अयोध्या: उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में आजकल किसान आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं। उनका दिल बैठा जा रहा है क्योंकि मॉनसून तो आ गया, लेकिन अपनी पूरी रंगत में नहीं। खेतों में धान की फसल सूखने की कगार पर है और किसानों की उम्मीदें धुंधली पड़ती जा रही हैं। जिस मॉनसून का इंतज़ार किसान जून के दूसरे-तीसरे हफ्ते से करते हैं, वो इस बार देर से आया और ऊपर से रूठ गया। एक हल्की सी बारिश के बाद बादलों ने ऐसा मुंह मोड़ा कि अब तक अच्छी बौछार नसीब नहीं हुई। किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं, क्योंकि उनकी खरीफ की फसल, खासकर धान, अब पानी के लिए तरस रही है।
लेकिन, इस निराशा के बीच एक उम्मीद की किरण भी जगी है। मौसम वैज्ञानिकों ने भविष्यवाणी की है कि रविवार से मंगलवार के बीच अयोध्या जिले में अच्छी बारिश हो सकती है।
अनुमान है कि इन तीन दिनों में हर दिन करीब 30 मिलीमीटर तक वर्षा होगी, जो किसानों के लिए अमृत समान होगी। अगर यह भविष्यवाणी सच होती है, तो यह अयोध्या के किसानों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं होगा, जो अब तक सूखे की मार झेल रहे हैं।
मॉनसून का बेरुखा अंदाज़ और अल नीनो का खेल
अयोध्या में मॉनसून ने सरकारी कागजों में तो 1 जुलाई को एंट्री मार ली थी। पहले ही दिन बादलों ने थोड़ी मेहरबानी दिखाते हुए लगभग 20 मिलीमीटर बारिश दर्ज की, जिससे किसानों को लगा कि अब तो बस काम बन गया।
लेकिन यह खुशी चंद घंटों की ही रही। उस हल्की बारिश के बाद, बादलों ने जैसे रूठना ही तय कर लिया था।
अमूमन अयोध्या में मॉनसून 20 से 22 जून के बीच दस्तक दे देता है, लेकिन इस बार अल नीनो के अजीबोगरीब खेल ने सब कुछ बिगाड़ दिया। अल नीनो एक ऐसी समुद्री घटना है जो दुनिया भर के मौसम पर असर डालती है, और इस बार इसका असर भारत के मॉनसून पर भी पड़ा है, जिससे मॉनसून देरी से आया और अपनी पूरी ताकत नहीं दिखा पा रहा है।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज के मौसम वैज्ञानिक डॉ. सीताराम मिश्र ने इस पूरी स्थिति पर रोशनी डाली।
उन्होंने बताया कि अल नीनो के असर से वातावरण में जितनी नमी होनी चाहिए, वो है ही नहीं। जब हवा में पर्याप्त नमी नहीं होती, तो बादल ठीक से बन ही नहीं पाते।
और जब बादल नहीं बनते, तो अच्छी बारिश कैसे होगी? यही वजह है कि मॉनसून के आने के बावजूद अयोध्या में अच्छी बारिश नहीं हो पा रही है। डॉ.
मिश्र ने अपनी बात में आगे कहा कि अगले तीन दिनों में मौसम की स्थिति अनुकूल होने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे जिले में अच्छी वर्षा होने की पूरी संभावना है। यह बात सुनकर किसानों के मुरझाए चेहरों पर थोड़ी चमक ज़रूर आई है।
धान की सूखती उम्मीदें: किसानों का दर्द
बारिश की कमी का सीधा असर किसानों की जेब और उनकी मेहनत पर पड़ रहा है। धान की फसल बोने का समय निकल रहा है और खेत सूखे पड़े हैं।
कई किसानों ने तो जैसे-तैसे थोड़ी बहुत बुवाई कर भी दी है, लेकिन पानी के अभाव में उनके पौधे दम तोड़ रहे हैं। एक किसान, रमेश सिंह ने बताया, “हमने कर्ज लेकर खाद-बीज का इंतजाम किया था, सोचा था इस बार अच्छी फसल होगी, लेकिन मॉनसून ने धोखा दे दिया।
अगर अब भी पानी नहीं गिरा तो हमारी सारी मेहनत और पैसा बर्बाद हो जाएगा।” ऐसे दर्जनों किसान हैं जिनकी हालत रमेश जैसी ही है।
उनकी आँखें हर पल आसमान की ओर लगी रहती हैं, बस एक काले बादल और तेज बारिश की उम्मीद में।
कृषि विश्वविद्यालय की मौसम वेधशाला के आंकड़ों पर गौर करें तो, शनिवार का अधिकतम तापमान 36.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.
0 डिग्री ज्यादा था। न्यूनतम तापमान 27.
0 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.5 डिग्री अधिक है।
दिन में गर्मी बनी हुई है और नमी की कमी भी साफ दिख रही है। अधिकतम सापेक्षिक आर्द्रता 84 प्रतिशत और न्यूनतम 62 प्रतिशत दर्ज की गई।
हवा दक्षिण-पूर्वी दिशा से 2.8 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली, जो यह बताती है कि कोई बड़ा मौसमी बदलाव नहीं आ रहा था।
कुमारगंज क्षेत्र में तो बीते 24 घंटे के दौरान वर्षा शून्य मिलीमीटर दर्ज की गई, यानी एक बूंद भी नहीं गिरी। यह आंकड़े किसानों की चिंता को और बढ़ा देते हैं।
उम्मीद की बूंदे: राहत का इंतज़ार
मौसम विभाग का ताजा पूर्वानुमान पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए थोड़ी राहत लेकर आया है। आगामी 24 घंटों में मध्यम बादल छाए रहने के साथ हल्की वर्षा होने की संभावना है।
लेकिन असली खुशी की खबर रविवार से मंगलवार तक के लिए है। इस दौरान बारिश की गतिविधियां तेज होने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे न केवल मौसम सुहावना होगा, बल्कि किसानों को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
30 मिलीमीटर प्रतिदिन की बारिश धान और अन्य खरीफ फसलों के लिए पर्याप्त मानी जाती है। यह न सिर्फ खेत को पानी देगी बल्कि जमीन में नमी भी बनाएगी, जिससे पौधों को फिर से जान मिल सकेगी।
किसान अब बस घड़ी की सूई देख रहे हैं, कि कब वो शुभ घड़ी आए जब आसमान से अमृत बरसे और उनकी सूखी फसलों को जीवनदान मिले। उम्मीद है कि यह पूर्वानुमान सही साबित होगा और अयोध्या के किसान इस बार सूखे की मार से बच निकलेंगे।

