शाहजहांपुर: यूपी के शाहजहांपुर जिले से एक ऐसी खबर आई है, जिसने पूरे गांव को सन्न कर दिया है। एक परिवार में मातम का ऐसा पहाड़ टूटा है कि सुनकर कलेजा मुंह को आता है। शुक्रवार की रात थी, जब जलालाबाद थाना क्षेत्र के कसारी गांव में हर कोई गहरी नींद में था। लेकिन एक घर के अंदर, 12 साल के नितिन, 11 साल के विवेक, 8 साल के शोभित और उनकी छोटी बहनें आरूषी (5) और संध्या (4) की आंखें अपने माता-पिता को तड़पते हुए देख रही थीं। ये कोई भयानक सपना नहीं था, बल्कि उनके सामने उनके माता-पिता करंट से चिपके हुए अपनी आखिरी सांसें गिन रहे थे। मोबाइल चार्ज करने गए पिता को करंट लगा, तो उन्हें बचाने दौड़ी मां भी उसी करंट की चपेट में आ गईं। 15 मिनट तक बच्चे चिल्लाते रहे, पड़ोसियों ने मदद की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
आधी रात का वक्त, घर में अंधेरा और बिजली के करंट से चिपके माता-पिता। छोटे-छोटे बच्चों के लिए यह नजारा किसी भयावह फिल्म से कम नहीं था।
वो चीख रहे थे, रो रहे थे, लेकिन क्या करते? उनके नन्हे हाथों में इतनी ताकत नहीं थी कि वो अपने मम्मी-पापा को मौत के मुंह से खींच लाएं। पड़ोसियों के आने तक, उस छोटे से कमरे में डर, चीखें और असहायता का एक ऐसा माहौल बन गया था, जिसे शायद वो बच्चे जिंदगीभर नहीं भूल पाएंगे।
गांव में अब बस एक ही बात हो रही है, "ये कैसा हुआ, उन बच्चों का क्या होगा?"
कसारी गांव में रहने वाले अमर सिंह खेती-बाड़ी करके अपने परिवार का पेट पालते थे। मेहनत-मजदूरी करके वो अपने पांचों बच्चों के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करते थे।
उनकी पत्नी कुसुमा देवी (37) घर संभालती थीं और बच्चों की परवरिश में अमर सिंह का हाथ बंटाती थीं। 14 साल पहले दोनों की शादी हुई थी और उनके घर में पांच बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं।
नितिन सबसे बड़ा था, जो अब 12 साल का है। उसके बाद विवेक, शोभित, आरूषी और सबसे छोटी संध्या।
एक हंसता-खेलता परिवार था, जिसमें अचानक से मौत का साया मंडरा गया।
वो मनहूस रात और मोबाइल चार्ज करने का सिलसिला
शुक्रवार का दिन था, जब परिवार के सभी सदस्यों ने रात 10:30 बजे के करीब साथ बैठकर खाना खाया। हमेशा की तरह, घर में हंसी-मजाक का माहौल था।
बड़े बेटे नितिन ने बताया कि खाना खाने के बाद सब लोग अपने-अपने बिस्तर पर सोने चले गए थे। अमर सिंह और कुसुमा देवी अपने कमरे में थे।
रात करीब 12:30 बजे अमर सिंह की नींद खुली। उन्होंने देखा कि उनके मोबाइल की बैटरी कम है और उसे चार्ज पर लगाना जरूरी है।
मोबाइल चार्जिंग के लिए बिजली के बोर्ड के पास गए। रात का अंधेरा था और शायद वो नंगे पैर ही थे।
उन्होंने चार्जर को सॉकेट में लगाने की कोशिश की। शायद किसी को अंदाज़ा भी नहीं था कि एक छोटी सी गलती, या एक अनदेखा खतरा, उनकी जिंदगी का आखिरी पल बन जाएगा।
बिजली बोर्ड के ठीक नीचे ही एक फर्राटा पंखा रखा था, जिसका तार शायद कहीं से छिला हुआ था या उसमें कोई गड़बड़ थी।
नंगे तार से करंट और बचाने की कोशिश
जैसे ही अमर सिंह ने चार्जर लगाने की कोशिश की, उनका पैर गलती से उस फर्राटा पंखे के नंगे तार पर पड़ गया। चूंकि वो नंगे पैर थे, करंट ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।
एक जोरदार झटका लगा और अमर सिंह वहीं करंट से चिपक गए। उनकी चीख शायद इतनी तेज नहीं निकल पाई, लेकिन उनके शरीर की छटपटाहट देख पत्नी कुसुमा देवी की नींद खुल गई।
उन्होंने अपने पति को बिजली के तार से चिपका देखा, तो उनके होश उड़ गए।
