पटना: बिहार में आजकल कुछ ऐसा हो रहा है, जो अमूमन होता नहीं। मानसून आ चुका है, ऐसा मौसम विभाग ने कहा है, लेकिन भैया! बारिश का तो कहीं नामोनिशान नहीं है। आसमान में बादल मंडराते हैं, कभी-कभी काले घने भी दिख जाते हैं, पर बरसने के नाम पर सिर्फ उमस और पसीना ही हाथ लगता है। लोगों की हालत खराब है, पंखे-कूलर भी इस गर्मी के आगे हार मान रहे हैं। ऐसा लग रहा है मानो मानसून ने आने से पहले ही अपना रास्ता बदल लिया हो या फिर छुट्टियां मनाने कहीं और चला गया हो।
आप सोच रहे होंगे कि इतनी गर्मी क्यों पड़ रही है, जबकि मानसून आ गया है। दरअसल, यही तो असली कहानी है।
मौसम विभाग की मानें तो अभी 5 जुलाई तक बिहार वालों को बारिश से कोई खास राहत नहीं मिलने वाली। राजधानी पटना समेत राज्य के कई जिलों में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे ऊपर ही बना रहेगा।
और हां, सिर्फ तापमान ही नहीं, ये चिपचिपी उमस है ना, वो दोपहर के समय लोगों का जीना मुहाल कर देगी। ऐसा महसूस होगा कि गर्मी का असर पहले से भी ज्यादा तेज हो गया है।
पिछले 24 घंटों की बात करें तो कैमूर में पारा 38.5°C तक पहुँच गया, जो राज्य में सबसे ज्यादा दर्ज किया गया।
मानसून की चाल में ढीलापन क्यों?
अब बात करते हैं कि आखिर ये मानसून इतरा क्यों रहा है। मौसम वैज्ञानिकों ने इसका कारण बताया है कि बिहार में मानसून अभी तक पूरी तरह से एक्टिव नहीं हो पाया है।
बंगाल की खाड़ी से जो नमी आनी चाहिए थी, वो पूरी मात्रा में नहीं मिल रही है। इसके पीछे की वजह है मानसूनी सिस्टम का कमजोर पड़ना।
अभी तक कोई मजबूत लो-प्रेशर सिस्टम या ट्रफ लाइन बिहार की तरफ नहीं बन पाई है, जो मानसून को रफ्तार दे सके। यही कारण है कि मानसून की रफ्तार धीमी पड़ी हुई है और पूरा राज्य अच्छी बारिश का इंतजार कर रहा है।
किसानों से लेकर आम जनता तक, सबकी निगाहें आसमान पर टिकी हैं कि कब काले बादल झूमकर बरसेंगे और इस गर्मी से राहत मिलेगी।
आधी रह गई बारिश, क्या कहता है आंकड़ा?
इस पूरे मानसून सीजन में बिहार में बारिश की स्थिति बेहद निराशाजनक रही है। मौसम विभाग के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
अगर सामान्य स्थिति की बात करें तो इस अवधि तक राज्य में करीब 196.1 मिलीमीटर बारिश हो जानी चाहिए थी।
लेकिन, असलियत में अब तक सिर्फ 98.4 मिलीमीटर वर्षा ही रिकॉर्ड की गई है।
सीधा गणित है कि राज्य में अभी तक सामान्य से लगभग 50 प्रतिशत कम बारिश हुई है। यह आंकड़ा बताता है कि स्थिति कितनी गंभीर है और अगर जल्द ही अच्छी बारिश नहीं हुई तो आने वाले दिनों में और भी दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं, खासकर कृषि क्षेत्र के लिए।
कम बारिश का मतलब है भूजल स्तर का नीचे जाना और पीने के पानी की समस्या का बढ़ना।
कैसा रहेगा राजधानी पटना का मौसम?
अगर आप राजधानी पटना में हैं तो जान लीजिए कि शनिवार को भी मौसम सामान्य ही रहने की उम्मीद है। आसमान में हल्के बादल तो छाए रहेंगे, लेकिन उनसे बारिश की उम्मीद लगाना शायद गलत होगा।
दिन के समय तेज धूप अपना रंग दिखाएगी और साथ में वही चिपचिपी उमस लोगों को परेशान करती रहेगी। अधिकतम तापमान में हल्की बढ़ोतरी के भी संकेत हैं, जिसका मतलब है कि गर्मी का असर कम होने की बजाय और बढ़ सकता है।
पटना के लोग अभी भी सुबह और शाम की हल्की हवा का सहारा ढूंढ रहे हैं, लेकिन दोपहर में घर से निकलना किसी तपस्या से कम नहीं।
आगे क्या है मौसम विभाग की भविष्यवाणी?
मौसम विभाग के वैज्ञानिक लगातार बादलों की चाल पर नजर बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि अगले एक-दो दिनों तक मौसम में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है।
राज्य के ज्यादातर हिस्सों में मौसम सूखा ही बना रह सकता है और तापमान में मामूली वृद्धि दर्ज की जा सकती है। हालांकि, वैज्ञानिकों की उम्मीदें अभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई हैं।
उनकी नजर बंगाल की खाड़ी पर है। यदि वहां कोई मजबूत मौसम प्रणाली विकसित होती है, तो उसके बाद ही बिहार में बारिश की गतिविधियों में इजाफा देखने को मिल सकता है।
जब तक ऐसा नहीं होता, बिहार को गर्मी और उमस से जूझना पड़ेगा। लोग दुआ कर रहे हैं कि जल्द ही इंद्रदेव मेहरबान हों और धरती की प्यास बुझाएं।

