लखनऊ: भई, गर्मी तो पड़ रही है आग जैसी, लेकिन इस तपती दोपहरी में अगर आपसे कहें कि एक और खतरा है जो चुपके-चुपके फैल रहा है, तो शायद आप चौंक जाएंगे। हम बात कर रहे हैं डेंगू की। वही डेंगू जिसे हम आमतौर पर बारिश के मौसम से जोड़कर देखते थे, अब वो लखनऊ में मार्च से जून के बीच ही 51 लोगों को अपना शिकार बना चुका है। जी हां, ये आंकड़े कोई डराने के लिए नहीं, बल्कि हमें जगाने के लिए हैं कि अब डेंगू सिर्फ मौसमी मेहमान नहीं, बल्कि साल भर का सिरदर्द बनता जा रहा है।
पहले लोग कहते थे, "बारिश आने दो, तब मच्छर का सीजन शुरू होगा।" लेकिन अब आलम ये है कि जब शहर कूलर की ठंडी हवा और एसी की आरामदायक ठंडक में सांस ले रहा था, तब भी एडीज मच्छर अपनी बस्तियां बसा रहा था।
स्वास्थ्य विभाग के ताजातरीन आंकड़ों पर गौर फरमाइए, इस साल मार्च से जून के दौरान ही लखनऊ में 51 डेंगू के मरीज सामने आ चुके हैं। ये वो आंकड़े हैं जो सिर्फ कागजों पर दर्ज हैं, असलियत में शायद ये संख्या और भी ज्यादा हो सकती है क्योंकि कई लोग इलाज तो कराते हैं, लेकिन उनका रिकॉर्ड सरकारी रजिस्टर में नहीं चढ़ पाता।
सोचिए, वो बीमारी जो कभी जुलाई से अक्टूबर तक अपना जलवा दिखाती थी, अब मार्च में ही दस्तक दे चुकी है। विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन का सीधा असर मान रहे हैं।
बढ़ती गर्मी, कभी भी बिन मौसम की बरसात और मौसम के बदलता मिजाज, ये सब एडीज एजिप्टी मच्छर के लिए नए-नए ठिकाने और पनपने के लिए मुफीद माहौल तैयार कर रहे हैं। अब ये मच्छर सिर्फ दलदली इलाकों में नहीं, बल्कि आपके घर के भीतर, आपके बालकनी में और आपके छत पर रखे गमलों में भी पल रहे हैं।
डेंगू का बदलता मिजाज: सिर्फ बरसात में ही क्यों नहीं?
दरअसल, हमारे दिमाग में डेंगू की एक तस्वीर बनी हुई है – बारिश, पानी का जमाव और फिर मच्छरों का आतंक। लेकिन वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो अब ये तस्वीर बदल चुकी है।
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "एडीज एजिप्टी मच्छर, जो डेंगू फैलाता है, उसे अंडे देने और पनपने के लिए साफ और रुके हुए पानी की जरूरत होती है। पहले हम सोचते थे कि ये सिर्फ बरसात में ही मिलता है, लेकिन अब तापमान में वृद्धि और शहरीकरण के कारण घरों में कूलर, एसी ट्रे, फूलों के गमले, छत पर रखी पुरानी बाल्टियां या टूटे-फूटे सामानों में जमा साफ पानी साल भर मौजूद रहता है।
ये मच्छर इन्हीं जगहों को अपना घर बना लेते हैं।"
उनके मुताबिक, तापमान का बढ़ना मच्छरों के प्रजनन चक्र को तेज कर देता है। जितनी ज्यादा गर्मी, उतनी तेजी से मच्छर अंडे से वयस्क बनते हैं और उतनी ही तेजी से उनकी संख्या बढ़ती है।
यही वजह है कि अब हम गर्मी के महीनों में भी डेंगू के मामले देख रहे हैं, जो पहले कभी कभार ही दिखते थे। अब इसे मौसमी बीमारी कहना खुद को धोखे में रखने जैसा है।
सीएमओ की अपील और जन जागरूकता का असर
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. एन.
बी. सिंह ने इस पूरे मामले पर अपनी बात रखी।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक के आंकड़े पिछले साल की तुलना में कम हैं, जो कहीं न कहीं लोगों में बढ़ी हुई जागरूकता का परिणाम है। डॉ.
सिंह ने कहा, "हमारी स्वास्थ्य टीमें लगातार लोगों को जागरूक कर रही हैं और हम देख रहे हैं कि लोग अब पहले से ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं।"
हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है। उनकी अपील है कि लोग अपने कूलर का पानी नियमित रूप से बदलते रहें, क्योंकि यही वो जगह है जहां एडीज मच्छर सबसे ज्यादा पनपते हैं।
इसके अलावा, घर के आसपास पानी जमा न होने दें, जैसे टूटे बर्तनों में, गमलों के नीचे रखी ट्रे में या छतों पर पड़े कबाड़ में। उन्होंने यह भी सलाह दी कि दिन के समय भी पूरी बाजू के कपड़े पहनें, खासकर बच्चों को, क्योंकि एडीज मच्छर दिन में काटता है।
मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी और रिपेलेंट का इस्तेमाल भी बहुत जरूरी है।
बदलते मौसम के साथ बदलनी होगी हमारी आदतें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अब डेंगू को केवल बरसात की बीमारी मानने की भूल नहीं करनी चाहिए। बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए हमें अपनी आदतों में भी बदलाव लाना होगा।
डेंगू से बचाव के लिए साल भर सतर्कता और साफ-सफाई की आदत को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना ही सबसे प्रभावी उपाय है।
लखनऊ शहर में लगातार बढ़ती आबादी और तेजी से हो रहे निर्माण कार्य भी जलभराव की समस्या को बढ़ा रहे हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से मच्छरों के पनपने में मदद करता है। निगम प्रशासन को भी इस दिशा में और ठोस कदम उठाने की जरूरत है ताकि ऐसी जगहों की पहचान की जा सके जहां पानी जमा होता है और वहां से उसका उचित निपटान किया जा सके।
कुल मिलाकर, अब वक्त आ गया है कि हम सब मिलकर इस अदृश्य दुश्मन से लड़ें। ये लड़ाई सिर्फ बरसात के चार महीने की नहीं, बल्कि साल भर की है।
घर को साफ रखिए, आसपास पानी जमा मत होने दीजिए, और डेंगू से बचने के हर उपाय को अपनाइए। आपकी सतर्कता ही आपके परिवार और आपके शहर को इस बीमारी से बचा सकती है।

