भोजपुर: बिहार के भोजपुर जिले में सोमवार का दिन दो परिवारों के लिए जिंदगी भर का दर्द लेकर आया। सिकरहटा गांव के पास बिहिया-बिहटा हाईवे पर एक तेज रफ्तार इनोवा कार ने बैंक से पैसा निकालकर साइकिल से घर लौट रहे एक रिटायर्ड टीचर और अपना मकान बनवा रहे एक मजदूर को बेरहमी से रौंद दिया। हादसा इतना भयावह था कि दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। सड़क पर बिखरे शवों को देखकर ग्रामीणों का दिल दहल गया और उनका गुस्सा तत्काल भड़क उठा। इनोवा गाड़ी इतनी अनियंत्रित थी कि टक्कर मारने के बाद खुद ही पलट गई और उसका चालक मौका मिलते ही रफूचक्कर हो गया। यह घटना महज एक हादसा नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही और बेलगाम ड्राइविंग का नतीजा मानी जा रही है, जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है।
सुबह का वक्त था, जब हर कोई अपने-अपने काम में मशगूल था। रमजान अली (72), जो जनवरी 2016 में मोआप कला स्थित उर्दू प्राथमिक विद्यालय से रिटायर्ड हुए थे, अपनी साइकिल पर सवार होकर बैंक से पैसे निकालकर अपने गांव सिकरहटा खुर्द लौट रहे थे।
वहीं, गांव का ही जाबिर अंसारी उर्फ मुन्ना (30), एक युवा मजदूर, अपने सपनों का आशियाना बनाने के लिए सड़क किनारे बैठकर काम में जुटा था। किसे पता था कि चंद मिनटों बाद उनकी ये सामान्य सी दिनचर्या एक भयानक त्रासदी में बदल जाएगी।
कैसे हुआ ये दिल दहला देने वाला हादसा?
चश्मदीदों के मुताबिक, सिकरहटा गांव के पास बिहिया-बिहटा हाईवे पर एक तेज रफ्तार इनोवा कार अचानक अनियंत्रित हो गई। गाड़ी ने सबसे पहले रमजान अली की साइकिल को जोरदार टक्कर मारी।
टक्कर इतनी भीषण थी कि रमजान अली सड़क पर गिर पड़े और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। लेकिन हादसे का सिलसिला यहीं नहीं थमा।
इनोवा कार इसके बाद भी संभल नहीं पाई और कुछ दूर जाकर सड़क किनारे अपने मकान के काम में लगे जाबिर अंसारी उर्फ मुन्ना को भी अपनी चपेट में ले लिया। मुन्ना को रौंदते हुए इनोवा कार सड़क किनारे पलट गई।
इस हादसे में मुन्ना की भी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। गाड़ी पलटने के बाद चालक मौका पाकर तुरंत वहां से भाग निकला।
यह पूरी घटना इतनी तेजी से हुई कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला।
परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
हादसे की खबर जैसे ही रमजान अली और जाबिर अंसारी के घरों तक पहुंची, वहां मातम पसर गया। रमजान अली के परिवार में उनकी पत्नी जुलेखा खातून, छह बेटे (अरमान अली, अनवर अली, इरफान अली, सरफराज अली, इमरान अली, मो.
फरहान) और दो बेटियां (संजीदा खातून, अफसरी खातून) हैं। वहीं, जाबिर अंसारी उर्फ मुन्ना, जो नौ भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थे, उनके पीछे उनकी पत्नी सफीना खातून और एक मासूम बेटी सनाया खातून हैं।
दोनों परिवारों में चीख-पुकार मच गई। सदर अस्पताल में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
रमजान अली का बेटा अरमान अली अपने पिता के अचानक चले जाने से सदमे में था, वहीं मुन्ना की पत्नी सफीना खातून अपनी छोटी बेटी के साथ बेसुध पड़ी थीं, उनका सहारा छिन चुका था। मो.
शमशाद आलम ने बताया कि रमजान अली बैंक से पैसा निकालकर घर लौट रहे थे और मुन्ना अपने घर का काम कर रहा था, और दोनों की अकाल मृत्यु हो गई।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा; हाईवे पर 3 घंटे जाम
एक के बाद एक दो जानें जाने से सिकरहटा गांव के लोग उबल पड़े। ग्रामीण तत्काल घटनास्थल पर जमा हो गए और मृतकों के शवों को सड़क पर रखकर बिहिया-बिहटा हाईवे को जाम कर दिया।
उनकी मांग थी कि सड़क पर तुरंत स्पीड ब्रेकर बनाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों, और मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। विरोध प्रदर्शन के कारण दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
करीब तीन घंटे तक यह जाम लगा रहा, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। सूचना मिलने पर थानाध्यक्ष सनोज कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।
उन्होंने लोगों को समझा-बुझाकर और उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर जाम खुलवाया, जिसके बाद ही यातायात सामान्य हो सका। हालांकि, ग्रामीणों का गुस्सा अभी भी शांत नहीं हुआ है और वे न्याय की मांग कर रहे हैं।
इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

