भोजपुर: बिहार के भोजपुर जिले से एक ऐसी खबर आई है, जिसने पूरे गांव को सन्न कर दिया है। उदवंतनगर गांव में सत्तर साल की उर्मिला देवी अपने घर में झाड़ू लगा रही थीं। रोज़मर्रा का काम था, जिसमें कोई अनहोनी की आहट नहीं थी। लेकिन किसे पता था कि एक साधारण सा स्टैंड फैन उनकी जान का दुश्मन बन जाएगा। झाड़ू लगाते-लगाते जब उन्होंने पंखे को हटाने की कोशिश की, तो वो अचानक उनके ऊपर गिर पड़ा। पल भर में ही उर्मिला देवी को करंट का ज़ोरदार झटका लगा और वो वहीं बेसुध होकर गिर गईं। ये घटना इतनी अचानक हुई कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला।
हादसे के वक्त घर में उर्मिला देवी के अलावा कोई और मौजूद नहीं था। उनके पति, कमल साव, ने बाद में बताया कि उनकी पत्नी अकेले ही घर की सफाई कर रही थीं।
जब पंखा उनके ऊपर गिरा और उन्हें करंट लगा, तो शायद उन्हें मदद के लिए पुकारने का भी मौका नहीं मिला। जब कमल साव घर लौटे तो उन्होंने अपनी पत्नी को ज़मीन पर पड़ा पाया।
उनके हाथ-पैर ठंडे पड़ चुके थे और शरीर में कोई हरकत नहीं थी। यह देख उनके होश उड़ गए।
उन्होंने तुरंत आस-पड़ोस के लोगों को बुलाया और आनन-फानन में उर्मिला देवी को लेकर अस्पताल की ओर भागे।
जिंदगी और मौत के बीच का सफर
कमल साव और गांव के लोग उर्मिला देवी को बचाने की हर मुमकिन कोशिश कर रहे थे। एक ऑटो या किसी और साधन का इंतज़ाम करके उन्हें उदवंतनगर गांव से आरा स्थित अस्पताल की ओर ले जाया गया।
रास्ते भर सबकी यही दुआ थी कि उर्मिला देवी की सांसें चलती रहें, कि शायद अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर उन्हें बचा लें। लेकिन तकदीर को कुछ और ही मंज़ूर था।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही, उर्मिला देवी ने दम तोड़ दिया। जब उन्हें इमरजेंसी वार्ड में ले जाया गया और डॉक्टर ने जांच की, तो सिवाय निराशा के कुछ हाथ नहीं लगा।
डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनते ही कमल साव और उनके साथ आए गांव वालों के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
एक उम्मीद की किरण जो मन में थी, वह भी बुझ गई।
डॉक्टरों ने बताया कि उर्मिला देवी को अस्पताल लाने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। करंट का झटका इतना ज़ोरदार था कि उनके शरीर ने उसे झेल नहीं पाया।
अस्पताल प्रशासन ने भी औपचारिकताओं के बाद शव को परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
घर में पसरा मातम और अधूरी रस्में
उर्मिला देवी की मौत की खबर जब उदवंतनगर गांव पहुंची, तो पूरे घर में कोहराम मच गया। उनके चार बेटियां और एक बेटा है, जो अपनी मां की मौत की खबर सुनकर स्तब्ध रह गए।
जो घर कुछ घंटे पहले तक हंसी-खुशी से भरा था, वो अब मातम और चीख-पुकार में बदल चुका था। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था।
बेटियों को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उनकी मां अब उनके बीच नहीं हैं। बेटे की आँखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
कमल साव, जो कुछ घंटे पहले तक अपनी पत्नी को बचाने की जद्दोजहद में लगे थे, अब पूरी तरह टूट चुके थे। उनके लिए यह पल असहनीय था, एक ऐसा घाव जो शायद कभी न भर पाए।
परिवार ने इस दुखद घड़ी में पोस्टमॉर्टम की लंबी और जटिल प्रक्रिया से बचने का फैसला किया। चूंकि यह एक स्पष्ट दुर्घटना का मामला था और परिवार सदमे में था, उन्होंने बिना पोस्टमॉर्टम कराए ही शव को अस्पताल से घर ले जाने का निर्णय लिया।
यह एक भावनात्मक फैसला था, ताकि वे अपनी मां को शांति से अंतिम विदाई दे सकें और उनके शरीर को और पीड़ा न झेलनी पड़े। गांव के लोग और रिश्तेदार भी उनके घर पहुंचने लगे थे, ताकि इस दुख की घड़ी में परिवार को ढांढस बंधा सकें।
घर के दरवाज़े पर लोगों की भीड़ जमा थी, सबकी आँखों में नमी और मन में उर्मिला देवी की असामयिक मौत का दुख था।
यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि हमारे घरों में इस्तेमाल होने वाले साधारण से उपकरण भी कितनी जानलेवा साबित हो सकते हैं। बिजली के उपकरणों का सही ढंग से रखरखाव और सावधानी बरतना कितना ज़रूरी है, ये इस दर्दनाक हादसे ने साबित कर दिया है।
उदवंतनगर गांव में इस घटना के बाद से ही हर तरफ उदासी का माहौल है। उर्मिला देवी की मौत ने उनके परिवार को एक गहरा सदमा दिया है, जिससे उबरने में उन्हें शायद लंबा वक्त लगेगा।
यह एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं।

