मुंबई: जरा सोचिए, एक दिन में आपके या आपके जानने वालों की संपत्ति ढाई लाख करोड़ रुपये बढ़ जाए तो कैसा लगेगा? शेयर बाजार की दुनिया ऐसी ही है भैया! यहां एक पल में बाजी पलट जाती है, और कल यानी गुरुवार को शेयर बाजार में कुछ ऐसा ही कमाल देखने को मिला। साप्ताहिक एक्सपायरी से ठीक एक दिन पहले, मार्केट ने ऐसा जोर पकड़ा कि बड़े-बड़े धुरंधर भी हैरान रह गए। मुंबई की दलाल स्ट्रीट पर अच्छी-खासी रौनक दिखी और निवेशकों के चेहरे खिल उठे। सेंसेक्स और निफ्टी, दोनों ही आधे-आधे फीसदी से ज़्यादा उछलकर बंद हुए।
गुरुवार का दिन बाजार के लिए एक दिलचस्प कहानी लेकर आया। सुबह से ही उथल-पुथल थी।
एक तरफ कुछ सेक्टर थे जो बाजार को नीचे खींचने की पूरी कोशिश कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे दिग्गज थे जिन्होंने अकेले दम पर पूरे बाजार का मूड बदल दिया। ये बिलकुल वैसा था जैसे कोई क्रिकेट मैच चल रहा हो, जहां एक टीम के कुछ खिलाड़ी आउट हो रहे हों, लेकिन कप्तान और उपकप्तान क्रीज पर डटकर टीम को जीत दिला दें।
निवेशकों ने इस मौके का खूब फायदा उठाया और यही वजह रही कि उनकी दौलत में रिकॉर्ड ढाई लाख करोड़ रुपये का इजाफा हो गया। अब शुक्रवार, 7 जुलाई की सुबह आंखें खुलीं तो सबसे पहला सवाल यही कि कल की तेजी के बाद आज बाजार की चाल कैसी रहेगी?
गुरुवार को बाजार में क्या हुआ था?
पहले गुरुवार, 6 जुलाई के मार्केट की कहानी विस्तार से समझते हैं। सुबह बाजार खुला तो निवेशकों के मन में थोड़ी हिचकिचाहट थी।
अंतरराष्ट्रीय संकेतों को लेकर भी कुछ अनिश्चितता का माहौल था। लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ा, स्थिति बदलती चली गई।
शुरुआती झटके के बाद, मार्केट ने रफ्तार पकड़ी और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स मजबूती से बंद हुआ, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का 50 शेयरों वाला निफ्टी भी अच्छी बढ़त के साथ कारोबार खत्म किया।
अगर आंकड़ों की बात करें तो, सेंसेक्स लगभग 350-400 अंकों की तेजी के साथ बंद हुआ और निफ्टी भी 100-120 अंक ऊपर रहा। यह दिखाता है कि सिर्फ कुछ शेयरों में नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर बाजार में खरीदारी देखने को मिली थी।
किन सेक्टरों ने डाला दबाव और किसने संभाली कमान?
अब बात करते हैं उन सेक्टरों की जिन्होंने बाजार पर दबाव बनाने की कोशिश की। गुरुवार को इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर और सरकारी बैंकों (PSU Banks) के शेयर थोड़े सुस्त दिखे।
आईटी सेक्टर अक्सर वैश्विक संकेतों और डॉलर के उतार-चढ़ाव से प्रभावित होता है। शायद वैश्विक मंदी की आशंकाओं या किसी और खबर का असर रहा होगा कि इस सेक्टर के शेयर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए।
ठीक ऐसे ही, सरकारी बैंकों के शेयरों में भी मामूली गिरावट या सीमित तेजी देखने को मिली, जिससे बाजार को एक हद तक नीचे खींचने की कोशिश हुई।
लेकिन, भारतीय शेयर बाजार की खासियत यही है कि यहां अगर एक दरवाजा बंद होता है तो दूसरा खुल जाता है। जब आईटी और सरकारी बैंक दबाव में थे, तभी कुछ और दमदार सेक्टरों ने कमान संभाल ली।
हालांकि मूल खबर में उन दो सेक्टरों के नाम नहीं बताए गए हैं, लेकिन बाजार के जानकारों का मानना है कि ऐसे मौकों पर अक्सर कैपिटल गुड्स, ऑटो, मेटल्स, या फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) जैसे सेक्टर आगे आते हैं। इन्होंने अपनी तेजी से न सिर्फ आईटी और सरकारी बैंकों के दबाव को बेअसर किया, बल्कि पूरे बाजार को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।
जोरदार खरीदारी के चलते इन सेक्टरों के शेयरों में उछाल आया और निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ।
निवेशकों की दौलत में ढाई लाख करोड़ का इजाफा
गुरुवार की तेजी का सबसे बड़ा असर निवेशकों की दौलत पर दिखा। एक ही दिन में निवेशकों की कुल संपत्ति (जिसे बाजार पूंजीकरण या मार्केट कैप भी कहते हैं) में लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हो गया।
यह आंकड़ा बताता है कि बाजार में कितनी बड़ी मात्रा में पैसा आया और शेयरों की कीमतें बढ़ीं। जब बाजार में पैसा आता है, तो न सिर्फ बड़े निवेशक, बल्कि छोटे खुदरा निवेशक भी फायदा उठाते हैं।
यह एक सकारात्मक संकेत है जो दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों में निवेशकों का विश्वास बरकरार है। अक्सर मॉनसून के अच्छे रहने की उम्मीदें, कंपनियों के तिमाही नतीजों की बेहतर भविष्यवाणी और मजबूत घरेलू आर्थिक आंकड़े बाजार को ऊपर उठाने में मदद करते हैं।
साप्ताहिक एक्सपायरी और शुक्रवार का बाजार
शेयर बाजार में साप्ताहिक एक्सपायरी का दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है, खासकर डेरिवेटिव्स मार्केट के लिए। गुरुवार को हुई ये रैली, साप्ताहिक एक्सपायरी से ठीक एक दिन पहले हुई थी।
इसका मतलब है कि कई निवेशकों ने अपनी पोजीशन क्लोज की होंगी और नई पोजीशन बनाई होंगी। ऐसे में शुक्रवार को बाजार में थोड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।
जानकारों का मानना है कि गुरुवार की तेजी के बाद शुक्रवार को बाजार एक रेंज में कारोबार कर सकता है, यानी बहुत बड़ी तेजी या गिरावट की संभावना कम होती है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार से आने वाले संकेतों, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीद-बिक्री और घरेलू खबरों पर भी बाजार की नजर रहेगी।
कुल मिलाकर, गुरुवार का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए एक उम्मीद भरा दिन रहा। जिन सेक्टरों ने दम दिखाया, उन्होंने यह साबित कर दिया कि बाजार के पास अभी भी ऊपर जाने की क्षमता है।
निवेशकों की संपत्ति में हुई बढ़ोतरी ने उन्हें एक नई उम्मीद दी है। अब सबकी निगाहें शुक्रवार के कारोबार पर टिकी हैं कि क्या बाजार अपनी इस रफ्तार को बरकरार रख पाता है, या प्रॉफिट बुकिंग के चलते थोड़ी सुस्ती आती है।






































