औरंगाबाद: बिहार के औरंगाबाद जिले में एक ऐसी हृदयविदारक घटना हुई है, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। भतारी मोड़ के पास ओबरा-पौथू मार्ग पर गुरुवार की सुबह तेज रफ्तार का कहर कुछ ऐसा टूटा कि दो हंसती-खेलती जिंदगियां पलक झपकते ही खत्म हो गईं। ये बच्चियां कोचिंग से घर लौट रही थीं, और इनकी बस यही गलती थी कि ये सड़क पर चल रही थीं, जब मौत बनकर एक स्कॉर्पियो इन्हें रौंदती हुई निकल गई। इस हादसे ने एक परिवार को ऐसी टीस दी है, जिसे शायद वो ताउम्र नहीं भूल पाएंगे। एक मां अपनी बेटी की बेजान लाश से बार-बार कपड़ा हटाकर उसका चेहरा निहारती रही, मानो आज भी उसे उम्मीद हो कि उसकी लाडली आंखें खोलकर उसे देखेगी।
ये दर्दनाक हादसा पौथू थाना क्षेत्र में हुआ। मरने वाली दोनों बच्चियां चचेरी बहनें थीं।
एक का नाम अफसरी, उम्र 15 साल, जो आठवीं कक्षा में पढ़ती थी। दूसरी का नाम आशिया, उम्र भी 15 साल, जो सातवीं की छात्रा थी।
दोनों नरौला गांव के रहने वाले मोहम्मद रियाजुद्दीन और रुस्तम अली की बेटियां थीं। सुबह-सुबह बराही बाजार में ट्यूशन पढ़कर दोनों अपनी साइकिल पर सवार होकर घर लौट रही थीं।
शायद उन्हें क्या पता था कि आज घर पहुंचने से पहले ही जिंदगी की डोर टूट जाएगी।
मौत बनकर आई तेज़ रफ्तार स्कॉर्पियो
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो, गुरुवार की सुबह करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से एक काली स्कॉर्पियो सड़क पर फर्राटा भर रही थी। चश्मदीदों के मुताबिक, ड्राइवर ने अपना नियंत्रण खो दिया।
पहले तो उसने अपनी साइकिल पर जा रही अफसरी और आशिया को जोरदार टक्कर मारी। टक्कर इतनी भयानक थी कि दोनों बच्चियां हवा में उछलकर करीब पांच फीट दूर जा गिरीं।
इसके बाद अनियंत्रित स्कॉर्पियो सड़क किनारे लगे बिजली के एक मजबूत खंभे से जा टकराई और उसे तोड़ते हुए रुक गई।
हादसे के तुरंत बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। एक बच्ची, अफसरी, ने तो मौके पर ही दम तोड़ दिया।
उसकी सांसें शायद टक्कर के साथ ही थम गई थीं। दूसरी बच्ची, आशिया, गंभीर रूप से घायल थी।
लोग उसे अस्पताल पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में ही आशिया ने भी दम तोड़ दिया।
पलभर में दोनों परिवारों का संसार उजड़ गया।
माँओं का दर्द और ग्रामीणों का गुस्सा
जब खबर नरौला गांव पहुंची तो कोहराम मच गया। अफसरी की मां शहनाज खातून और आशिया की मां कमरून निशा, दोनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
अफसरी एक भाई और दो बहनों में सबसे छोटी थी, जबकि आशिया चार भाई और चार बहनों में सबसे छोटी थी। मांओं के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि किस तरह अफसरी की मां बेसुध होकर अपनी बेटी की लाश से बार-बार कपड़ा हटाकर उसका चेहरा देख रही थी, जैसे पूछ रही हो कि मेरी बच्ची, तूने इतनी जल्दी मुझे क्यों छोड़ दिया?
इस दर्दनाक घटना से पूरा गांव आक्रोशित हो उठा। गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने फौरन ओबरा-पौथू मार्ग पर भतारी मोड़ के पास सड़क जाम कर दिया।
उनकी मांगें साफ थीं – दोषी ड्राइवर को तुरंत गिरफ्तार किया जाए, पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा मिले और इस तरह के हादसों को रोकने के लिए सड़क सुरक्षा के स्थायी इंतजाम किए जाएं। सड़क जाम के कारण ओबरा-पौथू मार्ग पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे ट्रैफिक पूरी तरह से डिस्टर्ब हो गया।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। ओबरा थानाध्यक्ष नीतीश कुमार और एसआई दीपक कुमार सहित अन्य अधिकारियों ने आक्रोशित भीड़ को समझाने-बुझाने की कोशिश की।
उन्होंने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि मामले की हर पहलू से जांच की जाएगी और दोषी ड्राइवर के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने फौरन कार्रवाई करते हुए दुर्घटनाग्रस्त स्कॉर्पियो को जब्त कर लिया है। फरार ड्राइवर की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी गई है।
अधिकारियों ने ग्रामीणों को यह भी भरोसा दिलाया कि जल्द ही ड्राइवर उनकी गिरफ्त में होगा। पुलिस ने दोनों मृत बच्चियों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया।
पुलिस और प्रशासन के आश्वासन के बाद आखिरकार ग्रामीणों ने सड़क जाम हटा लिया, लेकिन इस घटना का दर्द और इसकी यादें शायद लंबे समय तक औरंगाबाद के लोगों के दिलों में ताजा रहेंगी।


