नई दिल्ली: टेक वर्ल्ड में इन दिनों जो उठा-पटक चल रही है, वो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है! कभी बड़े-बड़े पैकेज, कभी बंपर हायरिंग और अब अचानक धड़ाधड़ छंटनी (Layoffs) की खबरें। लेकिन इस बार खबर दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक, माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) से है। भैया, सीधे-सीधे कहें तो माइक्रोसॉफ्ट ने एक ही झटके में करीब 4,800 लोगों को नौकरी से हटा दिया है। यह कंपनी की कुल ग्लोबल वर्कफोर्स का तकरीबन 2.1 प्रतिशत है। अब भैया, इतनी बड़ी कंपनी इतने लोगों को निकाले तो सवाल उठना लाज़मी है, और सबसे बड़ा सवाल जो सबके दिमाग में कौंध रहा है वो है - क्या इन छंटनियों की वजह AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है? क्या रोबोट इंसानों की नौकरियां खा रहे हैं?
लेकिन माइक्रोसॉफ्ट की एक टॉप एग्जिक्यूटिव ने इस सवाल पर जो जवाब दिया है, वो आपको हैरान कर देगा। कंपनी की एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और चीफ पीपल ऑफिसर एमी कोलमैन (Amy Coleman) ने अपने एंप्लॉयीज को भेजे मैसेज में साफ-साफ कहा है कि नहीं, इन छंटनियों की वजह AI बिल्कुल भी नहीं है।
तो फिर मामला क्या है? आइए, जरा खोदकर निकालते हैं पूरी कहानी को।
आखिर इतने लोगों की नौकरी जाने की असली वजह क्या है?
देखो, माइक्रोसॉफ्ट कोई छोटी-मोटी कंपनी तो है नहीं। वो दुनिया की सबसे पावरफुल टेक कंपनियों में से एक है।
ऐसे में जब वो इतने बड़े पैमाने पर छंटनी करती है, तो उसके पीछे कोई बड़ा रीज़न तो होगा ही। एमी कोलमैन के मुताबिक, ये छंटनी कंपनी के ‘रीस्ट्रक्चरिंग प्लान’ का हिस्सा है।
मतलब, कंपनी अपने बिज़नेस की बदलती प्राथमिकताओं के हिसाब से अपने एंप्लॉयीज की संख्या को एडजस्ट कर रही है। अब आप कहेंगे कि ये 'रीस्ट्रक्चरिंग' और 'बदलती प्राथमिकताएं' क्या होती हैं? आसान भाषा में कहें तो कंपनी को लग रहा है कि अब उसे कुछ अलग स्किल्स वाले लोगों की जरूरत है या कुछ जगहों पर जहां पहले ज्यादा लोग थे, अब उनकी उतनी जरूरत नहीं है।
कुल मिलाकर, बिज़नेस चलाने का तरीका बदल रहा है, तो टीम को भी उसी हिसाब से बदला जा रहा है।
Xbox डिवीजन पर क्यों गिरी गाज?
इस छंटनी का सबसे बड़ा असर माइक्रोसॉफ्ट के गेमिंग डिवीजन, यानी Xbox पर पड़ा है। गेमिंग की दुनिया में Xbox एक बड़ा नाम है, लेकिन इस डिवीजन में 3,200 लोगों की नौकरियां खत्म हो जाएंगी।
इनमें से 1,600 लोग तो तुरंत ही नौकरी से बाहर हो जाएंगे। अब आप सोच रहे होंगे कि Xbox पर ही इतनी बड़ी गाज क्यों गिरी?
बात कुछ ऐसी है कि माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले कई सालों से Xbox में अंधाधुंध पैसा लगाया है। इसमें सबसे बड़ा निवेश था Activision Blizzard का अधिग्रहण, जिसके लिए माइक्रोसॉफ्ट ने अरबों डॉलर खर्च किए थे।
उम्मीद थी कि इस डील से Xbox को सोनी के प्लेस्टेशन (Sony PlayStation) और निन्टेंडो (Nintendo) जैसी दिग्गज कंपनियों से टक्कर लेने में मदद मिलेगी, लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा। इतने भारी-भरकम निवेश के बावजूद माइक्रोसॉफ्ट अभी भी प्लेस्टेशन और निन्टेंडो के मुकाबले कहीं पीछे खड़ी है।
अब जब पैसा लगाने के बाद भी वैसा रिजल्ट नहीं मिल रहा, तो कंपनी को अपनी गेमिंग स्ट्रेटेजी बदलनी पड़ी है। पहले वो सिर्फ कंसोल-एक्सक्लूसिव गेम्स (यानी ऐसे गेम्स जो सिर्फ उनके Xbox कंसोल पर चलें) पर जोर देती थी।
लेकिन अब वो अपने टाइटल्स को कई प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध करा रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा गेमर्स तक पहुंच सके। जाहिर है, जब स्ट्रेटेजी बदलती है, तो वर्कफोर्स की जरूरतें भी बदल जाती हैं, और यही वजह है कि Xbox डिवीजन में इतनी बड़ी छंटनी हुई है।
तो क्या AI का कोई रोल नहीं?
