पूर्णिया: बिहार के पूर्णिया जिले से एक ऐसी खबर आई है, जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है। एक घर की खुशियां मातम में बदल गईं, जब एक छोटी सी गलती या शायद बड़ी लापरवाही ने एक होनहार छात्रा की जान ले ली। घर में रात को चैन से सो रही थी मुन्नी कुमारी, जिसे अगले साल मैट्रिक का इम्तिहान देना था। उसे क्या पता था कि वह रात उसके लिए आखिरी रात साबित होगी। एक जहरीले सांप ने उसे डस लिया और आरोप है कि सात घंटे तक सही इलाज न मिलने की वजह से उस लड़की ने दम तोड़ दिया।
मामला पूर्णिया के रुपौली थाना क्षेत्र के गोरिया गांव का है। विद्यानंद महतो की बेटी मुन्नी कुमारी के घर में खुशियों की तैयारियां चल रही थीं।
मुन्नी पढ़ाई में अच्छी थी और मैट्रिक की परीक्षा के लिए खूब मेहनत कर रही थी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
अब घर में सन्नाटा पसरा है और एक बेटी के जाने का गम परिवार को तोड़ चुका है।
आधी रात का वो डरावना पल
मुन्नी के पिता विद्यानंद महतो ने बताया कि वो रात बाकी रातों जैसी ही थी। मुन्नी अपने कमरे में सो रही थी।
देर रात अचानक उसे कुछ अजीब सा महसूस हुआ। उसने देखा कि एक विषैले सांप ने उसे डस लिया है।
सांप के काटने के बाद मुन्नी की तबीयत बिगड़ने लगी। उसने हिम्मत करके अपने पिता को जगाया और बताया कि उसे सांप ने काट लिया है।
यह सुनते ही घर में हड़कंप मच गया। रात के अंधेरे में परिवार वाले बिना वक्त गंवाए मुन्नी को लेकर रुपौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचे।
रूपौली अस्पताल में इलाज की लंबी इंतज़ार
परिजनों के मुताबिक, मुन्नी को रात करीब 12 बजे रुपौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। परिवार को उम्मीद थी कि यहां उनकी बेटी को तुरंत इलाज मिलेगा और उसकी जान बच जाएगी।
लेकिन आरोप है कि अस्पताल में जो हुआ, उसने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। मुन्नी को रात भर वहीं रखा गया, लेकिन उसे पूर्णिया GMCH (जनरल मेडिकल कॉलेज और अस्पताल) रेफर नहीं किया गया।
परिवार का आरोप है कि उन्हें सुबह तक इंतजार करवाया गया और जब सुबह हुई, तब जाकर मुन्नी को पूर्णिया GMCH रेफर किया गया।
विद्यानंद महतो का कहना है कि इसी देरी ने उनकी बेटी की जान ले ली। उन्होंने बताया, “अगर समय रहते हमारी बेटी को बड़े अस्पताल रेफर कर दिया जाता, तो शायद आज वह हमारे बीच होती।
इलाज में करीब सात घंटे की देरी हो गई।” उनके आंसू और उनकी आवाज में दर्द साफ झलक रहा था।
अस्पताल में इंतजार की वो रात परिवार के लिए पहाड़ जैसी थी, जहां हर पल उनकी बेटी की हालत बिगड़ती जा रही थी और उन्हें लगता रहा कि कीमती वक्त हाथ से फिसलता जा रहा है।
GMCH पहुंचने पर डॉक्टरों ने क्या कहा
सुबह परिजन मुन्नी को लेकर पूर्णिया GMCH पहुंचे। यहां पहुंचने तक मुन्नी की हालत बेहद नाजुक हो चुकी थी।
डॉक्टरों ने उसकी जांच की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने मुन्नी को मृत घोषित कर दिया।
यह खबर सुनते ही अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था।
उनकी सारी उम्मीदें GMCH की दहलीज पर ही टूट गईं। जिस बेटी के लिए वे आधी रात से भागदौड़ कर रहे थे, वह अब हमेशा के लिए खामोश हो चुकी थी।
सर्पदंश के मामलों में 'गोल्डन आवर' की अहमियत
इस घटना ने एक बार फिर सर्पदंश (snakebite) के मामलों में समय पर इलाज की अहमियत को उजागर किया है। डॉक्टरों का साफ कहना है कि सांप के काटने के मामलों में शुरुआती एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है, जिसे 'गोल्डन आवर' भी कहा जाता है।
इस दौरान अगर मरीज को सही एंटी-वेनम (anti-venom) और मेडिकल सपोर्ट मिल जाए, तो कई मरीजों की जान बचाई जा सकती है। मुन्नी के मामले में आरोप है कि यही 'गोल्डन आवर' तो क्या, उसके बाद के कई घंटे भी यूं ही निकल गए और इलाज में हुई कथित लापरवाही ने एक होनहार छात्रा को जिंदगी से दूर कर दिया।
इस घटना के बाद रुपौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर सवालों के घेरे में आ गया है, जहां पर इलाज में इतनी बड़ी चूक का आरोप लगा है।

