शिवहर: बिहार के शिवहर जिले से एक ऐसी खबर आई है, जिसने खाकी वर्दी पर लगे दाग को और गहरा कर दिया है। यहां एक महिला थानाध्यक्ष और उनके चालक पर जमानत के नाम पर रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगा और आरोप सही भी पाए गए। नतीजा ये हुआ कि एसपी साहब को कड़ा एक्शन लेना पड़ा। महिला थानाध्यक्ष को तुरंत निलंबित कर दिया गया, वहीं चालक को उसकी ड्यूटी से हटा दिया गया है। ये पूरा मामला सिर्फ पैसा मांगने का नहीं, बल्कि पैसे के लेन-देन के लिए एक चाय की दुकान के यूपीआई अकाउंट का इस्तेमाल करने का भी है, जो कहानी को और दिलचस्प बनाता है।
ये पूरा लफड़ा शुरू हुआ शिवहर के तरियानी थाना क्षेत्र के चकसुरगाही गांव से। यहां के रहने वाले सुजीत पासवान ने हिम्मत जुटाई और सीधा पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र कुमार सिंह के जनता दरबार में जा पहुंचे।
अब आप सोच रहे होंगे कि जनता दरबार में सुजीत किस शिकायत को लेकर गए थे? असल में, सुजीत का आरोप था कि महिला थाना में दर्ज एक केस (कांड संख्या 34/26) में किसी की जमानत दिलानी थी। इसी जमानत के काम के लिए महिला थानाध्यक्ष कल्याणी कुमारी और उनके गृहरक्षक चालक राकेश कुमार सिंह ने उनसे रिश्वत की डिमांड की थी।
शिकायत से एक्शन तक: कैसे खुली पोल?
पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र कुमार सिंह ने सुजीत पासवान की शिकायत को गंभीरता से लिया। ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं थी, सीधे-सीधे पुलिस की साख पर सवाल था।
एसपी साहब ने बिना देर किए, इस पूरे मामले की जांच शिवहर के एसडीपीओ को सौंप दी। एसडीपीओ ने अपनी टीम के साथ मामले की तह तक जाना शुरू किया।
उन्होंने हर पहलू की बारीकी से जांच की, शिकायतकर्ता सुजीत पासवान से बात की, आरोपों की सच्चाई परखी और ऐसे सबूत इकट्ठा किए जिनसे दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
जांच के दौरान एक-एक करके परतें खुलती गईं। जो आरोप सुजीत पासवान ने लगाए थे, वे जांच में बिल्कुल सही पाए गए।
सोचिए, एक आम नागरिक जब पुलिस के पास न्याय की उम्मीद लेकर जाता है, और उसे वहीं से ऐसी कटु सच्चाई का सामना करना पड़े, तो सिस्टम पर से भरोसा उठना तय है। लेकिन इस मामले में, एसपी साहब की त्वरित कार्रवाई ने कहीं न कहीं ये भरोसा कायम रखने की कोशिश की है।
चाय की दुकान का UPI कनेक्शन: रिश्वत का नया तरीका
जांच के दौरान जो एक और चौंकाने वाली बात सामने आई, वो थी रिश्वत के पैसे के लेन-देन का तरीका। एसपी शैलेन्द्र कुमार सिंह ने खुद बताया कि जांच में ये भी पता चला है कि रिश्वत की रकम का लेन-देन महिला थाना के ठीक पास में मौजूद एक चाय की दुकान के यूपीआई खाते के माध्यम से हुआ था।
अब ये तरीका सुन कर कोई भी चौंक सकता है। रिश्वत मांगने के लिए भी लोग इतने आधुनिक हो गए हैं कि नगद पैसे की जगह सीधे यूपीआई पेमेंट का सहारा ले रहे हैं।
जांच टीम ने इस डिजिटल लेन-देन के तथ्य की भी पुष्टि की। ये अपने आप में बताता है कि कैसे भ्रष्टाचारी नए-नए तरीके ढूंढ रहे हैं ताकि उनके काले कारनामों को छिपाया जा सके, लेकिन इस बार वे पकड़े गए।
ये कोई पहली घटना नहीं है जब भ्रष्टाचार के मामले में डिजिटल लेनदेन का इस्तेमाल सामने आया हो, लेकिन पुलिस विभाग के भीतर इस तरह की घटना होना चिंताजनक है। शायद उन्हें लगा होगा कि यूपीआई से पैसे लेने पर कोई सबूत नहीं छूटेगा या उसे ट्रैक करना मुश्किल होगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
यह दिखाता है कि तकनीक जहां एक तरफ सुविधा देती है, वहीं दूसरी तरफ गलत काम करने वालों के लिए नए रास्ते भी खोलती है, और साथ ही, जांच एजेंसियों के लिए भी नए सबूत जुटाने के तरीके सामने लाती है।
भ्रष्टाचार पर एसपी का 'जीरो टॉलरेंस'
जांच रिपोर्ट आने के बाद, पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र कुमार सिंह ने तत्काल और कड़ा एक्शन लिया। महिला थानाध्यक्ष कल्याणी कुमारी को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
उन्हें पुलिस केंद्र, शिवहर में योगदान देने का निर्देश दिया गया है। यानी अब वे थाना में काम नहीं कर पाएंगी और उन पर विभागीय कार्रवाई जारी रहेगी।
वहीं, गृहरक्षक चालक राकेश कुमार सिंह, जो इस पूरे मामले में शामिल पाए गए, उन्हें भी कर्तव्य से हटा दिया गया है।
एसपी शैलेन्द्र कुमार सिंह ने साफ-साफ शब्दों में संदेश दिया है कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई भी पुलिसकर्मी ऐसे गलत कामों में लिप्त पाया गया, तो उसके खिलाफ बिना किसी मुरव्वत के कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह सिर्फ एक महिला थानाध्यक्ष और चालक के खिलाफ हुई कार्रवाई नहीं है, बल्कि पूरे विभाग को एक संदेश है कि भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे कदम ही जनता के बीच पुलिस की छवि को सुधारने में मदद करते हैं और उन्हें कानून व्यवस्था पर विश्वास दिलाते हैं।
उम्मीद है कि इस कार्रवाई से दूसरे पुलिसकर्मी भी सबक लेंगे और अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाएंगे।

