लंदन: क्या आपने कभी गौर किया है कि आपका पसंदीदा पुराना गाना जब किसी नए सिस्टम पर बजता है, तो अचानक कुछ ऐसी आवाजें सुनाई देती हैं जिन्हें आपने सालों तक मिस किया? जी हां, यह कोई जादू नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी का कमाल है। जब हम किसी गाने को बार-बार सुनते हैं, तो हमें लगता है कि हमें उसकी हर बारीकी पता है, लेकिन असल में हम सिर्फ उतना ही सुनते हैं जितना कि स्टीरियो साउंड हमें सुना पाता है।
मशहूर बैंड 'डायरेक्ट स्ट्रेट्स' (Dire Straits) के कीबोर्डिस्ट और प्रोड्यूसर गाइ फ्लेचर ने हाल ही में एक बहुत ही दिलचस्प बात साझा की है। उन्होंने बताया कि जब पुराने गानों को 'डॉल्बी एटमॉस' (Dolby Atmos) के जरिए री-मिक्स किया जाता है, तो वह सिर्फ आवाज को साफ नहीं करता, बल्कि उन यादों को भी जिंदा कर देता है जो सालों से कहीं दबी हुई थीं।
फ्लेचर का कहना है कि यह अनुभव किसी नशे की तरह है। जब वह ओरिजिनल रिकॉर्डिंग सेशन्स को इमर्सिव मिक्सिंग के जरिए दोबारा सुनते हैं, तो वह काफी इमोशनल हो जाते हैं।
उनके मुताबिक, 3D ऑडियो उन बारीकियों को बाहर निकाल लाता है जो स्टीरियो इंजीनियरिंग के चक्कर में कहीं खो गई थीं।
स्टीरियो और एटमॉस में आखिर फर्क क्या है?
बता दें कि दुनिया के ज्यादातर गाने 'स्टीरियो' फॉर्मेट को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं। फ्लेचर मानते हैं कि स्टीरियो आज भी एक शानदार फॉर्मेट है, लेकिन इसकी एक सीमा है।
जब आप किसी रिकॉर्ड को स्टीरियो के लिए तैयार करते हैं, तो आपको कई फैसले लेने पड़ते हैं। इस प्रक्रिया में कुछ छोटी-छोटी आवाजें और डिटेल्स 'कुर्बान' कर दी जाती हैं ताकि मुख्य धुन उभर कर आए।
अब जब उन्हीं पुराने गानों को डॉल्बी एटमॉस में बदला जाता है, तो वे छोटी-छोटी चीजें, जिन्हें किसी ने नोटिस नहीं किया था, अचानक सामने आ जाती हैं। यह वैसा ही है जैसे किसी पुरानी धुंधली तस्वीर को हाई-डेफिनेशन में देखना।
क्या यह सिर्फ आवाज का खेल है या भावनाओं का?
गाइ फ्लेचर का दावा है कि स्टीरियो रिकॉर्ड को थ्री-डायमेंशनल बनाना सिर्फ आवाज को एक जैसा करने के बारे में नहीं है। उनका कहना है कि असली मकसद उस 'इमोशनल इम्पैक्ट' को मैच करना है।
मतलब, यह इस बारे में नहीं है कि आप क्या सुन रहे हैं, बल्कि इस बारे में है कि आप क्या महसूस कर रहे हैं।
इस पूरी प्रक्रिया को समझने के लिए हम इसकी तुलना वीडियो गेम्स से कर सकते हैं। अक्सर जब हम बचपन के पुराने गेम्स दोबारा खेलते हैं, तो उनके ग्राफिक्स बहुत खराब लगते हैं, लेकिन हमारी यादों में वे एकदम असली और शानदार थे।
जब उन्हीं गेम्स को 'रीमास्टर' किया जाता है और उनकी विजुअल क्वालिटी बढ़ाई जाती है, तो हमें वही अनुभव मिलता है जो हमारी यादों में था, न कि वह जो असल में स्क्रीन पर दिख रहा था।
स्पेशियल ऑडियो (Spatial Audio) भी बिल्कुल यही काम कर रहा है। यह रिकॉर्डिंग के उन हिस्सों को वापस ले आता है जो स्टीरियो मिक्सिंग के दौरान दब गए थे।
कुल मिलाकर, यह टेक्नोलॉजी म्यूजिक लवर्स और खुद उन म्यूजिकियंस के लिए एक खुलासा है जिन्होंने उन गानों को बनाया था।
फ्लेचर के अनुसार, यह अनुभव इतना गहरा है कि सुनते समय रोंगटे खड़े हो जाते हैं। यह सिर्फ एक टेक्निकल अपग्रेड नहीं है, बल्कि उन खोए हुए एलिमेंट्स को वापस पाने का जरिया है जो सालों पहले रिकॉर्डिंग स्टूडियो की फाइलों में कहीं दब गए थे।


































