मुंबई: सोचिए, अगर आप आज 174 करोड़ रुपये कहीं निवेश करें और 15 साल बाद वही पैसा बढ़कर 4400 करोड़ रुपये से भी ज़्यादा हो जाए, तो कैसा लगेगा? शायद यही वो सपना है, जो हर निवेशक देखता है। लेकिन फ्रांस की एक तगड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी अमुंडी के लिए ये सपना नहीं, बल्कि हकीकत बन गया है। उन्होंने करीब डेढ़ दशक पहले अपने भरोसे का बीज बोया था और अब वो एक बड़ा, फलदायी पेड़ बन चुका है।
बात हो रही है भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के फंड्स मैनेजमेंट डिवीजन की, जिसे हम SBI फंड्स मैनेजमेंट के नाम से जानते हैं। ये कंपनी अब अपना IPO (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) लाने जा रही है, यानी अपने शेयर आम जनता के लिए बेचने वाली है।
और इस मौके पर अमुंडी इंडिया होल्डिंग्स अपने कुछ शेयर बेचने की तैयारी में है, जिससे उसे मोटा-मोटी 4400 करोड़ रुपये मिलने वाले हैं। ये सच में एक कमाल की कहानी है, जो दिखाती है कि अगर सही जगह और सही वक्त पर पैसा लगाया जाए, तो किस्मत के ताले कैसे खुलते हैं।
आखिर ये 174 करोड़, 4400 करोड़ में कैसे बदल गए?
तो भैया, इसकी शुरुआत होती है साल 2011 से। 30 मई, 2011 को अमुंडी इंडिया होल्डिंग ने SBI फंड्स मैनेजमेंट के 18.5 करोड़ शेयर खरीदे थे।
तब इनकी कुल कीमत थी 173.9 करोड़ रुपये। उस समय ये डील हुई, किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि ये निवेश भविष्य में इतना बड़ा कमाल दिखाएगा।
अब आप सोच रहे होंगे कि इतने से शेयर इतने ज्यादा कैसे हो गए और इतनी कीमत कैसे बढ़ गई? तो इसके पीछे दो बड़े खेल हुए। पहला तो ये कि शेयरों का 'स्टॉक स्प्लिट' हुआ।
मान लीजिए, पहले एक शेयर की फेस वैल्यू 100 रुपये थी, तो कंपनी ने उसे तोड़कर 1 रुपये फेस वैल्यू का बना दिया। इससे हुआ ये कि शेयरों की संख्या रातों-रात बढ़ गई, जबकि निवेश की कुल रकम वही रही।
ठीक ऐसे जैसे आपके पास एक बड़ा नोट हो और उसे छोटे नोटों में बदल दिया जाए, संख्या बढ़ जाती है, मूल्य नहीं।
इसके बाद कंपनी ने एक और दांव खेला, जिसे 'बोनस शेयर' कहते हैं। ये एक तरह से कंपनी की तरफ से अपने शेयरहोल्डर्स को तोहफा होता है।
SBI फंड्स मैनेजमेंट ने 3:1 के अनुपात में बोनस शेयर दिए। इसका मतलब ये हुआ कि अगर आपके पास 1 शेयर था, तो कंपनी ने आपको 3 और शेयर मुफ्त में दे दिए।
इन सब दांव-पेंच के बाद अमुंडी के पास SBI फंड्स के शेयरों की कुल संख्या बढ़कर 74 करोड़ हो गई! और आज इन्हीं शेयरों का दम है कि अमुंडी की शुरुआती 174 करोड़ की रकम अब 4,400 करोड़ रुपये में बदल चुकी है। बता दें, अमुंडी इंडिया का प्रति शेयर एवरेज खरीदने का खर्चा सिर्फ 4.35 रुपये आया था, और अब देखिए ये कहां पहुंच गया!
SBI फंड्स मैनेजमेंट IPO क्यों ला रहा है और इसका क्या मतलब है?
