पटना: अरे भाई साहब! बिहार की सियासत में पिछले एक महीने से जो उठापटक चल रही थी, उस पर अब जाकर कुछ विराम लगता दिख रहा है. हम बात कर रहे हैं लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा को लेकर मचे बवाल की. खबर आई है कि बिहार सरकार ने दोनों नेताओं को वापस Z कैटेगरी की सुरक्षा दे दी है. साथ ही, वही बुलेटप्रूफ गाड़ी भी वापस मिल गई है, जिसके बिना लालू परिवार के बयानों में तल्खी आ गई थी.
आप सबको याद होगा, जब उनकी सुरक्षा घटाई गई थी तो कैसे राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने आरोप लगाए थे कि यह राजनीतिक बदले की भावना से किया जा रहा है. अब शुक्रवार की शाम बिहार सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर इस खींचतान को खत्म कर दिया है.
यह फैसला कई दिनों की सियासी गहमागहमी, सुरक्षा लौटाने के ड्रामे और बंगले के विवाद के बाद आया है.
सुरक्षा घटाने से मचा था बड़ा राजनीतिक बवाल
चलिए, अब थोड़ा फ्लैशबैक में चलते हैं और समझते हैं कि ये सब शुरू कैसे हुआ. दरअसल, करीब एक महीने पहले बिहार सरकार ने एक अहम समीक्षा बैठक की थी.
ये बैठक राज्य के VVIP लोगों को दी जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थी. इसी समीक्षा के बाद एक बड़ा फैसला आया — लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा श्रेणी में बदलाव कर दिया गया.
सीधा-सीधा कहें तो, सरकार ने उनकी सुरक्षा में कटौती कर दी थी. बस फिर क्या था, इस फैसले ने आग में घी का काम किया और बिहार की राजनीति में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया.
लालू परिवार इस फैसले से इतना नाराज हुआ कि उन्होंने सरकार की नई सुरक्षा व्यवस्था को सिरे से खारिज कर दिया. पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने तो 10 सर्कुलर रोड स्थित अपने बंगले पर तैनात सभी सरकारी सुरक्षा जवानों को तुरंत वापस लौटा दिया.
उनके इस कदम के बाद, उनकी बेटी और सांसद मीसा भारती और बेटे तथा नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी अपनी-अपनी सुरक्षा वापस कर दी थी. उनका मानना था कि जब शीर्ष नेताओं की ही सुरक्षा घटाई जा रही है, तो उन्हें इस तरह की 'घटी हुई' सुरक्षा की जरूरत नहीं है.
राजद ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार पर तीखे हमले किए थे. पार्टी ने आरोप लगाया था कि विपक्ष के प्रमुख नेताओं को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है.
यह सब केवल लालू परिवार को परेशान करने और उनकी छवि खराब करने के लिए किया जा रहा है. सुरक्षा में कटौती को सीधे-सीधे राजनीतिक बदले के तौर पर देखा जा रहा था, जिससे सरकार और विपक्ष के बीच दूरियां और बढ़ गईं.
सुरक्षा घटाने में बंगले के विवाद का पेंच
अब आप सोच रहे होंगे कि सिर्फ सुरक्षा घटाने पर इतना बड़ा बवाल क्यों? दरअसल, इस पूरे मामले में एक और बड़ा पेंच फंसा था — राबड़ी आवास का बंगला विवाद. यह तब की बात है जब सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने राबड़ी आवास को खाली करने का नोटिस जारी किया था.
इस नोटिस को लेकर विवाद अभी थमा भी नहीं था कि अचानक लालू परिवार की Z+ सुरक्षा खत्म कर दी गई. इस घटनाक्रम को देखकर कई लोगों ने यह अनुमान लगाया कि ये दोनों चीजें आपस में जुड़ी हुई हैं, और सुरक्षा में कटौती बंगले के विवाद का ही एक परिणाम है.
आपको बता दें कि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को पहले बिहार पुलिस की तरफ से एक 'विशेष सुरक्षा व्यवस्था' दी जाती थी. इस व्यवस्था में एस्कॉर्ट की सुविधा, एक बुलेटप्रूफ कार और 8 से लेकर 16 तक सुरक्षा गार्ड शामिल होते थे, जो हर वक्त उनकी सुरक्षा में तैनात रहते थे.
इसके साथ ही, लालू यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (JJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव को भी Y कैटेगरी की सुरक्षा मिली हुई थी, जिसे बाद में खत्म कर दिया गया था. इस पूरी सुरक्षा को हटाने के बाद लालू परिवार ने खुद को असुरक्षित महसूस करते हुए सरकारी सुरक्षा को लौटा दिया था.
राबड़ी आवास खाली करने का अल्टीमेटम
जिस बंगले को लेकर यह पूरा विवाद चल रहा था, यानी 10 सर्कुलर रोड का बंगला, उसे खाली करने को लेकर सरकार ने 29 मई को ही आदेश जारी किया था. लेकिन लालू परिवार की तरफ से अब तक यह बंगला खाली नहीं किया गया था.
इसी के बाद सरकार ने अपना रुख और कड़ा करते हुए लालू परिवार को बंगला खाली करने के लिए 15 दिनों का अल्टीमेटम दे दिया था.
यह 10 सर्कुलर रोड वाला बंगला ही था, जहां पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव कई सालों से एक साथ रहते थे. हालांकि, अब तेजस्वी यादव 1 पोलो रोड वाले बंगले में शिफ्ट हो गए हैं, और लालू-राबड़ी देवी कौटिल्य नगर स्थित अपने निजी बंगले में रहने लगे हैं.
इन सब उठापटक, बयानबाजी और राजनीतिक घमासान के बाद, अब सरकार ने लालू और राबड़ी की सुरक्षा फिर से बहाल कर दी है, जिससे इस खींचतान पर फिलहाल तो विराम लग गया है. अब देखना होगा कि इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में और क्या नए रंग देखने को मिलते हैं.

