सुपौल: बिहार के सुपौल जिले के लोग, जो हर साल कोसी नदी के ‘रौद्र रूप’ से खौफ खाते हैं, इस बार थोड़ी राहत की सांस ले रहे हैं। नेपाल के ऊपरी इलाकों में, जहां से कोसी निकलती है, बारिश थोड़ी कम हुई तो नदी का मिजाज भी नरम पड़ गया। नतीजा ये कि पिछले कुछ दिनों से कोसी का जलस्तर लगातार घट रहा है। ये खबर उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण लेकर आई है, जिनकी जिंदगी हर मानसून में इस नदी के उतार-चढ़ाव से सीधे जुड़ी रहती है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के चेहरों पर भी मुस्कान लौटी है, क्योंकि इस कमी ने संभावित बाढ़ के खतरे को फिलहाल टाल दिया है।
कोसी बैराज पर बने कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के मुताबिक, गुरुवार की शाम 8 बजे बैराज से नदी का डिस्चार्ज 92,200 क्यूसेक दर्ज किया गया। वहीं, नेपाल के बराहक्षेत्र में पानी का बहाव 56,500 क्यूसेक था।
ये आंकड़े पहले की तुलना में काफी कम हैं। आपको याद दिला दें कि इसी साल 22 जून को कोसी ने अपना सबसे बड़ा जलप्रवाह दिखाया था, जब बैराज से 1,86,385 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था।
उस वक्त सुपौल के लोगों की धड़कनें तेज हो गई थीं। पर अब राहत है, क्योंकि जलस्तर इतना कम है कि बैराज के कुल 56 फाटकों में से सिर्फ 10 ही खुले रखे गए हैं।
डीएम ने संभाला मोर्चा; तटबंधों का निरीक्षण
नदी का जलस्तर भले ही घटा हो, लेकिन जिला प्रशासन कोई ढील नहीं देना चाहता। सुपौल के डीएम सावन कुमार खुद जल संसाधन विभाग के बड़े-बड़े अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे।
उन्होंने नेपाल में स्थित पूर्वी एफ्लेक्स तटबंध का बारीकी से मुआयना किया। ये तटबंध कितना अहम है, ये वही जानते हैं जो कोसी के किनारे रहते हैं।
डीएम साहब ने खासकर अतिसंवेदनशील माने जाने वाले स्पर संख्या 26.40 और 26.
88 पर लगे कंक्रीट ब्लॉकों की मजबूती जांची। उन्होंने बाढ़ से लड़ने के लिए जो भी तैयारियां की गई थीं, उन्हें 'संतोषजनक' बताया और मौके पर मौजूद इंजीनियरों की पीठ भी थपथपाई।
उनका कहना था कि इन तटबंधों की सुरक्षा में कोई कोताही नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यही इलाके को बचाने की पहली दीवार हैं।
कटाव वाले स्थलों पर युद्धस्तर पर काम
निरीक्षण सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रहा। डीएम ने स्पर संख्या-21 का भी दौरा किया।
ये वो जगह है जहां 22 जून को, जब नदी में 1,86,385 क्यूसेक पानी का प्रवाह था, तब भयंकर कटाव हुआ था। नदी की धारा ने यहां खूब जोर आजमाया था।
लेकिन अधिकारियों ने बताया कि तब से लेकर अब तक, यहां 'युद्धस्तर पर' काम हुआ है। बड़े-बड़े बोल्डर क्रेटिंग और जियो बैग लगाकर कटावग्रस्त इलाके को पूरी तरह सुरक्षित कर लिया गया है।
यह दिखाता है कि प्रशासन बाढ़ की आशंका को लेकर कितना गंभीर है और पहले से ही तैयारी में जुटा हुआ है। इन तैयारियों का मकसद यही है कि सुपौल और आसपास के इलाकों के लोग चैन की नींद सो सकें, चाहे कोसी का मिजाज कैसा भी हो।
नेपाल से तालमेल और रियल-टाइम डेटा का खेल
डीएम सावन कुमार ने सिर्फ अपने इलाके की नहीं, बल्कि पड़ोसी देश नेपाल की व्यवस्था का भी जायजा लिया। उन्होंने नेपाल के बराहक्षेत्र में स्थापित वाटर गेज प्रणाली का निरीक्षण किया।
यह प्रणाली पानी का स्तर मापने का वैज्ञानिक तरीका है और इससे 'रियल-टाइम डेटा' साझा करने की व्यवस्था भी जुड़ी है। डीएम ने इस पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की, ताकि बिहार को कोसी के जलस्तर से जुड़ी पल-पल की जानकारी मिलती रहे।
अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि सभी संवेदनशील जगहों पर बांस, जियो बैग, बोल्डर जैसी जरूरी सामग्री का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। यानी, अगर आपात स्थिति आती है तो तुरंत काम शुरू किया जा सके।
निरीक्षण के दौरान मुख्य अभियंता संजीव शैलेश समेत कई आला अधिकारी मौजूद थे। डीएम ने सभी को सख्त हिदायत दी कि वे नेपाल स्थित मुख्य नियंत्रण कक्ष से लगातार संपर्क बनाए रखें और हर घंटे जलप्रवाह की रिपोर्ट जिला मुख्यालय को भेजते रहें।
उनका मकसद साफ था कि किसी भी आपात स्थिति से वक्त रहते निपटा जा सके और सुपौल के लोगों को सुरक्षित रखा जा सके। इस तरह, भले ही अभी कोसी शांत है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है, ताकि नदी के मिजाज में अचानक आए बदलाव से निपटा जा सके।

