मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की साहिबगंज सीट से बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह पर आज एक बड़ा फैसला आने वाला है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में गैर इरादतन हत्या के एक पुराने मामले में आज उनकी सजा पर सुनवाई होनी है। अगर कोर्ट ने दो साल या उससे ज्यादा की सजा सुना दी, तो राजू सिंह की विधायकी भी जा सकती है। मामला 2018 के न्यू ईयर पार्टी का है, जहां गोली लगने से डॉ. अर्चना गुप्ता नाम की एक महिला की मौत हो गई थी। कोर्ट ने इसी साल 6 जून को राजू सिंह को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया था और तब से वो न्यायिक हिरासत में हैं।
ये खबर सिर्फ राजू सिंह की विधायकी पर ही सवालिया निशान नहीं लगाती, बल्कि एक दर्दनाक घटना की पूरी कहानी भी बयान करती है। दिल्ली के एक फार्म हाउस में नए साल की खुशियों के बीच मातम पसर गया था, जब एक गोली ने अर्चना गुप्ता की जान ले ली।
आज का दिन उनके सियासी भविष्य के लिए बेहद अहम है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे बिहार की निगाहें इस सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
आखिर वो कौन सी घटना थी जिसने राजू सिंह को इस कगार पर ला खड़ा किया और एक डॉक्टर की जिंदगी छीन ली? आइए जानते हैं इस पूरे केस को सिलसिलेवार तरीके से।
क्या हुआ था उस न्यू ईयर पार्टी की रात?
बात 31 दिसंबर 2018 की है। साउथ दिल्ली के फतेहपुर बेरी इलाके में स्थित रोज फार्म हाउस पर न्यू ईयर की धमाकेदार पार्टी चल रही थी।
माहौल जोश और मस्ती से भरा हुआ था। इस पार्टी का आयोजन खुद विधायक राजू सिंह और उनके भाई संजय सिंह ने किया था।
पार्टी में कई मेहमान आए हुए थे, जिनमें रियल एस्टेट कारोबारी विकास गुप्ता भी अपनी पत्नी डॉ. अर्चना गुप्ता और बेटी के साथ शामिल थे।
विकास गुप्ता, राजू सिंह के भाई संजय सिंह के अच्छे दोस्त थे।
रात के करीब 12 बज चुके थे। जैसा कि दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में पेश की गई अपनी चार्जशीट में बताया है, ठीक 12 बजते ही राजू सिंह समेत कई लोग ताबड़तोड़ फायरिंग करने लगे।
नए साल का स्वागत गोलियों की आवाज से हो रहा था। हर तरफ शोर-शराबा था, लोग जश्न में डूबे हुए थे।
लेकिन कुछ ही देर में वो खुशी एक चीख और खामोशी में बदल गई। जब फायरिंग का शोर थमा, तो डांस फ्लोर पर एक दर्दनाक मंजर सामने था।
डॉ. अर्चना गुप्ता लहूलुहान पड़ी थीं।
गोली उनके सिर के पिछले हिस्से में, कान के पास लगी थी।
विकास गुप्ता ने तुरंत अपने दोस्त संजय सिंह की गाड़ी पकड़ी और अर्चना को लेकर रात करीब एक बजे फोर्टिज अस्पताल पहुंचे। यहीं से इस पूरे मामले की जानकारी पुलिस को भी मिली।
42 साल की अर्चना गुप्ता पेशे से आर्किटेक्ट थीं। डॉक्टरों ने उनकी हालत गंभीर देखकर उन्हें तुरंत ICU में भर्ती किया और लाइफ सपोर्ट पर रखा, क्योंकि गोली उनके सिर में फंसी हुई थी।
घटना के बाद पुलिस की जांच और सबूत मिटाने की कोशिश
पुलिस को घटना की सूचना 1 जनवरी 2019 को मिली। खबर मिलते ही पुलिस टीम रोज फार्म हाउस पहुंची, लेकिन वहां का नजारा चौंकाने वाला था।
घटनास्थल से राजू सिंह और फायरिंग में शामिल उनके करीबी साथी गायब हो चुके थे। सबसे बड़ी बात ये कि फार्म हाउस को पानी से धोकर साफ कर दिया गया था और फायरिंग में इस्तेमाल हुए कारतूस भी गायब कर दिए गए थे।
यह सीधे तौर पर सबूत मिटाने की कोशिश थी।
एक पुलिस अधिकारी के बयान पर हत्या के प्रयास और सबूत नष्ट करने का मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने तुरंत मामले की जांच शुरू की और अर्चना के पति विकास गुप्ता समेत पार्टी में मौजूद कई चश्मदीदों के बयान दर्ज किए।
जांच आगे बढ़ी और 2 जनवरी 2019 को पुलिस ने राजू सिंह और उनके ड्राइवर हरी सिंह को उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी के साथ ही मामले ने एक नया मोड़ ले लिया था।
कोर्ट में चला मामला और आया फैसला
ये मामला दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में लंबे समय तक चला। तमाम गवाहों के बयान, सबूतों की पड़ताल और कानूनी बहस के बाद, इसी साल 6 जून को विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अपना फैसला सुनाया।
कोर्ट ने बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 (भाग-दो), यानी गैर इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत दोषी ठहराया। इसका मतलब है कि कोर्ट ने माना कि उन्होंने इरादातन हत्या नहीं की, लेकिन उनकी कार्रवाई से किसी की मौत हो सकती थी, इसकी जानकारी उन्हें थी।
फैसला आने के बाद कोर्ट ने राजू सिंह को 3 जुलाई तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। हालांकि, इस मामले में राजू सिंह की पत्नी रेणु सिंह समेत अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
कोर्ट का यह फैसला राजू सिंह के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था, क्योंकि एक मौजूदा विधायक पर ऐसे संगीन आरोप साबित हुए थे।
विधायकी पर संकट: क्या कहता है कानून?
अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल राजू सिंह की विधायकी को लेकर खड़ा हो गया है। कानून के जानकार बताते हैं कि अगर राउज एवेन्यू कोर्ट राजू सिंह को दो साल या इससे अधिक की सजा सुनाती है, तो उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म हो सकती है।
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत, अगर किसी जनप्रतिनिधि को दो साल या उससे ज्यादा की सजा मिलती है, तो उसे तत्काल प्रभाव से अयोग्य घोषित कर दिया जाता है।
हालांकि, दोषी ठहराए गए विधायक के पास हाई कोर्ट में अपील करने का अधिकार होता है। लेकिन केवल अपील दाखिल कर देने भर से सदस्यता नहीं बचती।
इसके लिए उन्हें सक्षम न्यायालय से अपनी दोष सिद्धि या सजा पर रोक (स्टे) हासिल करनी पड़ती है। अगर उन्हें स्टे नहीं मिलता है, तो उनकी सदस्यता जाना लगभग तय है।
आज का दिन राजू सिंह के राजनीतिक करियर के लिए एक अग्निपरीक्षा है, जिस पर सबकी निगाहें बनी हुई हैं।