SBI फंड्स मैनेजमेंट इस हफ्ते के आखिर में अपने IPO के प्राइस बैंड का ऐलान कर सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स की मानें तो इस कंपनी की वैल्यूएशन करीब 1.17 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
आप खुद सोचिए, एक लाख करोड़ से ज़्यादा की कंपनी! ये दिखाता है कि भारत में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री कितनी तेजी से बढ़ रही है। लोग अब ट्रेडिशनल फिक्स्ड डिपॉजिट से हटकर म्यूचुअल फंड्स में पैसा लगाना पसंद कर रहे हैं, क्योंकि यहां रिटर्न मिलने की उम्मीद ज़्यादा होती है।
अमुंडी का ये सफल निवेश भारतीय बाजार की इसी बढ़ती हुई ताकत को दिखाता है। उसे अपने शेयर बेचने से करीब 4,330 से 4,400 करोड़ रुपये मिलेंगे, जो किसी भी विदेशी एसेट मैनेजमेंट कंपनी के लिए भारत में अब तक का एक बहुत ही शानदार रिटर्न माना जा रहा है।
क्या अमुंडी SBI फंड्स से टाटा-बाय-बाय कर रही है?
नहीं, नहीं! ऐसा बिल्कुल नहीं है। अगर आप सोच रहे हैं कि अमुंडी अपना सारा पैसा निकालकर निकल लेगी, तो आप गलत हैं।
अमुंडी SBI फंड्स मैनेजमेंट में अपनी पूरी हिस्सेदारी नहीं बेच रही है। IPO में कुछ हिस्सेदारी बेचने के बाद भी, SBI फंड्स में उसकी हिस्सेदारी करीब 32.56 फीसदी बनी रहेगी।
इसका मतलब है कि अमुंडी, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की दूसरी सबसे बड़ी शेयरहोल्डर बनी रहेगी और एक लॉन्ग-टर्म स्ट्रेटेजिक पार्टनर के तौर पर काम करती रहेगी। ये भी अपने आप में एक बड़ी बात है कि कोई विदेशी कंपनी भारतीय बाजार में इतनी गहरी जड़ें जमाए हुए है।
साल 2011 में जब ये पार्टनरशिप हुई थी, तभी से अमुंडी SBI की फॉरेन पार्टनर है, और ये रिश्ता मजबूत ही दिख रहा है।
क्या है ये 'ऑफर फॉर सेल' का चक्कर?
SBI फंड्स मैनेजमेंट का ये जो IPO आ रहा है, ये पूरी तरह से 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) होगा। इसका मतलब ये है कि कंपनी खुद कोई नए शेयर जारी करके पैसा नहीं जुटा रही है।
बल्कि, जो पुराने प्रमोटर्स हैं – यानी SBI और अमुंडी – वही अपने कुछ शेयर बेच रहे हैं। कुल मिलाकर 20.3 करोड़ शेयर बेचे जाएंगे, जो SBI फंड्स मैनेजमेंट के कुल शेयरों का 10 फीसदी है।
इस OFS में SBI अपने 12.83 करोड़ शेयर (कुल 6.3 फीसदी हिस्सेदारी) बेचेगा और अमुंडी अपने 7.5 करोड़ शेयर (कुल 3.7 फीसदी हिस्सेदारी) बेचेगी। चूंकि कंपनी नए शेयर इश्यू नहीं कर रही, इसलिए इस इश्यू से SBI फंड्स मैनेजमेंट को सीधे कोई पैसा नहीं मिलेगा।
पैसा पुराने शेयरहोल्डर्स – SBI और अमुंडी – की जेब में जाएगा।
कौन है ये अमुंडी, जिसने भारत में गाड़े झंडे?
अमुंडी कोई छोटी-मोटी कंपनी नहीं है, बल्कि इसका हेड ऑफिस पेरिस में है और ये यूरोप की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी है। सिर्फ यूरोप में ही नहीं, बल्कि दुनिया की टॉप 10 एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में भी इसका नाम आता है।
इतनी बड़ी ग्लोबल कंपनी का भारत में इस तरह से सफल होना, दिखाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था और यहां का म्यूचुअल फंड बाजार कितना मजबूत है और विदेशी निवेशकों के लिए कितनी संभावनाएं लेकर आता है। कुल मिलाकर, ये एक ऐसी कहानी है जो धैर्य, सही निवेश और भारतीय बाजार की बढ़ती ताकत को बखूबी बयां करती है।






































