मुंबई: बॉलीवुड की चमक-धमक देखकर लगता है कि यहाँ सब कुछ आसान है, लेकिन हकीकत में हर चमकते सितारे के पीछे संघर्षों की एक लंबी कहानी छिपी होती है। एक ऐसा लड़का, जिसने अपने बचपन में ही फिल्मों का सपना देखा था, लेकिन जब इस दुनिया में कदम रखा तो उसे शुरुआती दौर में कई बार ठुकराया गया। यहां तक कि उसे कास्टिंग काउच जैसे कड़वे अनुभवों से भी दो-चार होना पड़ा। एक वाकया तो ऐसा है कि काम की तलाश में जब वो एक प्रोड्यूसर के घर अपना पोर्टफोलियो लेकर पहुँचा, तो प्रोड्यूसर ने उसके पीछे कुत्ता ही छोड़ दिया था।
लेकिन ये कहानी यहीं खत्म नहीं होती। वही लड़का आज भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े और जिंदादिल सुपरस्टार्स में से एक है।
उसने अपनी दमदार एक्टिंग से 'धुरंधर', 'धुरंधर 2', 'पद्मावत' और 'बाजीराव मस्तानी' जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं और लाखों दिलों पर राज करता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं रणवीर सिंह की।
उनके जन्मदिन के इस खास मौके पर आइए, उनकी ज़िंदगी के कुछ ऐसे दिलचस्प किस्सों को करीब से जानते हैं, जो शायद आपने पहले कभी न सुने हों।
सपनों की उड़ान और कड़वी हकीकत
फिल्मी पर्दे पर आने से पहले, रणवीर सिंह ने O&M जैसी बड़ी और मशहूर विज्ञापन एजेंसी में कॉपीराइटर के तौर पर काम किया था। लेकिन उनके दिल में तो हीरो बनने का ही जुनून सवार था।
उनका फिल्मों में आने का सफर आसान नहीं रहा। रणवीर ने खुद कई इंटरव्यू में बताया है कि उन्हें शुरुआती दिनों में कई रिजेक्शन झेलने पड़े।
ऑडिशन में नाकामी, लुक्स पर टिप्पणियाँ और काम पाने के लिए संघर्ष, ये सब उनकी यात्रा का हिस्सा रहे हैं।
इतना ही नहीं, उन्हें इंडस्ट्री के डार्क साइड यानी कास्टिंग काउच का भी सामना करना पड़ा। रणवीर ने खुद इस बारे में खुलकर बात की है कि कैसे उन्हें कुछ लोगों ने गलत प्रस्ताव दिए और उन्हें बड़ी मुश्किल से इन परिस्थितियों से बाहर निकलना पड़ा।
उस दौर में जब वो स्ट्रगल कर रहे थे, एक बार काम की तलाश में अपना पोर्टफोलियो लेकर एक प्रोड्यूसर के घर पहुंचे। उन्हें लगा कि शायद यहां कुछ बात बन जाए, लेकिन उस प्रोड्यूसर ने उनके पीछे कुत्ता छोड़ दिया।
यह घटना किसी भी aspiring एक्टर के लिए कितनी disheartening हो सकती है, इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। पर रणवीर ने हार नहीं मानी और आज वो सबके सामने हैं।
क्रिकेटर बनने का सपना और अमरनाथ सर का फैसला
आज भले ही रणवीर सिंह को हम फिल्मों में देखते हैं, लेकिन एक समय ऐसा था जब उन्होंने क्रिकेटर बनने का सपना देखा था। ये तब की बात है जब वो सातवीं क्लास में थे।
एक स्कूल मैच में उन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 46 गेंदों पर धुआंधार 71 रन बना डाले थे। इस जोरदार पारी के बाद उन्हें लगा कि बस, अब तो क्रिकेटर ही बनना है!
