अम्बेडकरनगर: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले युवाओं के लिए शिक्षक बनने का सपना TET (Teacher Eligibility Test) की राह से होकर गुजरता है। इसी कड़ी में, अम्बेडकरनगर जिले में शनिवार का दिन उन हजारों अभ्यर्थियों के लिए अहम था, जो उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET)-2026 के प्राथमिक स्तर की परीक्षा देने पहुंचे थे। आज परीक्षा का तीसरा दिन था और जिले के कुल 12 केंद्रों पर सुबह से ही गहमागहमी देखने को मिली। परीक्षा शुरू होने से काफी पहले ही अभ्यर्थी अपने सपनों को आँखों में संजोए केंद्रों के बाहर कतार में लग गए थे। प्रशासन ने इस बार परीक्षा को लेकर जो पुख्ता इंतजाम किए थे, उसे देखकर साफ लग रहा था कि नकल या किसी भी तरह की धांधली की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी।
सुबह का समय था, लेकिन परीक्षा केंद्रों के बाहर का माहौल किसी चुनावी मेले से कम नहीं था। हर चेहरे पर भविष्य की चिंता और बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद साफ झलक रही थी।
जो अभ्यर्थी दूर-दराज से आए थे, वे रातभर जागकर या किसी रिश्तेदार के घर रुककर परीक्षा केंद्र तक पहुंचे थे। प्रशासन ने पहले ही साफ कर दिया था कि परीक्षा शुरू होने से 45 मिनट पहले तक ही केंद्र में एंट्री मिलेगी, जिसके बाद गेट बंद कर दिए जाएंगे।
इसी बात का डर था कि कहीं देर न हो जाए, इसलिए अधिकांश अभ्यर्थी तय समय से काफी पहले ही केंद्र पर पहुंच चुके थे। गेट पर तैनात पुलिसकर्मियों और परीक्षा ड्यूटी में लगे कर्मचारियों की चौकसी देखते ही बन रही थी।
एक-एक अभ्यर्थी की सघन तलाशी ली जा रही थी, उनके पहचान पत्रों का गहन सत्यापन किया जा रहा था। मानों जैसे किसी संवेदनशील सैन्य इलाके में प्रवेश हो रहा हो, ऐसी ही सख्ती हर एंट्री प्वाइंट पर दिखी।
कड़ी सुरक्षा का घेरा और कैमरे की पैनी नजर
परीक्षा को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए इस बार सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद थी। अम्बेडकरनगर के सभी 12 केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
हर गेट पर महिला और पुरुष पुलिसकर्मी अलग-अलग अभ्यर्थियों की तलाशी ले रहे थे। मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और किसी भी तरह की अनुचित सामग्री को अंदर ले जाने की इजाजत नहीं थी।
यह सब इसलिए हो रहा था ताकि प्रदेश के लाखों युवाओं के भविष्य से कोई खिलवाड़ न हो सके और सिर्फ योग्य उम्मीदवार ही अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़ें।
सिर्फ गेट तक ही नहीं, अंदर परीक्षा कक्षों में भी सुरक्षा का कड़ा पहरा था। जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कौस्तुभ कुमार सिंह ने बताया कि परीक्षा के प्रत्येक केंद्र और यहां तक कि हर परीक्षा कक्ष की निगरानी सीसीटीवी कैमरों के जरिए की जा रही थी।
ये सभी कैमरे एक केंद्रीय कंट्रोल रूम से जुड़े थे, जहां से परीक्षा की पल-पल की लाइव मॉनिटरिंग हो रही थी। यानी, हर गतिविधि पर तीसरी आंख की पैनी नजर थी।
यदि कोई अभ्यर्थी किसी भी तरह की गड़बड़ी करने की कोशिश करता, तो तुरंत पकड़ा जाता।
हर कमरे में 'आँखों-देखी' निगरानी
सिर्फ कैमरे के भरोसे ही सब कुछ नहीं छोड़ा गया था। डीआईओएस कौस्तुभ कुमार सिंह ने आगे बताया कि प्रत्येक परीक्षा कक्ष में कैमरों की निगरानी के साथ-साथ दो से तीन कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई गई थी।
इन कर्मचारियों का काम था अभ्यर्थियों पर प्रत्यक्ष नजर रखना, यह सुनिश्चित करना कि कोई नकल न कर पाए, और परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नकलविहीन ढंग से संपन्न हो सके। इस दोहरी निगरानी व्यवस्था का मकसद यही था कि किसी भी स्तर पर कोई चूक न हो।
अभ्यर्थियों को भी परीक्षा शुरू होने से पहले ही इन कड़े नियमों से अवगत करा दिया गया था ताकि वे किसी भी तरह की गलती करने से बचें।
सुबह की पाली और डीआईओएस का बयान
शनिवार को प्राथमिक स्तर की यह परीक्षा सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक आयोजित की गई। डीआईओएस कौस्तुभ कुमार सिंह ने बताया कि सुबह की पाली के लिए परीक्षा केंद्रों के गेट ठीक 8:45 बजे बंद कर दिए गए थे।
जो अभ्यर्थी तय समय पर नहीं पहुंच पाए, उन्हें मायूस होकर वापस लौटना पड़ा। यह एक सख्त संदेश था कि अनुशासन और समय-पालन इस परीक्षा का अभिन्न अंग हैं।
कौस्तुभ कुमार सिंह ने यह भी जानकारी दी कि पिछले दो दिनों की परीक्षाएं भी अम्बेडकरनगर जिले में पूरी तरह शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई थीं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासन का मुख्य लक्ष्य टीईटी-2026 की सभी पालियों का आयोजन निष्पक्ष, पारदर्शी और सकुशल तरीके से कराना है, ताकि योग्य अभ्यर्थियों को ही उनका हक मिल सके।
इस बार प्रशासन ने परीक्षा की पवित्रता बनाए रखने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी थी, और इसका सकारात्मक असर परीक्षा केंद्रों पर साफ दिखाई दे रहा था। इस पूरी कवायद का सीधा फायदा उन लाखों मेहनती युवाओं को मिलेगा, जो बरसों से शिक्षक बनने का सपना पाले बैठे हैं।

