समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर में बुधवार रात खुशियों से भरा एक घर अचानक मातम में डूब गया। जिस घर में अभी कुछ देर पहले तक बेटे के जन्म की छठी का जश्न मन रहा था, मंगल गीत गाए जा रहे थे, वहां पल भर में सन्नाटा पसर गया। एक पिता, जिसने सालों के इंतजार के बाद बेटे का चेहरा देखा था, वही पिता संगीत की धुन जोड़ने की कोशिश में बिजली के करंट की चपेट में आ गया। अब बस चीखें और सिसकियाँ ही बाकी थीं।
कहानी है मोहनपुर मोहल्ला के दीपक कुमार की। दीपक को शादी के कई साल बाद एक बेटा हुआ था।
ये खुशी सिर्फ दीपक और उसके परिवार की नहीं, बल्कि पूरे मोहल्ले की थी। बुधवार को बेटे की छठी का भोज रखा गया था।
घर में रौनक थी, रिश्तेदार-दोस्त सब जुटे थे। चारों तरफ हंसी-खुशी का माहौल था।
महिलाएं मंगल गीत गा रही थीं, बच्चे शोर मचा रहे थे। हर कोई इस नए मेहमान के आने की खुशी में डूबा हुआ था।
जश्न के बीच मौत का झोंका
दीपक के पड़ोसी कुंदन कुमार ने बताया कि उस रात घर में भोज चल रहा था। मेहमान खाना खा रहे थे, और माहौल को और खुशनुमा बनाने के लिए गाने बजाने का इंतजाम किया जा रहा था।
अक्सर गांवों में ऐसे मौकों पर लोग खुद ही बिजली के तार जोड़कर साउंड सिस्टम या डीजे का जुगाड़ करते हैं। दीपक भी यही कर रहा था।
गाना बजाने के लिए वह बिजली का तार जोड़ने गया। शायद एक छोटी सी चूक हुई, या तार में कोई दिक्कत थी, कि अचानक उसे बिजली का ज़ोरदार झटका लगा।
पलक झपकते ही दीपक ज़मीन पर गिर पड़े। जो घर कुछ देर पहले ठहाकों से गूँज रहा था, वहां अचानक चीख-पुकार मच गई।
घरवाले, दोस्त, पड़ोसी..
. सब दीपक की तरफ भागे।
सबने मिलकर फौरन उसे समस्तीपुर सदर अस्पताल पहुंचाया। लेकिन अस्पताल पहुँचते-पहुँचते देर हो चुकी थी।
डॉक्टरों ने जांच के बाद दीपक को मृत घोषित कर दिया।
खुशियां बनीं मातम, पोस्टमार्टम से इनकार
दीपक की मौत की खबर सुनते ही अस्पताल में मौजूद परिजनों और दोस्तों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। जिस बेटे के जन्म की खुशी में ये सारी तैयारियां हुई थीं, उस बेटे के पिता अब इस दुनिया में नहीं थे।
घर में छाया जश्न का माहौल पल भर में मातम में बदल गया। परिवार के लिए ये सदमा इतना गहरा था कि उन्होंने शव का पोस्टमार्टम कराने से भी इनकार कर दिया।
वो बस जल्द से जल्द दीपक को घर ले जाना चाहते थे। बिना पोस्टमार्टम कराए ही परिवारवाले शव लेकर घर लौट गए।
दीपक के जानने वाले बताते हैं कि इस बेटे का जन्म उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। लंबे इंतजार और दुआओं के बाद ये खुशी उनके आंगन आई थी।
शायद इसीलिए घर में इतनी भव्यता से छठी का भोज रखा गया था। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
जिस हाथ से दीपक अपने बेटे को थामना चाहते थे, वही हाथ अब बेजान पड़ा था।
पुलिस को नहीं मिली जानकारी
इस पूरी घटना को लेकर मुफस्सिल थाना अध्यक्ष इंस्पेक्टर अजीत कुमार ने बताया कि उनके पास घटना से संबंधित कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि रात में सदर अस्पताल में करंट लगने से जख्मी एक युवक को इलाज के लिए लोग लाए ज़रूर थे, लेकिन कुछ देर बाद ही परिवार के लोग उसे उठाकर अपने साथ ले गए।
ऐसे में पुलिस के पास भी इस मामले में कोई औपचारिक रिकॉर्ड दर्ज नहीं हुआ है।
दीपक कुमार की अचानक हुई मौत ने मोहनपुर मोहल्ले में गहरे दुख की लहर पैदा कर दी है। लोग सोच रहे हैं कि काश वो तार जोड़ने के लिए नहीं गए होते, या कोई और इंतजाम किया होता।
लेकिन अब सिर्फ यादें बची हैं, और एक नवजात शिशु जिसे अपने पिता का स्पर्श नसीब नहीं हो पाया। ये घटना बताती है कि बिजली के काम में छोटी सी लापरवाही भी कितनी भारी पड़ सकती है।


