भोजपुर: बिहार के भोजपुर जिले में बुधवार का दिन एक परिवार के लिए ऐसा मनहूस साबित हुआ, जिसकी कल्पना भी उन्होंने नहीं की थी। आरा शहर की तरफ जा रहे सास और दामाद को एक बेलगाम ट्रक ने इस कदर रौंद दिया कि सड़क पर सिर्फ लाशों के लोथड़े बिखर गए। ये हादसा इतना भयावह था कि ट्रक दोनों को करीब 100 मीटर तक घसीटता चला गया। इस दर्दनाक मंजर को देखकर आसपास के लोग सन्न रह गए और फिर देखते ही देखते पूरा इलाका गुस्से से उबल पड़ा।
कहानी शुरू होती है संदेश थाना क्षेत्र के फतेहपुर गांव से, जहां कलावती देवी अपनी बहू पार्वती देवी की चिंता में थीं। पार्वती देवी को आरा के एक निजी अस्पताल में प्रसव हुआ था और वो अभी भी अस्पताल में भर्ती थीं।
अपनी बहू का हालचाल जानने के लिए कलावती देवी ने अपने दामाद फुलेंद्र कुमार से कहा कि वे उन्हें आरा पहुंचा दें। फुलेंद्र भी तुरंत राजी हो गए और अपनी बाइक पर सास कलावती देवी को लेकर आरा की ओर चल पड़े।
उन्हें क्या पता था कि अस्पताल में एक नई जिंदगी देखने की उम्मीद लेकर घर से निकले ये दोनों खुद जिंदगी से हाथ धो बैठेंगे।
फुलेंद्र कुमार और कलावती देवी अपनी बाइक पर आरा-सासाराम स्टेट हाईवे पर नसरतपुर गांव मोड़ के पास पहुंचे ही थे कि अचानक मौत बनकर एक तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों बाइक समेत नीचे गिर पड़े और ट्रक उन्हें घसीटता हुआ करीब 100 मीटर आगे तक ले गया।
मौके पर ही कलावती देवी और फुलेंद्र कुमार ने दम तोड़ दिया। यह मंजर जिसने भी देखा, उसकी रूह कांप उठी।
ट्रक का ड्राइवर इस भयावह घटना को अंजाम देने के बाद ट्रक वहीं छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया।
सड़क पर उतरा लोगों का गुस्सा; 5 घंटे तक जाम
हादसे की खबर जंगल में आग की तरह फैली। नसरतपुर गांव मोड़ पर जब लोगों ने सास और दामाद की क्षत-विक्षत लाशें देखीं तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
इस भयानक दुर्घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने तुरंत हाईवे को जाम कर दिया। उनकी मांग सिर्फ एक थी - मृतकों के परिजनों को तुरंत मुआवजा मिले और लापरवाह ड्राइवर को पकड़ा जाए।
लोगों का यह गुस्सा इतना प्रबल था कि उन्होंने टायर जलाकर सड़क को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया।
देखते ही देखते आरा-सासाराम स्टेट हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सड़क के दोनों ओर गाड़ियों का जाम करीब 5 घंटे तक लगा रहा।
यात्री परेशान, वाहन चालक बेहाल। इस जाम ने पूरे इलाके की रफ्तार थाम दी।
लोगों का कहना था कि प्रशासन की लापरवाही के कारण इस तरह के हादसे होते रहते हैं, और अब वे न्याय के बिना यहां से नहीं हटेंगे। हर चेहरे पर गुस्सा और आंखों में नमी साफ दिख रही थी।
पुलिस की मशक्कत और खुला जाम
जैसे ही जाम और हंगामे की सूचना संदेश थानाध्यक्ष संजीव कुमार तक पहुंची, वे तुरंत अपनी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। स्थिति तनावपूर्ण थी।
पुलिस के जवानों ने पहले लोगों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन गुस्साए ग्रामीण सुनने को तैयार नहीं थे। थानाध्यक्ष संजीव कुमार ने ग्रामीणों से काफी बातचीत की, उन्हें समझाने-बुझाने में घंटों मशक्कत की।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि आरोपी ड्राइवर को जल्द पकड़ा जाएगा और मुआवजे के लिए भी उचित कदम उठाए जाएंगे।
पुलिस की लगातार अपील और आश्वासनों के बाद कहीं जाकर करीब 5 घंटे बाद लोगों का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने सड़क जाम हटा दिया। इसके बाद यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो सका।
पुलिस ने तत्काल प्रभाव से दोनों शवों को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए आरा सदर अस्पताल भेज दिया। ट्रक को भी जब्त कर लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
पीछे छूट गया सूना संसार
इस हादसे ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। मृतक फुलेंद्र कुमार के घर में अब उसकी पत्नी प्रीति कुमारी और एक महीने की नन्ही दुधमुंही बेटी अकेली रह गई है।
जिस बेटी को अभी अपने पिता का प्यार मिलना शुरू ही हुआ था, उसे अब जीवन भर उनकी कमी खलेगी। प्रीति की मांग सूनी हो गई और नन्ही बच्ची के सिर से पिता का साया उठ गया।
फुलेंद्र के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
वहीं, मृतका कलावती देवी के परिवार में भी मातम पसर गया है। उनके दो बेटे ओमकार और ओम प्रकाश, और दो बेटियां प्रति व प्रियंका अब मां के बिना कैसे रहेंगे, यह सोचकर ही हर कोई सिहर रहा है।
जिस बहू के लिए वे अस्पताल जा रही थीं, अब वो अपनी सास और उनके दामाद को खो चुकी है। यह हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि कई जिंदगियों को तबाह कर देने वाली त्रासदी बन गया है।
अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस मामले में न्याय दिला पाता है और इन परिवारों को कितनी राहत मिलती है।

