खगड़िया: अक्सर हम और आप सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते हुए सोचते हैं कि काश काम इतनी आसानी से हो जाए, जितनी आसानी से कहा जाता है। भ्रष्टाचार नाम की बीमारी ऐसी है कि सरकारी बाबू से लेकर ऊपर के अधिकारियों तक पर सवाल उठते रहते हैं। आम जनता का भरोसा सरकारी सिस्टम से डगमगाता रहता है। लेकिन कभी-कभी कुछ खबरें ऐसी आती हैं जो उम्मीद जगाती हैं, बताती हैं कि व्यवस्था में सुधार की कोशिशें जारी हैं। बिहार के खगड़िया जिले से भी एक ऐसी ही खबर आई है, जहां प्रशासनिक और पुलिस विभागों के अधिकारियों और कर्मियों ने खुद को कसौटी पर कसते हुए एक बड़ी शपथ ली है। यह शपथ थी ईमानदारी, पारदर्शिता और जनता के प्रति जवाबदेही की, जिसे 'बिहार सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026' के तहत लिया गया।
शुक्रवार का दिन खगड़िया के लिए एक खास संदेश लेकर आया। जिला समाहरणालय में जिलाधिकारी विक्रम विरकर की अगुवाई में सभी पदाधिकारियों और कर्मियों ने हाथ उठाकर कसम खाई कि वे अपने पद की गरिमा बनाए रखेंगे और किसी भी तरह के भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
वहीं, दूसरी तरफ, पुलिस अधीक्षक भानु प्रताप सिंह के नेतृत्व में पुलिस महकमे के हर छोटे-बड़े अधिकारी और जवान ने प्रण लिया कि वे बिना किसी पक्षपात या दबाव के अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे। मकसद साफ था: एक ऐसी व्यवस्था बनाना जहां जनता के काम बिना किसी परेशानी और भेदभाव के हों और सिस्टम पर उनका भरोसा मजबूत हो।
अब सवाल ये उठता है कि ये शपथ क्यों ली गई और इसका क्या मतलब है? दरअसल, 'बिहार सतर्कता जागरूकता सप्ताह' हर साल मनाया जाता है, जिसका मकसद होता है सरकारी तंत्र को और अधिक जिम्मेदार, ईमानदार और पारदर्शी बनाना। इस बार भी खगड़िया में इसी कड़ी में ये कार्यक्रम आयोजित हुए।
जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने अपने-अपने विभागों को ये साफ संदेश दिया कि सुशासन सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि हकीकत में दिखना चाहिए।
जिलाधिकारी ने सुशासन का मतलब समझाया
जिला समाहरणालय में जो कार्यक्रम हुआ, उसमें जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने सुशासन के महत्व पर विस्तार से बात की। उन्होंने सिर्फ इतना नहीं कहा कि योजनाओं को लागू कर दिया जाए, बल्कि इस बात पर जोर दिया कि सुशासन का असली आधार तो प्रशासन की ईमानदारी, पारदर्शिता और जनता के प्रति उसकी जवाबदेही होती है।
यानी, काम तो हो, लेकिन कैसे हो, ये भी उतना ही अहम है। उन्होंने सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे अपने पद की गरिमा बनाए रखते हुए सिर्फ और सिर्फ जनहित में काम करें।
इसका मतलब था कि कोई भी फैसला, कोई भी कार्रवाई सिर्फ जनता की भलाई के लिए हो, न कि किसी निजी फायदे या दबाव में।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को ये भी समझाया कि भ्रष्टाचार के प्रति 'शून्य सहिष्णुता' की नीति अपनाई जाए। 'शून्य सहिष्णुता' का मतलब है कि भ्रष्टाचार का छोटा से छोटा मामला भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अगर कहीं थोड़ी सी भी गड़बड़ी हुई, तो उस पर तुरंत एक्शन होगा। उनका मकसद था कि आम लोगों को समय पर, अच्छी गुणवत्ता वाली और पूरी तरह से पारदर्शी सेवाएं मिलें।
