मेरठ: भैया, मेरठ में इन दिनों व्यापारियों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं। पहले कोचिंग सेंटरों पर एमडीए की सीलिंग कार्रवाई हुई, तो अब होटल और जिम संचालकों की सांसे ऊपर-नीचे हो रही हैं। इसी घबराहट के माहौल में शुक्रवार दोपहर वेदव्यासपुरी के मीनार होटल में एक बड़ी बैठक बुलाई गई। इसमें शहर के तमाम होटल मालिक, उनके संचालक और जिम चलाने वाले इकट्ठा हुए। सबका एक ही मुद्दा था: प्रशासन से संवाद और सहयोग की अपील, ताकि उनके व्यापार पर तलवार न लटके।
इस बैठक का सीधा मतलब था कि व्यापारी भाई-बहन खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं सीलिंग की अगली गाज उन पर न गिर जाए।
यही वजह थी कि सबने मिलकर एक सुर में अपनी बात रखने का फैसला किया। उनकी सबसे बड़ी मांग थी कि वे कानून का पालन करने को तैयार हैं, लेकिन प्रशासन भी उन्हें सहयोग करे।
सराय एक्ट और NOC का झमेला: व्यापारी बोले- हम तैयार, मदद मिले तो बात बने
बैठक में होटल और जिम संचालकों ने साफ कहा कि वे 'सराय एक्ट' के तहत अपने प्रतिष्ठानों का पंजीकरण कराने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि वे इस एक्ट के तहत आने वाले सभी नियम-कानून और निर्धारित मानकों को पूरा करने के लिए जी-जान से जुट जाएंगे।
लेकिन, दिक्कत कहां है, सुनिए। इस पंजीकरण प्रक्रिया में सिर्फ एक-दो नहीं, बल्कि सात अलग-अलग विभागों से 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' यानी NOC लेने पड़ते हैं।
यह एक लंबा और थका देने वाला प्रोसेस होता है। व्यापारियों ने प्रशासन से गुहार लगाई कि इस प्रक्रिया में वे उनका साथ दें, उन्हें गाइड करें और जहां नियमानुसार संभव हो, वहां कुछ राहत भी दें ताकि काम आसानी से हो सके।
मेरठ व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष शैंकी वर्मा ने मीडिया से बात करते हुए साफ कहा कि व्यापारी कानून का सम्मान करते हैं और उसका पालन भी करना चाहते हैं। उनकी बस इतनी दरख्वास्त है कि प्रशासन भी उनके साथ बातचीत और सहयोग का रवैया अपनाए।
उन्होंने जोर देकर कहा, "व्यापारी कोई अपराधी नहीं हैं। वे अपनी मेहनत से रोज़ी-रोटी कमाते हैं और देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं।
उनके साथ सम्मानजनक तरीके से पेश आया जाना चाहिए, न कि धमकियों और दबाव से काम लिया जाए।"
एमडीए अधिकारी की कार्यशैली पर सवाल: शैंकी वर्मा की सीधी चेतावनी
इस बैठक में शैंकी वर्मा ने एमडीए की एक अधिकारी की कार्यशैली पर भी खुलकर नाराजगी जताई। उन्होंने बिना लाग-लपेट के कहा कि अगर व्यापारियों को जेल भेजने जैसी धमकियां दी जाएंगी, तो व्यापारी भी उसका जवाब देने के लिए तैयार बैठे हैं।
भैया, ये बात सिर्फ धमकी तक सीमित नहीं थी, शैंकी वर्मा ने तो चेतावनी भी दे डाली कि अगर व्यापारियों के साथ ऐसा ही भेदभावपूर्ण और धमकी भरा रवैया जारी रहा, तो संबंधित अधिकारी का खुलकर विरोध किया जाएगा। यह एक तरह से प्रशासन को सीधा संदेश था कि व्यापारी अपनी इज़्ज़त पर आंच नहीं आने देंगे और अपने हक के लिए खड़े रहेंगे।
आप समझ रहे हैं ना, यह सिर्फ एक बैठक नहीं थी। यह व्यापारियों की बढ़ती हताशा और आक्रोश का इज़हार था।
जहां एक तरफ वे नियमों का पालन करने को तैयार दिख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वे यह भी साफ कर देना चाहते हैं कि उन्हें बेवजह परेशान न किया जाए। खासकर तब, जब शहर में लगातार हो रही सीलिंग कार्रवाईयों ने पहले से ही भय का माहौल बना रखा है।
ऐसे में व्यापारियों को सहयोग की ज़रूरत है, न कि कठोरता की।
इस महत्वपूर्ण बैठक में सिर्फ शैंकी वर्मा ही नहीं, बल्कि व्यापार संघ के अध्यक्ष योगेंद्र जाटव, संरक्षक मुकेश गुप्ता, मोहित कराहना, प्रदीप कुमार, प्रवेश यादव, सुभाष मालिक, संदीप कुमार, सोनू गुज्जर, रोहन अरोड़ा और जिला पंचायत सदस्य सुमित प्रधान जैसे कई बड़े व्यापारी नेता और प्रमुख लोग मौजूद थे। इन सबकी मौजूदगी यह दर्शाती है कि यह मुद्दा कितना गंभीर है और व्यापारी समुदाय इस पर एकजुट होकर प्रशासन से एक स्पष्ट और सहयोगपूर्ण रुख की उम्मीद कर रहा है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस अपील पर क्या कदम उठाता है और मेरठ के व्यापारियों की चिंताओं को कैसे दूर करता है।