ये वो सवाल है जिस पर सबसे ज्यादा बवाल मच रहा है। हर कोई सोच रहा है कि आजकल हर कंपनी AI की बात करती है, और AI से काम आसान होता जा रहा है, तो क्या यही वजह है कि इंसानों को निकाला जा रहा है? लेकिन एमी कोलमैन ने अपने मैसेज में इस बात पर जोर दिया है कि AI छंटनी की वजह नहीं है।
उन्होंने साफ शब्दों में लिखा है, “मैं साफ तौर पर बताना चाहता हूं कि आज कंपनी से हटाए गए एंप्लॉयीज की जगह AI काम नहीं करेगा।” ये एक बहुत बड़ा स्टेटमेंट है, क्योंकि अगर AI ही वजह होता, तो कंपनी शायद इतनी खुलकर इस बात को नहीं कहती।
हालांकि, उन्होंने ये भी माना कि AI काम करने के तरीके को बदल रहा है। उनका कहना है, “यह सही है कि AI काम करने के तरीके को बदल रहा है।
ऐसे कुछ काम जिसे हम रोजाना करते हैं, वे ऑटोमेटेड हो सकते हैं। इसका मतलब है कि हम सभी को सीखते रहना होगा।
”
कर्मचारियों को कौन सा 'नया मंत्र' सीखना होगा?
कोलमैन ने अपने मैसेज में एंप्लॉयीज को एक ज़रूरी सलाह भी दी है। उन्होंने कहा है कि कर्मचारियों को नए स्किल्स सीखते रहना होगा।
काम के बदलते स्वरूप के हिसाब से खुद को बदलते रहना होगा। ये बात सिर्फ माइक्रोसॉफ्ट के कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि आज की तारीख में लगभग हर इंडस्ट्री में काम करने वाले हर प्रोफेशनल पर लागू होती है।
आज की दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है कि जो खुद को अपग्रेड नहीं करेगा, वो कहीं पीछे छूट जाएगा।
उन्होंने ये भी जोड़ा कि कंपनी के कस्टमर्स भी ऐसा कर रहे हैं और वे इसमें माइक्रोसॉफ्ट की मदद चाहते हैं। “हम तब तक ऐसा नहीं कर सकते हैं, जब तक हम खुद अपने यहां बदलाव नहीं करते।
” यानी, कंपनी के अंदर भी बदलाव जरूरी है ताकि वो अपने कस्टमर्स की बदलती जरूरतों को पूरा कर सके।
आगे और क्या बदलाव देखने को मिल सकते हैं?
एमी कोलमैन ने साफ-साफ इशारा किया है कि माइक्रोसॉफ्ट अभी बदलाव के दौर से गुजर रही है। उनके मुताबिक, “भविष्य में कंपनी में और बदलाव होने की उम्मीद है।
” इसका मतलब है कि आने वाले समय में हमें माइक्रोसॉफ्ट में और भी रीस्ट्रक्चरिंग, नए निवेश, और शायद नई तरह की हायरिंग भी देखने को मिल सकती है।
कुल मिलाकर, इन छंटनियों को कंपनी के लोगों, निवेश और रिसोर्सेज में बदलाव करने के एक बड़े प्लान का हिस्सा बताया जा रहा है। कंपनी का फोकस लोगों, निवेश और एनर्जी पर है, ताकि वो अपने कस्टमर्स को तेजी से बदलती इंडस्ट्रीज के हिसाब से बेस्ट सर्विसेज ऑफर कर सके।
तो भैया, कहानी ये है कि AI तो बहाना है, असली खेल है कंपनी का खुद को बदलते वक्त के साथ ढालने का। माइक्रोसॉफ्ट सिर्फ अपने ग्राहकों के लिए ही नहीं, बल्कि खुद के लिए भी 'बदलाव' का ये नया पाठ पढ़ा रही है।






































