पटना: बिहार की राजधानी पटना से एक ऐसी खबर आई है, जिसने पूरे राज्य को गर्व से भर दिया है। यहां के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में डॉक्टरों की टीम ने वो कर दिखाया है, जिसे बच्चों के इलाज में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। एक नन्ही सी, महज आठ महीने की बच्ची की जन्मजात किडनी की गंभीर बीमारी का इलाज रोबोटिक सर्जरी से सफलतापूर्वक किया गया है। सोचिए, एक आठ महीने का बच्चा, जिसके अंग कितने छोटे और नाजुक होते हैं, उसकी इतनी जटिल सर्जरी को अंजाम देना अपने आप में एक करिश्मा है। और बिहार में ये अपनी तरह का पहला मामला है, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिख दिया है।
इस नन्ही सी जान को जन्म से ही किडनी से जुड़ी एक बड़ी समस्या थी। मेडिकल भाषा में इसे यूरेटरो-पेल्विक जंक्शन (UPJ) ऑब्स्ट्रक्शन कहते हैं।
आसान शब्दों में समझें तो, किडनी से पेशाब बाहर ले जाने वाली नली का रास्ता कहीं अटक गया था। इस रुकावट की वजह से पेशाब किडनी के अंदर ही जमा हो रहा था, जिससे किडनी पर लगातार दबाव पड़ रहा था।
अगर इसका इलाज समय पर न होता, तो बच्ची की किडनी हमेशा के लिए खराब हो सकती थी। ये सिर्फ एक मेडिकल केस नहीं, बल्कि एक छोटे से जीवन को बचाने की लड़ाई थी, जिसे डॉक्टरों की टीम ने हाई-टेक तरीके से जीता।
नन्ही जान की बड़ी चुनौती: जन्मजात बीमारी का इलाज
जिस बच्ची की सर्जरी हुई है, उसे जन्मजात यूपीजे ऑब्स्ट्रक्शन की दिक्कत थी। ये एक ऐसी स्थिति है जहां किडनी और यूरेटर (पेशाब की नली) के जुड़ने वाले हिस्से में एक बाधा आ जाती है।
यूरेटर वह नली है जो किडनी से पेशाब को मूत्राशय तक ले जाती है। जब इस जोड़ पर रुकावट आती है, तो किडनी में बनने वाला पेशाब ठीक से मूत्राशय तक नहीं पहुंच पाता और किडनी के अंदर ही इकट्ठा होने लगता है।
इससे किडनी में सूजन आ जाती है और धीरे-धीरे उसकी कार्यक्षमता कम होने लगती है। अगर इसे समय रहते ठीक न किया जाए, तो किडनी को हमेशा के लिए नुकसान पहुंच सकता है।
इतनी छोटी उम्र के बच्चे में ये समस्या और भी गंभीर हो जाती है क्योंकि उनके शरीर के अंग बेहद छोटे और नाजुक होते हैं, जो सर्जरी को और भी मुश्किल बना देते हैं।
रोबोटिक सर्जरी: जब टेक्नोलॉजी बनी जीवन रक्षक
इस चुनौती भरे ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए IGIMS के डॉक्टरों ने अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक का सहारा लिया। प्रो.
डॉ. विनीत कुमार ठाकुर, डॉ.
ओम पूर्वे और डॉ. विवेक रंजन की विशेषज्ञ टीम ने इस सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
सोचिए, ये रोबोटिक हाथ कितने सटीक होते हैं कि वे छोटे से छोटे अंग पर भी बिना गलती के काम कर पाते हैं। बच्ची को ऑपरेशन में कम चीरा लगाना पड़ा, खून का बहाव भी कम हुआ और दर्द भी काफी कम महसूस हुआ।
ऐसी सर्जरी में रिकवरी भी सामान्य सर्जरी की तुलना में काफी तेज होती है। एनेस्थीसिया का जिम्मा डॉ.
प्रीति कुमारी और डॉ. कोमल ने संभाला, जिन्होंने सुनिश्चित किया कि इतनी छोटी बच्ची को सर्जरी के दौरान कोई परेशानी न हो।
बाल शल्य चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ.
विजयेन्द्र कुमार के कुशल मार्गदर्शन में यह पूरी प्रक्रिया संपन्न हुई।
बिहार के लिए गौरव का क्षण
प्रो. डॉ.
