औरंगाबाद: बिहार के औरंगाबाद जिले से एक ऐसी खबर आई है, जिसने बच्चों को स्कूल भेजने वाले हर मां-बाप के दिल में दहशत भर दी होगी। दरअसल, यहां स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों से भरी एक वैन अचानक सड़क किनारे नहर में गिर गई। जिस वैन में बच्चे हंसते-खेलते स्कूल जा रहे थे, वो पल भर में हादसे का शिकार हो गई। ये घटना संत जेवियर्स पब्लिक स्कूल, अंबा के बच्चों के साथ हुई। गनीमत रही कि हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोग, पुलिस और प्रशासन के लोग मौके पर पहुंच गए और सभी 15 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इन सभी घायल बच्चों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
ये खबर जैसे ही जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा तक पहुंची, उन्होंने मामले की गंभीरता को समझा और तत्काल सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। डीएम ने सिर्फ हादसे का शिकार हुई वैन या स्कूल पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि पूरे जिले की परिवहन व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए एक बड़ी जांच का आदेश दे दिया है।
हादसे का मंजर और फौरन राहत का काम
औरंगाबाद के अंबा इलाके में हुए इस हादसे ने सबको चौंका दिया। सुबह का वक्त था, जब संत जेवियर्स पब्लिक स्कूल की टाटा मैजिक वैन बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी।
पता नहीं अचानक क्या हुआ कि वैन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे नहर में जा गिरी। जरा सोचिए, उस वक्त वैन के अंदर बैठे बच्चों पर क्या बीती होगी! ये कोई छोटी-मोटी नहर नहीं थी, जहां वाहन का गिरना एक बड़े खतरे की तरफ इशारा कर रहा था।
हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आस-पास के लोग और सड़क से गुजरने वाले दूसरे वाहन चालक तुरंत मदद के लिए दौड़े।
स्थानीय ग्रामीणों की हिम्मत और तेजी ने बड़ी अनहोनी टाल दी। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और सबने मिलकर बचाव कार्य शुरू किया।
एक-एक करके सभी 15 स्कूली बच्चों को वैन से बाहर निकाला गया। उन्हें हल्की और गंभीर चोटें आई थीं, जिसके बाद सभी को तुरंत नजदीकी अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टर्स की टीम उनकी देखरेख कर रही है।
उनके माता-पिता और अभिभावकों को भी सूचना दी गई, जो खबर सुनते ही अस्पताल की तरफ भागे।
डीएम का एक्शन: सिर्फ हादसे पर नहीं, पूरी व्यवस्था पर सवाल
इस हादसे की खबर मिलने के बाद औरंगाबाद की जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने जरा भी देर नहीं की। उन्होंने तुरंत एक्शन लेते हुए संत जेवियर्स पब्लिक स्कूल, अंबा के प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
ये नोटिस सिर्फ इस बात के लिए नहीं है कि वैन का एक्सीडेंट क्यों हुआ, बल्कि स्कूल की पूरी परिवहन व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। डीएम ने प्राचार्य से दुर्घटनाग्रस्त वाहन के दस्तावेज और स्कूल की परिवहन व्यवस्था से जुड़े सभी रिकॉर्ड्स भी मांगे हैं।
लेकिन डीएम का एक्शन सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने इस हादसे को एक चेतावनी के तौर पर लिया और पूरे जिले के सरकारी और निजी स्कूलों की परिवहन व्यवस्था की जांच के आदेश दे दिए हैं।
ये एक बहुत बड़ा कदम है, क्योंकि अक्सर ऐसे हादसों के बाद सिर्फ उस खास वाहन या स्कूल पर कार्रवाई होती है, लेकिन यहां पूरे सिस्टम को दुरुस्त करने की बात हो रही है। डीएम का ये निर्देश साफ बताता है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
खटारा वाहनों का खेल: बच्चों की जान से खिलवाड़
डीएम अभिलाषा शर्मा के इस कदम के पीछे एक बड़ी वजह है – औरंगाबाद जिले में खटारा वाहनों का धड़ल्ले से इस्तेमाल। ये कोई छिपी हुई बात नहीं है कि शहर से लेकर गांव-देहात तक कई स्कूल बच्चों को ढोने के लिए ऐसे वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनकी हालत जर्जर है।
इन वाहनों का रजिस्ट्रेशन फेल हो चुका होता है, फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं होता और इन्हें सड़कों पर चलने की इजाजत नहीं होती। लेकिन फिर भी, कम पैसों के चक्कर में या नियमों की अनदेखी करते हुए, स्कूलों और वाहन मालिकों द्वारा इनका इस्तेमाल जारी रहता है।
सबसे चिंताजनक बात ये है कि इन खटारा वाहनों में बच्चों को ठूंस-ठूंस कर भरा जाता है। क्षमता से कहीं ज्यादा बच्चे एक छोटी सी वैन में बिठा दिए जाते हैं, जिससे न सिर्फ उन्हें असुविधा होती है, बल्कि सुरक्षा को लेकर भी बड़ा खतरा पैदा होता है।
इसके ऊपर से, एक ही वाहन से कई ट्रिप लगाने के लालच में ड्राइवर अक्सर वाहनों को काफी तेज गति से चलाते हैं। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन और तेज रफ्तार, जब खटारा वाहन और ठुंसे हुए बच्चों के साथ मिलती है, तो किसी बड़े हादसे का इंतजार ही रहता है, जैसा कि औरंगाबाद में हुआ।
आगे क्या होगा?
अब डीएम के निर्देश के बाद उम्मीद की जा रही है कि जिले भर में स्कूल परिवहन व्यवस्था की गहन जांच होगी। ऐसे खटारा और अवैध वाहनों पर कार्रवाई की जाएगी और नियमों का पालन न करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
इस घटना ने एक बार फिर अभिभावकों और प्रशासन को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए सिर्फ स्कूल की चारदीवारी के भीतर ही नहीं, बल्कि स्कूल आने-जाने के सफर में भी पूरी सतर्कता और जिम्मेदारी की जरूरत है। उम्मीद है कि इस कार्रवाई से जिले में बच्चों की सुरक्षित स्कूल यात्रा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव आएगा।