अपने दोस्तों के साथ उन्होंने पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहिंदर अमरनाथ की क्रिकेट अकादमी में ट्रायल देने का मन बनाया। रणवीर ने 2017 में अपनी फिल्म '83' के एक इवेंट में यह किस्सा सुनाया था।
उन्होंने बताया, “मेरे दोस्त क्रिकेट को लेकर बहुत सीरियस थे और समय पर पहुंच गए थे, लेकिन मैं थोड़ा लेट हो गया। अमरनाथ सर पिच के पास खड़े थे।
उन्होंने मुझे देर से आने और फिर मेरा खेल देखने के बाद रिजेक्ट कर दिया। उन्होंने उस दिन मुझे रिजेक्ट करके बिल्कुल सही फैसला किया था, वरना आज मैं एक एक्टर के रूप में यहां नहीं बैठा होता।
” इस घटना के बाद रणवीर का क्रिकेटर बनने का सपना तो टूट गया, लेकिन एक एक्टर बनने की राह यहीं से शुरू हुई। दिलचस्प बात ये है कि 2021 में आई फिल्म '83' में रणवीर सिंह ने ही पूर्व कप्तान कपिल देव की भूमिका निभाई थी, जिसने उनके क्रिकेट कनेक्शन को फिर से मजबूत किया।
दादी चांद बर्क: अभिनय की विरासत
रणवीर सिंह को एक्टिंग का कीड़ा कहां से लगा, इसकी जड़ें उनके परिवार में ही हैं। उनकी दादी चांद बर्क 1950 और 1960 के दशक की एक जानी-मानी अभिनेत्री थीं।
उन्होंने राज कपूर की मशहूर फिल्म 'बूट पॉलिश' से हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाई थी। चांद बर्क ने नरगिस, राज कपूर समेत कई बड़े सितारों के साथ काम किया था।
'बसंत बहार', 'सोहनी महिवाल', 'लाजवंती', 'अदालत' और 'दुश्मन' जैसी कई और फिल्मों में भी उन्होंने अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरा था।
सिमी ग्रेवाल को दिए एक इंटरव्यू में रणवीर सिंह ने बताया था कि उनके अंदर सबसे पहले एक्टर बनने का सपना उनकी दादी ने ही जगाया था। उन्होंने कहा था कि उनके भीतर अभिनय का कीड़ा डालने वाली सबसे पहली शख्सियत उनकी दादी ही थीं।
यह बेहद दुखद रहा कि रणवीर के फिल्मों में डेब्यू से पहले ही उनकी दादी चांद बर्क का 28 दिसंबर 2008 को निधन हो गया। वो अपने पोते को बड़े पर्दे पर एक सुपरस्टार बनते नहीं देख पाईं, लेकिन उनकी विरासत रणवीर के जरिए आज भी जीवित है।
'छैंया-छैंया' की धुन पर स्कूल में सस्पेंशन
साल 1998 में जब शाहरुख खान की फिल्म 'दिल से' रिलीज हुई थी, तो उसका सुपरहिट गाना 'छैंया-छैंया' हर किसी की जुबान पर था। उस समय रणवीर सिंह करीब 13 साल के थे और स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे।
शाहरुख खान के जबरदस्त फैन रहे रणवीर पर इस गाने का ऐसा जादू चढ़ा कि वो खुद को इसे सुनने से रोक ही नहीं पाए।
एक दिन रणवीर क्लासरूम में चुपके से अपने वॉकमैन पर 'छैंया-छैंया' सुन रहे थे। वो पूरी तरह गाने में खोए हुए थे और धुनों पर झूम रहे थे।
लेकिन उनकी यह शरारत ज्यादा देर तक छिप नहीं सकी। तभी उनकी टीचर ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया।
क्लास में पढ़ाई के दौरान गाना सुनना स्कूल के नियमों के खिलाफ था और अनुशासन तोड़ने के इस आरोप में स्कूल प्रशासन ने रणवीर को सस्पेंड कर दिया था। ये दिखाता है कि बचपन से ही रणवीर कितने बिंदास और अपनी धुन के पक्के रहे हैं, चाहे वो स्कूल के नियम तोड़ना हो या फिर अपने सपनों को पूरा करना हो।
उनका सफर संघर्षों, प्रेरणा और जुनून से भरा रहा है, जिसने उन्हें आज बॉलीवुड का 'रणवीर सिंह' बनाया है।




