विजयेन्द्र कुमार ने इस उपलब्धि पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, ‘संस्थान में पहली बार इतने छोटे शिशु की रोबोटिक सर्जरी सफल होना बाल शल्य चिकित्सा विभाग के लिए वाकई एक बड़ी उपलब्धि है। ये सिर्फ हमारे अस्पताल के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय है।
’ उन्होंने आगे बताया कि भविष्य में इस तकनीक के जरिए जन्मजात जटिल बीमारियों से जूझ रहे और भी बच्चों का सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकेगा। इसका सीधा मतलब है कि बिहार में बच्चों के इलाज की सेवाएं अब एक नए मुकाम पर पहुंच गई हैं।
IGIMS के निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक ने भी पूरी सर्जिकल टीम को उनकी शानदार सफलता के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा, ‘ये उपलब्धि केवल IGIMS की नहीं, बल्कि पूरे बिहार राज्य के लिए एक गौरवपूर्ण पल है।
अब हमारे राज्य के मरीजों को ऐसी जटिल और हाई-टेक रोबोटिक सर्जरी के लिए दूसरे राज्यों के बड़े अस्पतालों की ओर देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्हें अपने ही राज्य में विश्वस्तरीय इलाज मिल पाएगा।
’ यह बयान बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम दर्शाता है।
यूपीजे ऑब्स्ट्रक्शन: क्या है यह बीमारी?
चलिए, थोड़ा और समझते हैं कि यूपीजे ऑब्स्ट्रक्शन आखिर है क्या। यह एक ऐसी जन्मजात समस्या है जिसमें किडनी और मूत्रवाहिनी (यूरेटर) के जुड़ने वाले हिस्से में एक बाधा आ जाती है।
यूरेटर वह नली है जो किडनी से पेशाब को मूत्राशय तक ले जाती है। जब इस जोड़ पर रुकावट आती है, तो किडनी में बनने वाला पेशाब ठीक से मूत्राशय तक नहीं पहुंच पाता और किडनी के अंदर ही इकट्ठा होने लगता है।
इससे किडनी में सूजन आ जाती है और धीरे-धीरे उसकी कार्यक्षमता कम होने लगती है। अगर इसे समय रहते ठीक न किया जाए, तो किडनी को हमेशा के लिए नुकसान पहुंच सकता है।
रोबोटिक सर्जरी क्यों है इतनी खास?
- अविश्वसनीय सटीकता: रोबोट के हाथ बहुत छोटे और बेहद सटीक होते हैं। ये डॉक्टरों को ऐसे जगहों पर भी काम करने की सुविधा देते हैं, जहां इंसान के हाथ से पहुंचना मुश्किल या जोखिम भरा होता है। इससे ऑपरेशन में गलती की संभावना कम हो जाती है।
- कम चीरा, कम दर्द: पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में इसमें बहुत छोटे चीरे लगाए जाते हैं। इसका मतलब है मरीज को कम दर्द होता है, खून कम बहता है और संक्रमण का खतरा भी कम होता है।
- तेज रिकवरी: चूंकि चीरा छोटा होता है और शरीर पर तनाव कम पड़ता है, इसलिए मरीज जल्दी ठीक होकर घर जा पाता है। बच्चों के लिए तो यह और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे जल्दी अपनी सामान्य जिंदगी में लौट पाते हैं।
- बेहतर विजन: रोबोटिक सिस्टम डॉक्टरों को ऑपरेशन वाले क्षेत्र का 3D हाई-डेफिनिशन व्यू देता है, जिससे वे अंदर के अंगों को और भी स्पष्टता से देख पाते हैं।
इस सफल ऑपरेशन ने बिहार के चिकित्सा क्षेत्र में एक नई उम्मीद जगाई है। यह दिखाता है कि राज्य भी अब आधुनिकतम चिकित्सा तकनीकों और विशेषज्ञता के मामले में किसी से पीछे नहीं है।
यह न सिर्फ IGIMS के डॉक्टरों की मेहनत का नतीजा है, बल्कि उन सभी बच्चों के लिए एक नई किरण है, जो भविष्य में ऐसी जटिल बीमारियों से जूझ सकते हैं।

