कानपुर: शहर के जूही इलाके में एक ऐसी हृदय विदारक घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। एक महिला डेंटिस्ट ने, जो पिछले कुछ दिनों से डिप्रेशन का शिकार थीं, अपनी 9वीं कक्षा की बेटी को स्कूल भेजने के बाद खुद को फांसी लगा ली। यह घटना शुक्रवार की सुबह तब हुई जब उनके डेंटिस्ट पति घर में ही सो रहे थे। जब उनकी आंख खुली और उन्होंने कमरे में कदम रखा, तो उनकी दुनिया ही उजड़ गई। उनकी पत्नी फंदे से लटकी मिलीं। आनन-फानन में उन्हें पास के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
यह घटना जूही थानाक्षेत्र के आनंदपुरी इलाके की है। डॉ.
आशीष गुप्ता, जो खुद भी एक जाने-माने डेंटिस्ट हैं और रायपुरवा में उनका अपना क्लीनिक है, ने बताया कि उनकी 42 वर्षीय पत्नी डॉ. तरुणा गुप्ता भी डेंटिस्ट थीं।
वे दोनों पति-पत्नी साथ ही प्रैक्टिस करते थे। उनके परिवार में एक बेटी है, धानी गुप्ता, जो नौवीं कक्षा में पढ़ती है।
डॉ. आशीष ने बताया कि डॉ.
तरुणा पिछले करीब 10 दिनों से गहरे डिप्रेशन से गुजर रही थीं। यह बात परिवार के लोगों को पता थी, लेकिन शायद उन्हें अंदाजा नहीं था कि डिप्रेशन का यह साया इतना घातक हो जाएगा।
सुबह की आम दिनचर्या और अचानक मौत का साया
शुक्रवार की सुबह भी बाकी दिनों जैसी ही थी, लेकिन इसका अंत इतना भयानक होगा, किसी ने नहीं सोचा था। सुबह-सुबह डॉ.
तरुणा अपनी बेटी धानी को स्कूल के लिए तैयार करने में लगी थीं। उन्होंने धानी को नाश्ता कराया, उसे स्कूल के लिए तैयार किया और फिर खुद उसे स्कूल छोड़कर आईं।
इसके बाद, घर आकर उन्होंने अपने पालतू कुत्ते को भी टहलाया। यह सब उनकी रोज़मर्रा की दिनचर्या का हिस्सा था।
घर का काम निपटाकर, बेटी को स्कूल भेजकर और कुत्ते को टहलाने के बाद, किसी को क्या पता था कि वह अपने जीवन का सबसे दर्दनाक फैसला लेने वाली थीं। उनके पति डॉ.
आशीष गुप्ता घर में ही थे, शायद सुबह की थकान के चलते गहरी नींद में थे और शायद उन्हें भनक भी नहीं थी कि उनकी पत्नी इस समय किस मानसिक उथल-पुथल से गुजर रही हैं।
पति की जुबानी दर्दनाक मंजर
डॉ. आशीष गुप्ता ने पुलिस को बताया कि वह सुबह सोकर उठे।
उन्होंने सोचा कि तरुणा आस-पास ही होंगी या अपने रोज के कामों में व्यस्त होंगी। लेकिन जब उन्हें कहीं नहीं देखा, तो वह उन्हें ढूंढते हुए कमरे की तरफ गए।
कमरे में जो दृश्य था, उसने उनके होश उड़ा दिए। उनकी पत्नी डॉ.
तरुणा गुप्ता फंदे पर लटकी हुई थीं। यह मंजर डॉ.
आशीष के लिए किसी सदमे से कम नहीं था। उन्होंने तुरंत हिम्मत जुटाई और अपनी पत्नी को फंदे से उतारा।
उम्मीद की एक किरण के साथ, वह उन्हें तुरंत पास के एक प्राइवेट अस्पताल लेकर भागे, यह सोचते हुए कि शायद कुछ चमत्कार हो जाए और उनकी पत्नी की जान बच जाए।
अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने तुरंत जांच की, लेकिन उनकी सारी उम्मीदें टूट गईं। डॉक्टरों ने डॉ.
तरुणा को मृत घोषित कर दिया। यह खबर डॉ.
आशीष और पूरे परिवार के लिए वज्रपात जैसी थी। एक पल में, उनका हंसता-खेलता परिवार बिखर गया था।
एक डेंटिस्ट होने के नाते, उन्होंने कई लोगों के दर्द को कम किया होगा, लेकिन आज उनका अपना परिवार उस दर्द से गुजर रहा था जिसकी शायद उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी।
डिप्रेशन का गहरा साया और अनसुलझे सवाल
परिवार के सदस्यों ने पुलिस को बताया कि डॉ. तरुणा पिछले करीब 10 दिनों से गंभीर डिप्रेशन से जूझ रही थीं।
डिप्रेशन एक ऐसी बीमारी है जो अंदर ही अंदर इंसान को खोखला करती जाती है और कई बार अपने सबसे करीबियों को भी इसका अंदाजा नहीं हो पाता कि यह कितना गंभीर रूप ले चुका है। डॉ.
तरुणा जैसी एक सफल और मेहनती महिला डेंटिस्ट का इस तरह का कदम उठाना कई सवाल खड़े करता है कि कैसे मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएँ किसी भी इंसान को, चाहे वह कितना भी सफल क्यों न हो, अपनी गिरफ्त में ले सकती हैं। परिवार ने यह भी बताया कि डॉ.
तरुणा के डिप्रेशन की वजह क्या थी, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन इसका असर उनके व्यवहार और दिनचर्या में साफ देखा जा रहा था।
पुलिस की शुरुआती जांच और आगे की कार्रवाई
जूही थाना प्रभारी केके पटेल ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि परिजनों ने डॉ. तरुणा गुप्ता की आत्महत्या का कारण डिप्रेशन बताया है।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थाना प्रभारी ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है।
हालांकि, शुरुआती तौर पर किसी बाहरी हस्तक्षेप या विवाद की बात सामने नहीं आई है। परिजनों के बयानों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि क्या डॉ. तरुणा किसी तरह का इलाज ले रही थीं या किसी से अपनी परेशानी साझा कर रही थीं।
यह दुखद घटना एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य के महत्व और इसके प्रति जागरूकता की कमी को उजागर करती है। शहर में कई लोग इस खबर को सुनकर स्तब्ध हैं, खासकर डेंटिस्ट समुदाय में।
एक जीवन जो दूसरों के दांतों को चमकाने में लगा था, आज खुद अंधेरे में खो गया।

