गौतमबुद्ध नगर: कल्पना कीजिए कि कोर्ट ने आदेश दिया, समय सीमा तय हुई, लेकिन काम नहीं हुआ। जब मामला फिर से अदालत पहुँचा, तो इस बार कोई वकील नहीं, बल्कि जिले की डीएम खुद कोर्ट की दहलीज पर खड़ी थीं। गौतमबुद्ध नगर की डीएम मेघा रूपम ने प्रयागराज स्थित हाईकोर्ट में हाजिर होकर अपनी गलती स्वीकार की और बिना किसी शर्त के माफी मांगी। मामला कोर्ट के आदेशों की अनदेखी और ग्रैच्युटी भुगतान के नोटिस पर कार्रवाई न होने से जुड़ा है।
यह पूरा मामला प्रशासनिक लापरवाही और कानूनी पचड़ों के बीच फंसा हुआ था। कोर्ट ने जब पाया कि आदेशों का पालन नहीं हुआ, तो सख्ती दिखाई।
इसके बाद डीएम को खुद कोर्ट में पेश होना पड़ा। उन्होंने अदालत को भरोसा दिलाया कि अब नियत प्रक्रिया का पालन किया जाएगा और जो कमी रही है, उसे जल्द पूरा किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला
इस कानूनी लड़ाई की शुरुआत मैसर्स तिलक एक्सपोर्ट्स नामक कंपनी से हुई। ग्रैच्युटी भुगतान प्राधिकरण ने इस कंपनी के खिलाफ करीब सात लाख रुपये और उस पर लगने वाले ब्याज की वसूली के लिए 13 जून 2024 को एक रिकवरी नोटिस जारी किया था।
मकसद यह था कि कर्मचारियों की ग्रैच्युटी की रकम वसूल की जाए। लेकिन जब प्रशासन इस नोटिस को लागू करने जमीन पर उतरा, तो कहानी में एक ट्विस्ट आया।
राज्य सरकार के अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि जिस पते पर नोटिस भेजा गया था, वहां उस कंपनी का कोई अस्तित्व ही नहीं मिला। जांच में यह बात सामने आई कि मैसर्स तिलक एक्सपोर्ट्स को पहले ही किसी दूसरी कंपनी, जिसका नाम 'उमा मेडिकेयर लिमिटेड' है, उसे बेचा जा चुका था।
प्रशासन की दलील और कोर्ट का रुख
प्रशासन का तर्क यह था कि चूंकि वसूली नोटिस पुरानी कंपनी के नाम पर था और नई कंपनी के नाम पर नहीं, इसलिए वे इसे निष्पादित करने में असमर्थ रहे। लेकिन कोर्ट इस तर्क से संतुष्ट नहीं था, क्योंकि आदेशों की अनदेखी की गई थी।
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की बेंच कर रही थी।
अदालत ने महेंद्र दत्त शर्मा सहित चार अन्य याचिकाकर्ताओं की दलीलों को सुना। इस दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील राधेश्याम द्विवेदी, अपर महाधिवक्ता अशोक मेहता और मुख्य स्थायी अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह ने अपनी-अपनी बात रखी।
लंबी बहस और आदेशों की अवहेलना के बाद, डीएम मेघा रूपम ने अपनी गलती मानते हुए बिना शर्त माफी मांगी और कोर्ट को आश्वस्त किया कि अब कानूनी प्रक्रिया का पालन होगा।