सोचिए, अगर आपको किसी सर्टिफिकेट के लिए आवेदन करना है और वो बिना किसी रिश्वत या देरी के मिल जाए, तो कितनी राहत मिलेगी। इसी भरोसे को कायम करने की बात जिलाधिकारी ने कही।
पुलिस विभाग का जनसेवा का संकल्प
एक तरफ प्रशासन था, तो दूसरी तरफ कानून व्यवस्था संभालने वाली पुलिस। पुलिस अधीक्षक भानु प्रताप सिंह के नेतृत्व में पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों ने भी अपने लिए एक बड़ा संकल्प लिया।
उन्होंने संविधान और कानून के प्रति पूरी निष्ठा के साथ काम करने की शपथ ली। ये सिर्फ एक रस्म अदायगी नहीं थी, बल्कि एक जिम्मेदारी का एहसास था।
पुलिसकर्मियों ने ईमानदारी, निष्पक्षता और कर्तव्यपरायणता से अपने दायित्वों को निभाने का प्रण लिया। इसका सीधा मतलब था कि किसी भी मामले में, चाहे आरोपी कोई बड़ा आदमी हो या आम नागरिक, सबके साथ कानून के दायरे में रहकर एक जैसा व्यवहार किया जाएगा।
इस शपथ ग्रहण कार्यक्रम में ये भी संकल्प लिया गया कि पुलिस बल बिना किसी पक्षपात, दबाव या प्रलोभन के अपने कर्तव्यों का पालन करेगा। अक्सर पुलिस पर ये आरोप लगते हैं कि वे किसी खास वर्ग या व्यक्ति के दबाव में काम करते हैं।
इस शपथ के जरिए इस छवि को बदलने की कोशिश की गई। पुलिस का मुख्य उद्देश्य जनता के विश्वास को मजबूत करना और एक ऐसी व्यवस्था बनाना है, जो संवेदनशील हो और पारदर्शी तरीके से काम करे।
जब जनता पुलिस पर भरोसा करती है, तभी अपराधों पर लगाम लगाना और कानून व्यवस्था बनाए रखना आसान होता है।
नैतिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता
इन दोनों ही कार्यक्रमों में, चाहे वो जिला समाहरणालय में हुआ हो या पुलिस लाइन में, अधिकारियों और कर्मियों ने एक और बहुत महत्वपूर्ण संकल्प लिया। उन्होंने कसम खाई कि वे अपने पद का दुरुपयोग बिल्कुल नहीं करेंगे।
यह बात बेहद अहम है क्योंकि अक्सर सरकारी पदों पर बैठे लोग अपने पद का फायदा उठाकर अनैतिक काम करते हैं। उन्होंने यह भी प्रण लिया कि वे किसी भी तरह के भ्रष्टाचार, अनियमितता या अनुचित लाभ से दूर रहेंगे।
इसका मतलब है कि न तो वे खुद गलत तरीके से पैसा कमाएंगे और न ही किसी और को ऐसा करने देंगे।
बल्कि, उन्होंने अपने कार्यों में सत्यनिष्ठा, जवाबदेही और नैतिक मूल्यों को सबसे ऊपर रखने की बात दोहराई। सत्यनिष्ठा यानी सच बोलना और ईमानदारी से काम करना।
जवाबदेही यानी जो काम किया है, उसके लिए जिम्मेदार होना। और नैतिक मूल्य यानी सही और गलत के बीच का अंतर समझना और हमेशा सही का साथ देना।
'बिहार सतर्कता जागरूकता सप्ताह' के इन आयोजनों के माध्यम से खगड़िया जिला प्रशासन और जिला पुलिस ने एक बहुत स्पष्ट संदेश दिया है। वह यह कि सुशासन की असली पहचान भ्रष्टाचार मुक्त, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था ही होती है।
प्रशासन और पुलिस दोनों ही ये जानते हैं कि आम नागरिकों का विश्वास कितना जरूरी है और इसीलिए वे पूरी प्रतिबद्धता के साथ जनसेवा को सबसे ऊपर रखने का काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि ये शपथ सिर्फ जुबानी नहीं, बल्कि हकीकत में भी रंग लाएगी और खगड़िया के लोगों को एक बेहतर और ईमानदार सरकारी तंत्र का अनुभव मिलेगा।

