कानपुर: देर रात की भूख अक्सर कुछ अनूठे अनुभवों की ओर ले जाती है। कभी ज़ायकेदार खाना मिल जाता है, तो कभी कुछ ऐसा सामने आता है जो ज़िंदगी भर नहीं भूलता। कानपुर के साकेत नगर में कुछ ऐसा ही हुआ, जब एक रेस्टोरेंट में खाना खाने गए कुछ दोस्तों को खराब अंडा करी परोसी गई। बस इतनी सी बात पर हंगामा इतना बढ़ा कि रेस्टोरेंट मालिक और उसके कर्मचारियों ने ग्राहकों को लाठी-डंडों से पीटना शुरू कर दिया। हद तो तब हो गई जब मौके पर पहुंची पुलिस के सामने भी मारपीट नहीं रुकी। इस पूरी घटना का एक वीडियो सामने आया है, जो इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और ग्राहकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
बात बुधवार देर रात की है, क़रीब 12:30 बजे। साकेत नगर में रहने वाले अनुज अपने दोस्त अंकित और एक अन्य साथी के साथ करी किंगडम नाम के रेस्टोरेंट में खाना खाने गए थे।
अक्सर ऐसा होता है कि रात में भूख तेज़ लगती है और कोई ठीक-ठाक रेस्टोरेंट मिल जाए तो बात बन जाती है। लेकिन अनुज और उनके दोस्तों के लिए वह रात एक बुरा सपना बन गई।
उन्होंने खाने में अंडा करी ऑर्डर की, जो उन्हें परोसते ही पता चला कि खराब है।
देर रात की भूख, खराब खाना और विवाद की शुरुआत
अनुज के मुताबिक, जैसे ही उन्होंने अंडा करी का स्वाद चखा, उन्हें तुरंत महसूस हो गया कि कुछ गड़बड़ है। खाना बासी था या खराब हो चुका था।
उन्होंने रेस्टोरेंट के कर्मचारियों से इसकी शिकायत की और खराब अंडा करी बदलने या पैसे वापस करने की मांग की। किसी भी ग्राहक का यह एक सामान्य अधिकार होता है कि अगर उसे खराब खाना परोसा जाए तो वह उसकी शिकायत करे।
लेकिन यहां शिकायत ने विवाद का रूप ले लिया। आरोप है कि कर्मचारियों ने ग्राहकों की बात सुनने के बजाय बहस करनी शुरू कर दी।
बातचीत कब तीखी नोंक-झोंक में बदली, इसका पता ही नहीं चला। अनुज और उनके दोस्त अपनी बात पर अड़े थे कि उन्हें खराब खाना दिया गया है, जबकि रेस्टोरेंट कर्मचारी इसे मानने को तैयार नहीं थे।
जब ग्राहकों ने पैसे देने से मना कर दिया, तो माहौल और गरमा गया। आरोप है कि इसके बाद रेस्टोरेंट के संचालक और कर्मचारियों का रवैया एकदम बदल गया।
लाठी-डंडों से मारपीट और कैमरे में कैद हुआ मंजर
विवाद जब बढ़ने लगा, तो रेस्टोरेंट संचालक और उसके कर्मचारियों ने अपने असली रंग दिखाने शुरू कर दिए। अनुज और उनके दोस्तों के मुताबिक, अचानक से उन पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया गया।
ये देखकर तीनों युवक हक्के-बक्के रह गए। कोई सोच भी नहीं सकता कि खाने की शिकायत करने पर किसी को इस तरह पीटा जा सकता है।
वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे रेस्टोरेंट के लोग ग्राहकों को दौड़ा-दौड़ा कर पीट रहे हैं। लात-घूंसे चल रहे हैं और लाठियां बरसाई जा रही हैं।
यह सिर्फ एक मामूली कहासुनी नहीं थी, बल्कि एक व्यवस्थित और निर्मम हमला था।
इस पूरे हंगामे और मारपीट की सूचना किसी ने किदवई नगर पुलिस को दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची भी, लेकिन जो हुआ वो और भी हैरान करने वाला था।
पुलिस की मौजूदगी में भी जारी रहा हंगामा
जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो अनुज और उनके दोस्तों को लगा होगा कि अब उन्हें न्याय मिलेगा और मारपीट बंद हो जाएगी। लेकिन उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया।
आरोप है कि रेस्टोरेंट संचालक और उसके कर्मचारियों ने पुलिस के सामने भी मारपीट जारी रखी। वीडियो में साफ दिख रहा है कि पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में भी झगड़ा और धक्का-मुक्की चल रही है।
यह सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था को चुनौती देने जैसा था। पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की और किसी तरह दोनों पक्षों को शांत कराया।
सोचिए, अगर पुलिस की मौजूदगी में भी दबंगई इतनी हावी है, तो सामान्य स्थिति में ग्राहकों की क्या हालत होती होगी? यह घटना न सिर्फ उस रेस्टोरेंट की छवि को धूमिल करती है, बल्कि ऐसे सभी व्यवसायों पर सवाल उठाती है जो अपने ग्राहकों के साथ बदसलूकी करते हैं।
पुलिस का बयान और आगे की कार्रवाई की चुनौती
इस घटना के बाद, किदवई नगर थाना प्रभारी विजय सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पीड़ित पक्ष की ओर से अभी तक कोई लिखित तहरीर नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि तहरीर मिलने पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह बयान अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। जब मारपीट का वीडियो वायरल हो रहा है, पुलिस मौके पर मौजूद थी और उसने खुद हंगामा होते देखा, तो क्या एफआईआर के लिए लिखित शिकायत का इंतज़ार करना ज़रूरी है? क्या पुलिस खुद संज्ञान लेकर कार्रवाई नहीं कर सकती?
यह स्थिति बताती है कि कई बार पीड़ितों को न्याय पाने के लिए कितनी मशक्कत करनी पड़ती है। अक्सर लोग पुलिस के चक्कर लगाने से बचते हैं या डरते हैं, और ऐसे में अगर पुलिस अपनी तरफ से सक्रियता न दिखाए तो अपराधी बेखौफ हो जाते हैं।
इस मामले में पुलिस के सामने एक चुनौती है कि वह कैसे पीड़ित ग्राहकों को न्याय दिलाती है और यह संदेश देती है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो।
यह घटना सिर्फ कानपुर की नहीं है, बल्कि देश के कई हिस्सों में रेस्टोरेंट या दुकानों पर ग्राहकों के साथ बदसलूकी और मारपीट के ऐसे मामले सामने आते रहते हैं। ग्राहक सेवा के नाम पर मिलने वाली इस तरह की 'सेवा' को रोकना बेहद ज़रूरी है।
उम्मीद है कि कानपुर पुलिस इस मामले में जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करेगी ताकि दोबारा कोई रेस्टोरेंट संचालक इतनी हिम्मत न जुटा पाए कि वह खराब खाने की शिकायत करने पर अपने ग्राहकों को लाठी-डंडों से पीटे।


