उत्तर प्रदेश: सोचिए, आपने अपनी ज़िंदगी के 20-25 साल किसी एक काम में झोंक दिए हों। सुबह से शाम तक बच्चों के साथ गुज़ारते हों, उन्हें पढ़ाते हों, उनका भविष्य संवारते हों। और फिर एक दिन अचानक से आपको बताया जाए कि अब आपको अपनी नौकरी बचाने के लिए फिर से वही परीक्षा देनी होगी, जिससे आप कभी गुज़र चुके थे। अगर पास नहीं हुए तो नौकरी चली जाएगी, चाहे आपकी उम्र 40-45 साल ही क्यों न हो। जी हाँ, उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षकों के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा है। सूबे में चार साल बाद उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2026 का बिगुल बज चुका है, और इस बार ये परीक्षा सिर्फ नए उम्मीदवारों के लिए नहीं, बल्कि 1.85 लाख ऐसे शिक्षकों के लिए भी है जिनकी सालों की मेहनत दांव पर लगी है।
ये कोई मामूली इम्तिहान नहीं, बल्कि नौकरी बचाने का संग्राम है। यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग 2 से 4 जुलाई तक इस परीक्षा का आयोजन कर रहा है।
सरकार ने इस बार नियमों में दो बड़े बदलाव किए हैं। पहला, अब जो शिक्षक पहले से नौकरी कर रहे हैं, उन्हें भी TET पास करना अनिवार्य होगा।
और दूसरा, इन सेवारत शिक्षकों को परीक्षा देने के लिए स्कूल से छुट्टी भी मिलेगी। लेकिन इस छुट्टी के पीछे जो तनाव और दबाव है, वो शायद ही कोई देख पा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का असर: क्यों देनी पड़ रही है दोबारा परीक्षा?
इस पूरे मामले की जड़ में है सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला। 1 सितंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने एक अहम निर्णय सुनाया।
फैसले में साफ-साफ कहा गया कि जो उम्मीदवार बिना TET पास किए प्राइमरी शिक्षक बन गए थे, उन्हें अब TET पास करना ही होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो उन्हें उनकी नौकरी से निकाल दिया जाएगा।
अब आप समझ रहे होंगे कि क्यों 1 लाख 85 हज़ार से ज़्यादा शिक्षक अपनी सालों पुरानी नौकरी बचाने के लिए आज फिर से किताबों में सिर खपा रहे हैं।
विभाग ने इस परीक्षा को पास करने के लिए दो साल का वक्त दिया है। यानी, अगर आप सेवारत शिक्षक हैं और इस बार परीक्षा में शामिल हो रहे हैं, तो आपके पास अगले दो साल में इसे पास करने का मौका है।
लेकिन अगर आप इन दो सालों में भी TET पास नहीं कर पाए, तो आपकी नौकरी चली जाएगी। ये नियम उन शिक्षकों के लिए भी लागू होगा जिनकी उम्र 40 या 45 साल हो चुकी है।
अब आप खुद सोचिए, इस उम्र में जब आदमी अनुभव के आधार पर काम करता है, तब फिर से परीक्षा के चक्रव्यूह में फंसना कितना मुश्किल है।
तनाव, प्रदर्शन और दो मौतें: जब शिक्षक सड़कों पर उतरे
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का शिक्षकों ने पुरजोर विरोध किया। देशभर में प्रदर्शन हुए।
शिक्षकों ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजे और संसद में भी इस कानून में संशोधन की मांग उठाई गई। उनकी दलील थी कि 20-25 साल तक पढ़ाने के बाद फिर से परीक्षा लेना कहाँ तक ठीक है? एक शिक्षक जो इतने सालों से बच्चों को पढ़ा रहा है, उसे अचानक फिर से अपनी काबिलियत साबित करने को कहा जाए, ये बात गले उतरना मुश्किल था।
शिक्षक संघों का दावा है कि इस फैसले और इसके चलते आए तनाव की वजह से कम से कम दो शिक्षकों की तो मौत भी हो चुकी है। ये आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ परीक्षा पास करना ही चुनौती नहीं है, बल्कि उसके पीछे का मानसिक और भावनात्मक दबाव कितना गहरा है।
एक शिक्षक के लिए अपनी सालों की सेवा के बाद नौकरी खोने का डर किसी बुरे सपने से कम नहीं।
आंकड़े क्या कहते हैं? कौन-कौन दे रहा है ये इम्तिहान?
