रातभर की तलाश के बाद थके हारे थे, सुबह एक बार फिर हेरुआ नदी के किनारे पहुंचे।
शायद उनके मन में एक आखिरी उम्मीद थी कि शायद अजीत कहीं मिल जाएं। लेकिन जो उन्होंने देखा, वह किसी सदमे से कम नहीं था।
नदी के शांत पानी में एक शव तैर रहा था, और पास जाकर देखने पर कृष्ण के होश उड़ गए। वह शव किसी और का नहीं, बल्कि उनके बड़े भाई अजीत कुमार का ही था।




































