पूर्णिया: आप सोचिए, कोई इंसान दूसरों के घरों में बिजली की रोशनी फैलाता हो, उनके खराब तारों को ठीक कर उनके जीवन में चमक भरता हो, और एक दिन वही इंसान अपने ही घर में बिजली का तार जोड़ते हुए ज़िंदगी की जंग हार जाए। पूर्णिया के चपिया घाट गांव में यही दर्दनाक वाकया सामने आया है, जहां एक मंझे हुए बिजली मिस्त्री छोटे लाल यादव को अपने ही घर में टूटे तार को जोड़ना इतना भारी पड़ गया कि उनकी जान चली गई। गुरुवार देर शाम हुए इस हादसे ने पूरे गांव को सन्न कर दिया है और छोटे लाल के घर में तो जैसे पहाड़ ही टूट पड़ा है।
छोटे लाल यादव, उम्र 47 साल, अपने पीछे बूढ़ी मां दिन देवी, पत्नी विशाखा देवी और तीन जवान बेटे मनीष, सुमित और अमित को छोड़ गए हैं। वो सिर्फ बिजली मिस्त्री ही नहीं थे, बल्कि खेती-बाड़ी करके भी अपने परिवार का पेट पालते थे।
रोज़ी-रोटी के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले छोटे लाल की अचानक मौत से परिवार पर दुखों का सैलाब उमड़ पड़ा है। उस घर में जहां रोशनी फैलाने का काम छोटे लाल का था, अब सिर्फ अंधेरा और मातम पसरा हुआ है।
यह घटना सिर्फ पूर्णिया के के.नगर थाना क्षेत्र के चपिया घाट गांव की नहीं, बल्कि उन सभी मेहनतकश लोगों की कहानी है जिनकी ज़िंदगी एक पल में बदल सकती है।
हादसे की पूरी कहानी
बेटे मनीष कुमार ने आंखों में आंसू भरे हुए बताया कि यह सब गुरुवार देर शाम हुआ। “अचानक घर में बिजली का तार टूट गया था।
पापा ने सोचा, ठीक कर देता हूं। वो टूटी हुई बिजली की तार को जोड़ रहे थे।
उसी दौरान, तार का एक छोटा सा हिस्सा कहीं से खुला हुआ था। जैसे ही उनका हाथ उस नंगे तार से छूआ, बिजली के तेज़ करंट ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।
” मनीष की आवाज़ भर्रा गई। वो बताते हैं कि देखते ही देखते उनके पिता ज़मीन पर गिर पड़े।
घर में चीख-पुकार मच गई। पल भर में पूरा माहौल बदल गया, हंसी-खुशी का घर गम में डूब गया।
परिवार की चीख सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत दौड़ पड़े। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें।
छोटे लाल ज़मीन पर बेसुध पड़े थे। गांव के लोगों ने मिलकर तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया।
वार्ड सदस्य प्रतिनिधि महेश कुमार यादव और गांव के कई लोग छोटे लाल को लेकर पूर्णिया के सदर अस्पताल की तरफ भागे। हर कोई यही दुआ कर रहा था कि छोटे लाल ठीक हो जाएं, उनकी साँसें चलती रहें।
लेकिन अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों ने जो ख़बर दी, उसने सबकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। डॉक्टरों ने इलाज के दौरान ही उन्हें मृत घोषित कर दिया।
यह ख़बर सुनकर परिवार और साथ आए लोगों पर मानों वज्रपात हो गया।
छोटे लाल यादव, जो पूर्णिया सिटी के काली मंदिर इलाके में बिजली मिस्त्री का काम करते थे, रोज़ाना न जाने कितने घरों की बिजली ठीक करते थे। उनकी कला और मेहनत पर गांव वालों को पूरा भरोसा था।
जब भी किसी के घर में बिजली से जुड़ी कोई समस्या आती थी, छोटे लाल ही पहले शख्स होते थे जिन्हें बुलाया जाता था। अपनी ज़िंदगी का ज़्यादातर हिस्सा उन्होंने बिजली के तारों और उनके पेचीदा कनेक्शन को समझने में बिताया था।
उन्हें बिजली के खतरों का भी पूरा अंदाज़ा था, फिर भी अपने ही घर में एक छोटी सी असावधानी या शायद बदकिस्मती ने उनकी जान ले ली।
यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि उस परिवार के सपनों का टूटना भी है जिसे छोटे लाल ने अपनी मेहनत से सींचा था। उनकी मां, पत्नी और बच्चे अब इस सदमे से कैसे उबरेंगे, यह बड़ा सवाल है।
घर में कमाने वाले इकलौते सदस्य के चले जाने से परिवार के सामने ज़िंदगी का एक नया और कठिन संघर्ष खड़ा हो गया है। गांव वाले इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़े हैं, लेकिन छोटे लाल की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता।
यह घटना एक बार फिर हमें याद दिलाती है कि बिजली का काम कितना खतरनाक हो सकता है और थोड़ी सी भी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है। छोटे लाल की मौत ने पूरे पूर्णिया में एक गंभीर संदेश दिया है कि सुरक्षा उपायों की अनदेखी कितनी घातक साबित हो सकती है, खासकर जब हम अपने ही घर में किसी काम को हल्के में ले लेते हैं।
उनकी मौत ने न केवल उनके परिवार को, बल्कि पूरे समुदाय को गहरा सदमा पहुँचाया है। एक मेहनती और विनम्र व्यक्ति, जो समाज के लिए कुछ कर रहा था, उसका इस तरह से चले जाना बेहद दुखद है।
उम्मीद है कि प्रशासन इस घटना से सबक लेकर बिजली सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चलाएगा और लोगों को ऐसे हादसों से बचने के लिए प्रेरित करेगा। छोटे लाल का जाना इस बात की दुखद याद दिलाता है कि जीवन कितना अनिश्चित है और हमें हर पल सावधानी बरतनी चाहिए।

