जौनपुर: उत्तर प्रदेश के जौनपुर में सोमवार का दिन पुलिस महकमे के लिए थोड़ा भारी रहा। आम तौर पर न्याय दिलाने की उम्मीद में लोग पुलिस के दफ्तरों का रुख करते हैं, लेकिन जब खुद न्याय के पैरोकार, यानी वकील, पुलिस पर ही रिश्वतखोरी का इल्जाम लगाकर धरने पर बैठ जाएं, तो बात कुछ अलग ही हो जाती है। ठीक ऐसा ही नजारा जौनपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पर दिखा, जहां बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने बक्शा थाना पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया।
कलेक्ट्रेट अधिवक्ता संघ के झंडे तले जमा हुए इन वकीलों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उनके आरोप सिर्फ छोटे-मोटे नहीं थे, बल्कि सीधे-सीधे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे थे।
वकीलों का कहना था कि बक्शा थाना क्षेत्र में पुलिस 'पैसे लेकर मुकदमे दर्ज' कर रही है। ये कोई हल्की-फुल्की शिकायत नहीं है, बल्कि उस भरोसे की नींव पर चोट है, जिस पर पूरा पुलिस तंत्र टिका होता है, और यही बात अधिवक्ताओं को नागवार गुज़री।
सोमवार की सुबह करीब दस बजे, वकील पूरी तैयारी के साथ एसपी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने आते ही पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी और सबसे पहले एसपी कार्यालय के मुख्य गेट को ही बंद कर दिया।
इस अचानक हुए कदम से कुछ देर के लिए तो परिसर में आने-जाने वालों की आवाजाही थम सी गई। मानो वकील दिखाना चाहते थे कि ये विरोध सिर्फ बातों का नहीं, बल्कि सीधा एक्शन का है, ताकि उनकी बात को गंभीरता से लिया जाए।
वकीलों के बक्शा थाना पुलिस पर क्या हैं आरोप?
प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं की अगुवाई कर रहे थे कलेक्ट्रेट अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष घनश्याम सिंह। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बक्शा थाना पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई करने की अपनी बुनियादी जिम्मेदारी भूल चुकी है।
उनके मुताबिक, पुलिस अपनी मर्जी से और पैसों की लालच में मनमाने ढंग से एफआईआर दर्ज कर रही है। मतलब, अगर आप पीड़ित हैं और आपकी जेब में दम नहीं, तो शायद आपका मुकदमा दर्ज ही न हो।
और अगर कोई गलत आदमी है, पैसे वाला है, तो उसके कहने पर किसी निर्दोष के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हो सकती है। यह न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है।
अधिवक्ताओं का दावा था कि पुलिस के इस रवैये से आम जनता का पुलिस व्यवस्था से भरोसा उठ रहा है। न्याय पाने की उम्मीद लिए लोग जब थाने जाते हैं और उन्हें पैसों के लिए टरकाया जाता है या गलत एफआईआर दर्ज होती है, तो उनकी आस्था डगमगा जाती है।
ये सिर्फ एक थाने का मामला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की साख पर सवालिया निशान लगाता है। उन्होंने कहा कि पुलिस का काम पीड़ितों को न्याय दिलाना है, न कि पैसे वालों के लिए काम करना।
वकीलों ने साफ मांग रखी कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी पुलिसकर्मी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
पुलिस अधिकारियों का दखल और दिए गए आश्वासन
करीब एक घंटे तक एसपी कार्यालय के गेट पर गहमा-गहमी और नारेबाजी का माहौल रहा। जिले के आला पुलिस अधिकारियों को जब इस विरोध प्रदर्शन की सूचना मिली, तो वे तुरंत हरकत में आए।
अपर पुलिस अधीक्षक (शहर) आयुष श्रीवास्तव, अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) आतिश सिंह और क्षेत्राधिकारी (शहर) गोल्डी गुप्ता जैसे बड़े अधिकारी फौरन मौके पर पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं से सीधे बातचीत शुरू की और उन्हें शांत करने का प्रयास किया।
पुलिस अधिकारियों ने वकीलों की शिकायतों को गौर से सुना। उन्होंने वकीलों को आश्वासन दिया कि उनकी सभी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने वकीलों को भरोसा दिलाया कि किसी भी तरह की धांधली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आम लोगों का पुलिस पर भरोसा कायम रहे, इसके लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने वकीलों से अपील की कि वे अपना धरना समाप्त करें और पुलिस को जांच करने का मौका दें।
धरना स्थगित; दोषियों पर कार्रवाई न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी
पुलिस अधिकारियों से मिले इस ठोस आश्वासन के बाद, अधिवक्ताओं ने अपना धरना-प्रदर्शन फिलहाल स्थगित कर दिया। एसपी कार्यालय का मुख्य गेट फिर से खोल दिया गया और परिसर में आवाजाही सामान्य हो गई।
लेकिन, ये स्थगन सिर्फ एक विराम था, पूर्ण विराम नहीं। अधिवक्ताओं ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनके आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं की गई और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे।
उन्होंने कहा कि उनका ये आंदोलन सिर्फ स्थगित हुआ है और जरूरत पड़ने पर वे इसे और भी व्यापक रूप देंगे, ताकि न्याय की जीत हो सके और पुलिस अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से निभाए। जौनपुर के इस मामले ने एक बार फिर पुलिस और जनता के बीच भरोसे के सवाल को सामने ला दिया है, जिस पर आगे की कार्रवाई तय करेगी कि आने वाले दिनों में क्या होता है।

