भोजपुर: बिहार के भोजपुर जिले में एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसे सुनकर किसी का भी दिल पसीज जाए। मझौवां गांव के अफीमी कोठी में रहने वाले कमल सिंह के परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है, जिसकी शायद उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। उनकी 18 साल की बेटी अमृता कुमारी ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। जिस उम्र में बेटियां अपने सपनों को पंख देती हैं, उस उम्र में अमृता ने दुनिया को अलविदा कह दिया। घर के कमरे में पंखे से लटकता हुआ उसका शव मिला है, और यह खबर पूरे इलाके में आग की तरह फैल गई है।
टाउन थाना क्षेत्र में हुई इस घटना ने पूरे गांव को सन्न कर दिया है। पिता कमल सिंह ने पुलिस और अपने पड़ोसियों को बताया कि अमृता अपनी मां की मौत और भाई के हालिया हादसे के बाद से गहरे मानसिक तनाव में थी।
यह किसी फिल्मी कहानी जैसा दुखद मोड़ है, जहां एक के बाद एक हादसों ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियों को निगल लिया। अब सवाल यह है कि आखिर एक जवान लड़की को किस हद तक मानसिक पीड़ा ने घेरा होगा कि उसने इतना बड़ा कदम उठा लिया?
घर लौटा पिता, सामने थी बेटी की लटकती लाश
यह गुरुवार देर शाम की बात है। कमल सिंह मंदिर से पूजा-पाठ करके घर लौटे थे।
घर में उन्हें अजीब सी शांति महसूस हुई। जब वे अमृता के कमरे की तरफ गए, तो देखा कि दरवाजा अंदर से बंद था।
उन्होंने आवाज दी, बार-बार दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया। आमतौर पर अमृता इतनी देर तक दरवाजा बंद नहीं रखती थी।
पिता के मन में अनहोनी की आशंका बलवती होने लगी। उन्होंने बिना देर किए दरवाजा तोड़ने का फैसला किया।
दरवाजा टूटा और जो दृश्य सामने आया, उसने कमल सिंह के पैरों तले से जमीन खिसका दी। कमरे के पंखे से उनकी लाडली बेटी अमृता का शव ओढ़नी के फंदे से लटक रहा था।
यह मंजर इतना भयानक था कि शायद कोई पिता अपने जीवन में ऐसा न देखे। बेटी की जान जा चुकी थी और घर में कोहराम मच गया।
चीख-पुकार सुनकर आस-पड़ोस के लोग दौड़े चले आए। कुछ ही देर में पूरा घर और मोहल्ला मातम में डूब गया।
माँ की मौत और भाई के हादसे का सदमा
पिता कमल सिंह ने पुलिस और स्थानीय लोगों को बताया कि अमृता पिछले काफी समय से बेहद परेशान चल रही थी। लगभग एक साल पहले अमृता की मां, आरती देवी का लिवर कैंसर के कारण निधन हो गया था।
मां की मौत का सदमा अमृता के लिए बहुत गहरा था। वह अपनी मां के बेहद करीब थी और उनकी बीमारी के दौरान भी काफी टूट गई थी।
अक्सर वह मां को याद करके उदास रहती थी। परिवार वालों ने उसे समझाने और संभालने की बहुत कोशिश की, लेकिन मां की कमी उसके दिल में घर कर गई थी।
अभी यह जख्म भरा भी नहीं था कि कुछ दिन पहले परिवार पर एक और विपदा आ गई। अमृता के भाई का एक सड़क हादसे में गंभीर एक्सीडेंट हो गया।
भाई के चोटिल होने और उसकी तबीयत को लेकर भी अमृता काफी तनाव में रहने लगी थी। एक साल के भीतर मां को खोना और फिर भाई का एक्सीडेंट, इन दो बड़े हादसों ने अमृता के कोमल मन पर गहरा असर डाला था।
कमल सिंह का कहना है कि इन लगातार झटकों ने अमृता को भीतर से तोड़ दिया था और शायद इसी मानसिक परेशानी के चलते उसने यह आत्मघाती कदम उठाया।
सबसे छोटी अमृता, परिवार में पसरा मातम
अमृता कुमारी अपने छह भाई-बहनों में सबसे छोटी थी। परिवार में उसके तीन भाई - अनुज सिंह, अनूप सिंह, कुलदीप सिंह और एक और बड़ी बहन सुलेखा है।
सबसे छोटी और शायद सबसे लाडली होने के नाते अमृता के जाने से पूरे परिवार में कोहराम मच गया है। माता-पिता के लिए अपने बच्चे को खोने का दर्द दुनिया का सबसे बड़ा दर्द होता है।
कमल सिंह के लिए यह दोहरा सदमा है, एक साल पहले पत्नी को खोया और अब बेटी को।
अमृता के भाई-बहन भी इस खबर से टूट चुके हैं। उनकी आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं।
पूरे घर में सन्नाटा पसरा हुआ है, बस रोने-धोने की आवाजें ही सुनाई दे रही हैं। रिश्तेदार और पड़ोसी परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं, लेकिन इस गहरे दुख को बांटना किसी के बस में नहीं।
एक छोटे से गांव में, जहां हर कोई एक-दूसरे को जानता है, इस घटना ने सबको हिलाकर रख दिया है।
पुलिस की कार्रवाई और जांच जारी
अमृता की खुदकुशी की सूचना मिलते ही स्थानीय टाउन थाना पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और प्रारंभिक जांच-पड़ताल की।
शव को पंखे से उतारकर आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं के लिए सदर अस्पताल भेजा गया। वहां पोस्टमार्टम के बाद शव परिवारजनों को सौंप दिया गया।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, पिता के बयान से यह स्पष्ट है कि यह आत्महत्या का मामला है, लेकिन पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है ताकि किसी भी तरह की शंका की गुंजाइश न रहे।
यह दुखद घटना एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य के महत्व और परिवार में सपोर्ट सिस्टम की जरूरत को उजागर करती है।

