पलामू: झारखंड के पलामू से एक ऐसी दिल दहला देने वाली खबर आई है, जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। पड़वा प्रखंड के सिक्का गांव में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए थे, लेकिन अब शुरुआती जांच रिपोर्ट में जो खुलासा हुआ है, वो सुनकर आप चौंक जाएंगे। जिस सरसों के तेल को हम अपने खाने का अभिन्न हिस्सा मानते हैं, वही इस परिवार के लिए मौत का पैगाम बन गया। रिपोर्ट बताती है कि इस तेल में ‘आर्गेमोन’ नाम का एक खतरनाक ज़हर मिला था, जिसने धीरे-धीरे पूरे परिवार को अपनी चपेट में ले लिया।
मामला पिछले कुछ हफ्तों से चर्चा का विषय बना हुआ था। एक के बाद एक परिवार के लोग बीमार पड़े और अपनी जान गंवाते चले गए।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें, स्थानीय प्रशासन, सब इस गुत्थी को सुलझाने में लगे थे कि आखिर इस गरीब परिवार पर ऐसा क्या कहर टूटा है। अब जाकर रांची के नामकुम स्थित राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच ने इस दुखद रहस्य से पर्दा उठाया है।
यह पता चला है कि घर में ही निकाला गया सरसों का तेल, जिसमें जहरीले ‘आर्गेमोन’ के बीज मिल गए थे, इस त्रासदी का मुख्य कारण था। ये आर्गेमोन बीज, जिसे स्थानीय भाषा में 'कटेली' भी कहते हैं, सरसों की फसल के साथ उगने वाला एक खरपतवार है।
आशंका है कि कटाई या तेल निकालने के दौरान ये जहरीले बीज सरसों के दानों में मिल गए, जिससे तेल जानलेवा बन गया।
जांच रिपोर्ट ने खोले कई गंभीर राज
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, जिन लोगों की मौत हुई, उनमें कुछ बेहद गंभीर लक्षण देखे गए थे। इसमें गंभीर एनीमिया यानी खून की भारी कमी (हीमोग्लोबिन 5 ग्राम से भी कम), एक्यूट किडनी इंजरी यानी किडनी को अचानक और गंभीर नुकसान, और साथ ही खून की उल्टी व दस्त जैसे लक्षण शामिल थे।
स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि ये सभी लक्षण 'आर्गेमोन विषाक्तता' से सीधे मेल खाते हैं, जो आर्गेमोन के सेवन से होने वाली बीमारी है।
परिवार में लगातार हो रही मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष टीम ने 22 से 30 जून के बीच सिक्का गांव का दौरा किया और घर-घर जाकर सर्वे किया। इसी सर्वे के दौरान यह जानकारी सामने आई कि यह परिवार आर्थिक रूप से काफी कमज़ोर था।
वे अपने खेत में उगाई गई सरसों से ही घर पर तेल निकलवाते थे और उसी का इस्तेमाल करते थे। टीम ने पाया कि उनके खेत में बड़ी मात्रा में आर्गेमोन मेक्सिकाना (कटेली) नामक जहरीला खरपतवार उगा हुआ था।
इसी खरपतवार के बीज सरसों के दानों में मिल गए, और यही घातक मिश्रण उनके भोजन का हिस्सा बन गया।
राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला ने 2 जुलाई को जिस सरसों के तेल के नमूने की जांच की, उसमें आर्गेमोन तेल की मौजूदगी की पुष्टि हो गई है। प्रयोगशाला ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा है कि यह नमूना खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के तहत निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं है और इसे 'असुरक्षित खाद्य पदार्थ' घोषित किया गया है।
हालांकि, इस मामले में अन्य रासायनिक जांच की अंतिम रिपोर्ट और मृतकों के विसरा परीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट का अभी इंतजार है, जिससे मामले की और गहरी परतें खुलेंगी।
रिम्स में भर्ती सदस्य का बयान और उसकी हालत
इस परिवार की त्रासदी यहीं खत्म नहीं हुई। सिक्का गांव के इस पीड़ित परिवार की छठी सदस्य लाखो देवी और सातवें सदस्य सुनील मेहता का इलाज फिलहाल रांची के रिम्स अस्पताल में चल रहा है।
अस्पताल में भर्ती सुनील मेहता ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि जब तक घर में सरसों का तेल पेरवाया गया था, तब तक वह कमाने के लिए घर से बाहर गए हुए थे।
सुनील ने दावा किया कि उन्होंने उस सरसों के तेल का सेवन नहीं किया था, जिसका नमूना अब जांच के लिए लिया गया है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि सुनील भी पिछले एक सप्ताह से बीमार हैं और उनमें भी परिवार के अन्य सदस्यों जैसे ही लक्षण दिखाई दे रहे हैं।
डॉक्टरों की टीम उनकी गहन निगरानी कर रही है और उनके स्वास्थ्य को स्थिर करने की कोशिशें जारी हैं। सुनील की यह बात मामले को और भी उलझा देती है, और यह सवाल खड़ा करती है कि अगर उन्होंने वह तेल नहीं खाया तो उनकी बीमारी का क्या कारण है, या फिर आर्गेमोन के सेवन का कोई और तरीका भी हो सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की अहम सिफारिशें
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत एहतियाती कदम उठाने की सिफारिश की है। विभाग ने प्रभावित सिक्का गांव में घर पर निकाले गए सरसों के तेल की बिक्री और उसके सेवन पर तत्काल रोक लगाने की सलाह दी है।
यह एक महत्वपूर्ण कदम है ताकि गांव के अन्य लोग इस जहरीले तेल के सेवन से बच सकें।
इसके साथ ही, पूरे गांव के लोगों की सामूहिक स्वास्थ्य जांच कराने की भी अनुशंसा की गई है। इसका मकसद यह है कि अगर किसी और व्यक्ति में आर्गेमोन विषाक्तता के शुरुआती लक्षण मिलें, तो समय रहते उनका इलाज शुरू किया जा सके और किसी और जान को जाने से रोका जा सके।
विभाग ने स्थानीय प्रशासन को भी निर्देश दिया है कि वे दूषित तेल के इस्तेमाल से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करें और इस बारे में सही जानकारी उन तक पहुंचाएं।
इतना ही नहीं, इस समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए कृषि विभाग को भी एक विशेष अभियान चलाने की सिफारिश की गई है। कृषि विभाग से कहा गया है कि वे सरसों की फसलों में उगने वाले कटेली जैसे जहरीले खरपतवार को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाएं।
यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि भविष्य में ऐसी दुखद घटना दोबारा न हो और किसानों को इन जहरीले खरपतवारों से निपटने के सही तरीकों के बारे में जागरूक किया जा सके। इस पूरे मामले पर प्रशासन की पैनी नज़र है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है, ताकि पूरे घटनाक्रम को स्पष्टता मिल सके।

