मथुरा: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में शुक्रवार का दिन बिजली विभाग के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था। दोपहर बाद कृष्णा नगर बिजली घर में जो हुआ, उसने सबको हिलाकर रख दिया। दरअसल, हुआ यूं कि एक मामूली से काम के लिए चक्कर काट रहे उपभोक्ता ने जब रिश्वतखोर बाबू की मनमानी से तंग आकर एंटी करप्शन ब्यूरो का दरवाजा खटखटाया, तो आगरा से आई टीम ने ऐसा गोपनीय जाल बिछाया कि बाबू सुरेश चंद रंगे हाथों ₹5000 की रिश्वत लेते पकड़ा गया। यह सब इतना फिल्मी अंदाज में हुआ कि बिजली घर में मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों की आंखें फटी की फटी रह गईं।
आप कह सकते हैं कि यह कहानी सिर्फ एक रिश्वतखोर बाबू के पकड़े जाने भर की नहीं है, बल्कि एक आम उपभोक्ता के धैर्य और व्यवस्था के खिलाफ उसकी जीत की कहानी भी है। वो कहते हैं न, हर अपराधी की अपनी एक गलती होती है।
बाबू सुरेश ने भी यही गलती की, उसने एक आम आदमी को इतना सताया कि उसने चुप रहने के बजाय आवाज़ उठाने की ठानी।
क्या था पूरा मामला और कौन था बाबू सुरेश?
यह किस्सा शुरू होता है एक स्थानीय उपभोक्ता से, जो अपने बिजली कनेक्शन का लोड कम करवाना चाहता था। यह काम ऐसा नहीं था कि जिसके लिए महीनों बिजली घर के चक्कर काटने पड़ें, लेकिन कृष्णा नगर बिजली घर में तैनात 59 वर्षीय लिपिक सुरेश चंद पुत्र स्वर्गीय गोकुल चंद्र, निवासी काजीपाड़ा थाना रकावगंज, आगरा ने इस उपभोक्ता की नाक में दम कर रखा था।
बेचारा उपभोक्ता पिछले काफी समय से अपने काम के लिए लगातार बिजली घर आ रहा था, लेकिन बाबू सुरेश उसे हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर टरका देता।
आप समझ सकते हैं कि जब कोई सरकारी काम बार-बार अटकता है और बिना किसी वाजिब वजह के, तो मानसिक परेशानी कितनी बढ़ जाती है। उपभोक्ता के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा था।
हर बार उसे उम्मीद होती कि आज उसका काम हो जाएगा, लेकिन हर बार उसे निराशा ही हाथ लगती। अंत में, जब उपभोक्ता ने सीधे-सीधे काम न होने का कारण पूछा, तो बाबू सुरेश ने अपनी असलियत उजागर कर दी।
उसने साफ शब्दों में कहा, “मुझको रिश्वत दो, उसके बाद ही तुम्हारा काम आगे बढ़ेगा।” यह बात सुनकर उपभोक्ता सन्न रह गया, लेकिन उसने हार नहीं मानी।
शिकायत और एंटी करप्शन का गोपनीय जाल
रिश्वतखोर बाबू की इस सीधी-सादी मांग ने उपभोक्ता को इतना परेशान कर दिया कि उसने तय कर लिया कि वह इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेगा। उसने सीधे आगरा एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम से संपर्क किया और अपनी सारी आपबीती उन्हें लिख कर दी।
आगरा एंटी करप्शन ट्रैप टीम प्रभारी श्रीमती पूजा शर्मा और उनकी टीम ने इस शिकायत को बेहद गंभीरता से लिया। उन्हें पता था कि इस तरह के मामले में रंगे हाथों पकड़ना ही सबसे पुख्ता सबूत होता है।
टीम ने शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करते हुए एक गोपनीय योजना तैयार की। यह योजना कुछ ऐसी थी कि बाबू सुरेश को जरा भी भनक न लगे कि उस पर जाल बिछाया जा रहा है।
योजना के तहत, पीड़ित उपभोक्ता को रिश्वत की तयशुदा रकम लेकर कृष्णा नगर बिजली घर जाने को कहा गया। एंटी करप्शन टीम ने अपनी रणनीति के तहत पूरी तैयारी कर ली थी और बाबू सुरेश की हरकतों पर पैनी नजर रखे हुए थी।
यह सब कुछ इतनी खामोशी से हो रहा था कि बिजली घर में किसी को कोई शक नहीं हुआ।
रंगे हाथ पकड़ा गया रिश्वतखोर बाबू
शुक्रवार दोपहर बाद, तय रणनीति के अनुसार, पीड़ित उपभोक्ता रिश्वत की नकद धनराशि लेकर कृष्णा नगर बिजली घर पहुंचा। वहां उसने बाबू सुरेश को ढूंढा और मौका मिलते ही, जो पैसे मांगे गए थे, वह उसके हाथों में थमा दिए।
बस फिर क्या था! जैसे ही पैसे बाबू सुरेश के हाथ में पहुंचे, पहले से घात लगाकर बैठी एंटी करप्शन की टीम ने बिजली घर में धावा बोल दिया। यह सब इतनी तेजी से हुआ कि बाबू सुरेश को संभलने का मौका ही नहीं मिला।
टीम ने उसे फौरन दबोच लिया।
बाबू के पास से रिश्वत की वह नकद धनराशि भी बरामद कर ली गई। बिजली घर में अचानक हुई इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया।
जो कर्मचारी और अधिकारी अपनी कुर्सियों पर बैठकर काम कर रहे थे, वे सब उठ खड़े हुए। माहौल में एक अजीब सी खलबली मच गई।
किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर यह सब क्या हो रहा है। टीम ने फौरन बाबू सुरेश को अपनी गिरफ्त में लिया और आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करनी शुरू कर दीं।
आगे की कार्रवाई और भ्रष्टाचार पर लगाम
गिरफ्तारी के तुरंत बाद, एंटी करप्शन टीम आरोपी लिपिक सुरेश को अपने साथ आगरा ले गई। वहां उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बाबू के खिलाफ अभियोग पंजीकरण की कार्रवाई भी की जा रही है। इस कार्रवाई से यह साफ संदेश गया है कि भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह कितना भी छोटा कर्मचारी क्यों न हो।
यह घटना उन सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए एक चेतावनी है, जो सोचते हैं कि वे बेखौफ होकर रिश्वत ले सकते हैं और पकड़े नहीं जाएंगे। साथ ही, यह उन आम जनता के लिए भी एक उम्मीद की किरण है, जो भ्रष्टाचार से त्रस्त हैं और अपनी आवाज उठाने से डरते हैं।
यह दिखाता है कि अगर आप हिम्मत करें और सही जगह शिकायत करें, तो न्याय जरूर मिलता है।