अगर हम UPTET 2026 में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के आंकड़ों पर गौर करें तो तस्वीर और साफ हो जाती है। कुल 19 लाख 94 हज़ार 661 उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल हो रहे हैं।
इनमें से:
- 1 लाख 85 हज़ार 791 उम्मीदवार: ये वो शिक्षक हैं जो पहले से ही बेसिक स्कूलों में कार्यरत हैं और अपनी नौकरी बचाने के लिए TET परीक्षा पास करना चाहते हैं।
- 18 लाख 08 हज़ार 870 उम्मीदवार: ये नए उम्मीदवार हैं जो शिक्षक बनने की ख्वाहिश रखते हैं और पहली बार TET परीक्षा में शामिल हो रहे हैं।
यह परीक्षा प्रदेश के 60 जिलों में कुल 955 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जा रही है। इन केंद्रों पर इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों की मौजूदगी से व्यवस्थाएं भी कसौटी पर हैं।
शहरों में परीक्षा का हाल: जाम और चुनौतियाँ
परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों की भारी भीड़ और उनके साथ आने वाले अभिभावकों की वजह से कई जगहों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति भी देखने को मिली। प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश: से मिली जानकारी के मुताबिक, TET परीक्षा के पहले दिन शहर में भारी ट्रैफिक जाम लग गया था। परीक्षार्थी और उनके माता-पिता एक घंटे से ज़्यादा समय तक जाम में फंसे रहे, जिससे उन्हें परीक्षा केंद्रों तक समय पर पहुँचने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। CO सिटी आशुतोष मिश्रा और ट्रैफिक पुलिस को व्यवस्था संभालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। यह एक छोटी सी झलक है कि इतनी बड़ी परीक्षा का आयोजन ज़मीनी स्तर पर कितनी चुनौतियाँ पैदा करता है।
यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग के उपसचिव संजय सिंह के मुताबिक, परीक्षा के लिए सबसे ज्यादा केंद्र वाराणसी में बनाए गए हैं। यहां कुल 68 एग्जाम सेंटर हैं, जिन पर 1 लाख 27 हज़ार 239 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए।
इसके बाद प्रयागराज में 53 एग्जाम सेंटर बनाए गए हैं, जहां 76 हज़ार 634 उम्मीदवार परीक्षा दे रहे हैं। राजधानी लखनऊ में 45 सेंटर पर 76 हज़ार 720 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
यह बताता है कि प्रदेश के बड़े शहरों में भी शिक्षा के क्षेत्र में नौकरी पाने वालों की होड़ कितनी ज़्यादा है।
NIOS D.El.Ed. वालों के लिए भी ख़ास नियम
इस पूरी कवायद के बीच, NIOS से D.El.
Ed. (ODL) कोर्स करने वाले अभ्यर्थियों के लिए भी एक खास नोटिस जारी किया गया है।
इसके मुताबिक, केवल वे अभ्यर्थी जिनके पास 18 माह का D.El.
Ed. (ODL) कोर्स है और जो 31.
03.2015 अथवा उससे पहले सेवा में थे, उन्हें UPTET 2026 में औपबंधिक रूप से सम्मिलित होने की अनुमति दी जाएगी।
हालांकि, यह अनुमति माननीय उच्च न्यायालय में चल रहे किसी भी मामले के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी। यह जानकारी उन हजारों शिक्षकों के लिए अहम है जिन्होंने इस खास कोर्स के जरिए अपनी योग्यता हासिल की थी।
कुल मिलाकर, यूपी में चल रही TET परीक्षा सिर्फ एक सामान्य एग्जाम नहीं है। ये उन लाखों शिक्षकों के भविष्य का सवाल है जो दशकों से शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
उनके लिए ये परीक्षा सिर्फ नंबरों का खेल नहीं, बल्कि अपने अनुभव, सम्मान और सबसे बढ़कर, अपनी नौकरी बचाने की लड़ाई है।

