दरभंगा: बिहार के दरभंगा में सालों से बंद पड़ी रैयाम चीनी मिल की चिमनी एक बार फिर धुआँ उगल पाएगी या नहीं, ये सवाल यहाँ के किसानों के मन में बरसों से था। अब जाकर लग रहा है कि सरकार की नज़र उस चिमनी की तरफ मुड़ी है, जो सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि सैकड़ों किसानों की उम्मीदें समेटे खड़ी है। प्रशासन ने अब इस दिशा में पहल कर दी है और इसी के साथ केवटी समेत पूरे इलाके के किसानों को एक नई आस मिली है। जिलाधिकारी ने इस पूरे मामले पर खुद मोर्चा संभाला है और एक ऊँची लेवल की समीक्षा समिति का गठन कर दिया है, जो मिल को दोबारा शुरू करने की पूरी प्रक्रिया पर अपनी पैनी नज़र रखेगी।
आप समझिए कि ये सिर्फ एक समिति नहीं, बल्कि उन किसानों की उम्मीदों का पुल है, जिन्होंने कभी अपनी गन्ने की फसल को इस मिल में जाते देखा था, और फिर सालों से इसे बंद पड़ा पाया। केवटी विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ.
मुरारी मोहन झा भी इस फैसले से खासे खुश हैं। उन्होंने भरोसा जताया है कि अब प्रशासन के स्तर पर इस काम में वाकई तेजी लाई जाएगी।
डॉ. झा ने बताया कि इस मिल को फिर से चालू कराने की मांग सड़क से लेकर विधानसभा तक, हर जगह लगातार उठाई जा रही थी।
अब जाकर सरकार ने इस दिशा में एक ठोस कदम उठाया है, जिससे न सिर्फ क्षेत्र के किसानों, बल्कि आम लोगों में भी एक नई उम्मीद की किरण जगी है।
मिल को फिर से चलाने की ये कवायद सिर्फ कागजी नहीं है। जिलाधिकारी खुद रैयाम चीनी मिल परिसर में जाकर जायजा ले चुके हैं।
उनकी निगरानी में बनी ये समिति अब हर पहलू पर काम करेगी। इसमें खास बात ये है कि इस बार जो सहकारी चीनी मिल प्रस्तावित है, उसकी सबसे बड़ी खासियत ये होगी कि इसके असली मालिक किसान खुद होंगे।
यानी, ये उनकी अपनी मिल होगी, उनके अपने हाथों से चलेगी।
सहकारी मॉडल: किसान ही होंगे मालिक
इस नई व्यवस्था के तहत 'प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समिति' का गठन किया जाएगा। इस समिति में किसान सीधे सदस्य बनकर मिल के संचालन में अपनी पूरी भागीदारी निभा सकेंगे।
यह एक ऐसा मॉडल है जहाँ किसानों के पास सिर्फ गन्ना बेचने का हक नहीं होगा, बल्कि मिल के प्रबंधन और उसके मुनाफे में भी उनकी हिस्सेदारी होगी। इससे किसानों को सिर्फ बेहतर दाम ही नहीं, बल्कि एक सुरक्षा और स्वामित्व का भाव भी मिलेगा।
यह सहकारिता का वो मजबूत मॉडल है, जहाँ सब मिलकर काम करते हैं और लाभ भी सबमें बंटता है।
किसानों की पहचान और क्षेत्र का विस्तार
जिलाधिकारी ने इस काम को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए कुछ अहम निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने जिला सहकारिता पदाधिकारी और जिला जनसंपर्क पदाधिकारी को कहा है कि वे आपस में तालमेल बिठाकर एक विशेष अभियान चलाएँ।
इस अभियान का मकसद होगा रैयाम चीनी मिल के आयोजन क्षेत्र के उन सभी पात्र और इच्छुक किसानों की पहचान करना, जो इस सहकारी समिति का हिस्सा बनना चाहते हैं। यह पहचान प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि सही और ज़रूरतमंद किसान ही इस पहल का लाभ उठा सकें।
ये चीनी मिल सिर्फ दरभंगा जिले के किसानों को ही नहीं, बल्कि पड़ोसी मधुबनी जिले के किसानों को भी फायदा पहुँचाएगी। रैयाम चीनी मिल के पोषक क्षेत्र में दरभंगा जिले के कुल 580 गाँव और मधुबनी जिले के 438 गाँव शामिल किए गए हैं।
यानी, कुल 1018 गाँव ऐसे होंगे, जहाँ के किसान सीधे तौर पर इस मिल को गन्ना आपूर्ति कर सकेंगे। ये एक बड़ा नेटवर्क है, जो इन दोनों जिलों की कृषि अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार दे सकता है।
सदस्यता के नियम और प्रक्रिया
अगर आप इस 'प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समिति' के सदस्य बनना चाहते हैं, तो कुछ ज़रूरी बातें जानना अहम हैं। सबसे पहले, आवेदक की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।
इसके अलावा, कृषि विभाग के डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) पोर्टल पर आपका रजिस्ट्रेशन होना भी अनिवार्य है। यह सुनिश्चित करता है कि आप एक वास्तविक किसान हैं।
गन्ना उत्पादन के लिए भूमि की शर्त भी तय की गई है। सामान्य श्रेणी के किसानों के लिए कम से कम 100 डिसमिल (करीब एक एकड़) भूमि होनी चाहिए।
वहीं, महिला किसानों और अन्य पात्र वर्गों के लिए यह सीमा 50 डिसमिल तय की गई है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग इस पहल का हिस्सा बन सकें।
सदस्य बनने के लिए कुछ शुल्क भी निर्धारित किया गया है। आपको 500 रुपए सदस्यता शुल्क के रूप में जमा करने होंगे और 1000 रुपए शेयर राशि के तौर पर देने होंगे।
यह शेयर राशि ही आपको मिल में वास्तविक हिस्सेदार बनाएगी। जो किसान इन शर्तों को पूरा करते हैं, वे सरकार के ई-सहकारी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करके इस समिति के सदस्य बन सकते हैं।
यह ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और सुलभ होगी, ताकि किसानों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
कुल मिलाकर, रैयाम चीनी मिल को फिर से खोलने की ये कवायद सिर्फ एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि किसानों के लिए एक आर्थिक क्रांति का वादा है। सरकार और प्रशासन की ये सक्रियता एक नई सुबह का संकेत दे रही है, जहाँ किसानों के श्रम और सहकारिता की भावना से एक बार फिर चीनी मिल की धड़कनें तेज होंगी।

