पटना: बिहार की राजधानी पटना, जो अपने ऐतिहासिक गौरव और शिक्षा के केंद्र के तौर पर मशहूर है, वहाँ की प्रतिष्ठित पटना यूनिवर्सिटी एक बार फिर छात्रों के भविष्य को आकार देने वाले बड़े फैसलों को लेकर चर्चा में है। गुरुवार का दिन यूनिवर्सिटी के लिए ऐतिहासिक रहा, जब एकेडमिक काउंसिल की एक महत्वपूर्ण बैठक में PhD ऑर्डिनेंस और रेगुलेशन को हरी झंडी दे दी गई। यह सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि हजारों रिसर्च स्कॉलर्स और पीजी छात्रों के लिए नए रास्ते खोलने वाला एक अहम कदम है।
ये फैसले राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) की नींव पर खड़े हैं, जिसका मकसद शिक्षा को ज्यादा लचीला, आधुनिक और रोजगारोन्मुखी बनाना है। लोक भवन ने दो वर्षीय और एक वर्षीय (दो सेमेस्टर) पीजी पाठ्यक्रमों के ड्राफ्ट ऑर्डिनेंस और रेगुलेशन को मंजूरी दी है, जो अब पटना यूनिवर्सिटी में लागू होंगे।
इसका सीधा मतलब है कि अब छात्र अपनी पढ़ाई को अपनी सहूलियत और करियर लक्ष्यों के हिसाब से ढाल पाएंगे, और यूनिवर्सिटी भी देश के आधुनिक शैक्षणिक मानकों के साथ कदमताल कर सकेगी।
अकादमिक परिषद की ऐतिहासिक बैठक
गुरुवार को पटना यूनिवर्सिटी के एकेडमिक काउंसिल की बैठक में एक के बाद एक कई बड़े और दूरगामी फैसले लिए गए। यह बैठक महज एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि छात्रों के अकादमिक भविष्य को नया आकार देने वाली एक गंभीर चर्चा का मंच थी।
इसमें सिर्फ PhD ऑर्डिनेंस को ही नहीं, बल्कि कुल 19 विषयों के सिलेबस को भी मंजूरी दी गई। इन विषयों में इतिहास, अंग्रेजी, मास कम्युनिकेशन, जियोलॉजी, केमिस्ट्री, भौतिक शास्त्र, बायोटेक्नोलॉजी, जंतु विज्ञान, कॉमर्स, गणित और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन जैसे कई महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं, जो विज्ञान, कला और वाणिज्य तीनों संकायों को कवर करते हैं।
यह दर्शाता है कि यूनिवर्सिटी हर क्षेत्र में शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच को बेहतर बनाने पर जोर दे रही है।
इन सिलेबस को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के नए दिशानिर्देशों के तहत तैयार किया गया है, ताकि छात्रों को सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल भी मिल सके। इसका उद्देश्य छात्रों को सिर्फ डिग्री धारक बनाना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और उद्योग-तैयार पेशेवरों के रूप में तैयार करना है।
यह बदलाव उन छात्रों के लिए संजीवनी का काम करेगा जो उच्च शिक्षा में रिसर्च और नवाचार की तरफ जाना चाहते हैं, उन्हें एक स्पष्ट और आधुनिक ढाँचा प्रदान करेगा।
अंडरग्रेजुएट कोर्सेज में भी बड़े बदलाव
सिर्फ पीजी और पीएचडी ही नहीं, यूनिवर्सिटी ने अंडरग्रेजुएट (यूजी) कोर्सेज के लिए भी कई महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी दी है। एकेडमिक काउंसिल की बैठक में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के यूजी कोर्स स्ट्रक्चर और इसके पाठ्यक्रम (AECC IV) को भी मंजूरी मिली।
एनएसएस छात्रों को समाज सेवा और सामुदायिक विकास से जुड़ने का मौका देता है, जिससे वे सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित न रहकर सामाजिक जिम्मेदारियों को भी समझ सकें।
इसके अलावा, यूजी कोर्स के तहत स्किल डेवलपमेंट के लिए 'क्रॉस वर्ल्ड कोर्स' को भी मंजूरी दी गई। आज के तेजी से बदलते जॉब मार्केट में कौशल विकास की अहमियत किसी से छिपी नहीं है।
यह कोर्स छात्रों को ऐसे व्यावहारिक कौशल सिखाएगा जो उन्हें भविष्य में रोजगार पाने और अपना उद्यम शुरू करने में मदद करेंगे। लोक भवन द्वारा AECC कोर्स स्ट्रक्चर में किए गए बदलावों को भी इस अकादमिक काउंसिल से पारित किया गया, जो यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रमों को और भी समकालीन और प्रासंगिक बनाते हैं।
ये सभी कदम यह सुनिश्चित करते हैं कि पटना यूनिवर्सिटी के छात्र राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए पूरी तरह से तैयार हों।
नए सत्र का आगाज और महत्वपूर्ण तारीखें
इन बड़े अकादमिक फैसलों के बीच, पटना यूनिवर्सिटी में नए सत्र को लेकर भी हलचल तेज है। स्नातक (रेगुलर कोर्स) के नए सत्र का 'इंडक्शन मीट' 6 जुलाई को आयोजित होगा।
यह कार्यक्रम यूनिवर्सिटी के सभी कॉलेजों में एक साथ होगा, जहाँ नए छात्रों को यूनिवर्सिटी और उनके संबंधित कोर्स से परिचित कराया जाएगा। यह उनके लिए यूनिवर्सिटी जीवन की शुरुआत का पहला कदम होगा।
वहीं, स्नातक सेल्फ फाइनेंस कोर्स में एडमिशन लेने वाले छात्रों के लिए पहली काउंसलिंग 6 से 10 जुलाई के बीच होगी। यह उन छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण मौका है जिन्होंने इन कोर्सेज में दाखिले के लिए आवेदन किया है।
इसके साथ ही, जिन छात्रों ने स्नातक (रेगुलर) कोर्स के लिए पहले से आवेदन कर दिया है और उन्हें अपने आवेदन में कोई संशोधन कराना है, उनके लिए यूनिवर्सिटी का पोर्टल 6 से 8 जुलाई के बीच खुला रहेगा। यह छात्रों को अपनी जानकारी सही करने और किसी भी त्रुटि को सुधारने का मौका देगा, ताकि उनके दाखिले की प्रक्रिया में कोई रुकावट न आए।
इसके अलावा, 4 वर्षीय अप्रेंटिसशिप एंबेडेड डिग्री प्रोग्राम (AEDP) के तहत B.Sc.
डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स और B.Sc.
हेल्थ केयर मैनेजमेंट (सत्र 2026-30) में एडमिशन के लिए काउंसलिंग भी 6 से 10 जुलाई के बीच आयोजित की जाएगी। यह काउंसलिंग बीएन कॉलेज और मगध महिला कॉलेज में होगी।
ये ऐसे प्रोग्राम हैं जो छात्रों को डिग्री के साथ-साथ सीधे उद्योग से जुड़े कौशल और अनुभव प्रदान करते हैं, जिससे वे पढ़ाई पूरी करते ही जॉब मार्केट के लिए तैयार हो सकें। सभी चयनित अभ्यर्थियों के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे निर्धारित तारीख तक अपने संबंधित कॉलेज जाकर काउंसलिंग करवाएं और अपना एडमिशन सुनिश्चित करें।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि समय-सीमा का पालन करना सभी छात्रों के लिए अनिवार्य है।