एक पल भी सोचे बिना, कुसुमा देवी अपने पति को बचाने के लिए दौड़ीं। शायद ममता और प्यार ने उन्हें सोचने का मौका ही नहीं दिया कि आगे क्या हो सकता है।
उन्होंने जैसे ही अमर सिंह को छुआ, करंट ने उन्हें भी अपनी चपेट में ले लिया। अब पति और पत्नी दोनों एक साथ करंट से चिपके हुए थे, छटपटा रहे थे।
कमरे में अब अमर सिंह की चीखों के साथ कुसुमा देवी की भी दर्दभरी आवाजें गूंज रही थीं।
बच्चों की आंखों के सामने मौत का खेल
अमर सिंह और कुसुमा देवी की चीख-पुकार सुनकर सबसे बड़े बेटे नितिन की नींद टूट गई। वो भागा-भागा अपने छोटे भाई विवेक के साथ माता-पिता के कमरे में पहुंचा।
जो नजारा उन्होंने देखा, वो किसी पत्थर को भी पिघला दे। उनके मम्मी-पापा बिजली के करंट से चिपके हुए तड़प रहे थे।
दोनों भाई वहीं खड़े होकर चिल्लाने लगे, "मम्मी, पापा!" उनकी आवाज सुनकर बाकी छोटे बच्चे भी जाग गए और कमरे में पहुंच गए। अपनी आंखों के सामने अपने माता-पिता को ऐसे तड़पता देख, बच्चों की चीखें निकल गईं।
बच्चे मदद के लिए चिल्ला रहे थे, "कोई बचाओ! मम्मी-पापा को बचाओ!" उनकी चीख-पुकार सुनकर पड़ोसियों की नींद खुली। लोग भागे-भागे अमर सिंह के घर पहुंचे।
अंदर का नजारा देख सब सकते में आ गए। किसी तरह पड़ोसियों ने हिम्मत कर घर का मेन बिजली बोर्ड ढूंढा और MCB (मिनिएचर सर्किट ब्रेकर) गिराकर बिजली की सप्लाई बंद की।
बिजली बंद होते ही अमर सिंह और कुसुमा देवी को करंट से अलग किया गया। लेकिन तब तक 15 मिनट से ज्यादा का वक्त बीत चुका था।
अस्पताल पहुंचे, पर जिंदगी नहीं बची
बिजली की सप्लाई बंद होते ही पड़ोसियों ने तुरंत अमर सिंह और कुसुमा देवी को पास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया। उम्मीद थी कि शायद जिंदगी की डोर अभी बची हो, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया।
ये खबर सुनते ही अस्पताल में मौजूद परिजनों और पड़ोसियों में कोहराम मच गया। जिन पांच मासूम बच्चों ने अभी कुछ देर पहले अपने माता-पिता को तड़पते देखा था, उनके सिर से हमेशा के लिए मां-बाप का साया उठ गया।
पूरा गांव इस घटना से स्तब्ध है। देर रात तक सीएचसी के बाहर परिजनों और गांव वालों की भीड़ लगी रही।
किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि एक मामूली से मोबाइल चार्ज करने और पंखे के तार की वजह से एक पूरा परिवार उजड़ गया। अब सवाल यह है कि इन पांचों मासूम बच्चों का क्या होगा, जिनकी उम्र अभी इतनी भी नहीं कि वे अपने माता-पिता की मौत का मतलब समझ सकें।
पुलिस की कार्रवाई और गांव में मातम
घटना की जानकारी मिलते ही जलालाबाद थाना पुलिस मौके पर पहुंची। थाना प्रभारी अरविंद सिंह चौहान ने बताया कि फर्राटा पंखे में करंट आने से पति-पत्नी की मौत हुई है।
पुलिस ने दोनों शवों का पंचनामा भरवाया और फिर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, ताकि घटना के सही कारणों का पता चल सके और कोई अन्य पहलू सामने न आए।
हालांकि, शुरुआती जांच में यह एक सामान्य हादसा ही लग रहा है।
अमर सिंह और कुसुमा देवी की मौत से कसारी गांव में गहरा शोक छा गया है। जिन बच्चों के माता-पिता हर शाम उनकी कहानियों का सहारा होते थे, अब वे अनाथ हो गए हैं।
परिवार में कोहराम मचा है और गांव का हर शख्स इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़ा है। यह घटना एक बार फिर बिजली के उपकरणों के इस्तेमाल में सावधानी बरतने की अहमियत को रेखांकित करती है, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही कभी-कभी कितनी बड़ी कीमत वसूल लेती है।

