लखनऊ: भयंकर वाली गर्मी की छुट्टी खत्म हुई और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बार फिर स्कूलों की घंटियाँ बज उठी हैं। पूरे डेढ़ महीने बाद, 1 जुलाई से शहर के सरकारी और प्राइवेट स्कूल बच्चों की किलकारियों से गुलज़ार हो गए। सुबह-सुबह जैसे ही बच्चे अपने-अपने स्कूलों में पहुँचे, उनका स्वागत किसी वीआईपी से कम नहीं था – माथे पर तिलक, हाथ में फूल और चेहरे पर मुस्कान। सोचिए, एक तरफ जहाँ छुट्टी खत्म होने का हल्का मलाल होता है, वहीं दूसरी तरफ दोस्तों से मिलने और अपनी पुरानी क्लास में लौटने की खुशी चेहरे पर साफ दिख रही थी।
ये महज़ स्कूल खुलने का दिन नहीं था, बल्कि पढ़ाई और मस्ती के नए सत्र की धमाकेदार शुरुआत थी। क्लासरूम्स में फिर वही रौनक, वही शरारतें और किताबों की वही खुशबू वापस आ गई, जिसके लिए शहर भर के अभिभावक और बच्चे बेचैन थे।
इसी के साथ, उत्तर प्रदेश सरकार ने एक ख़ास पहल भी शुरू की है, जिसका नाम है ‘स्कूल चलो अभियान’। मतलब, अब हर बच्चे को स्कूल तक लाना है और उनका भविष्य सँवारना है।
स्कूलों में दिखा जश्न का माहौल
लखनऊ में कुल 58 सरकारी स्कूल हैं, 98 ऐसे स्कूल हैं जिन्हें सरकार से सहायता मिलती है, और 500 से ज़्यादा प्राइवेट स्कूल हैं। इसके अलावा सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के भी ज़्यादातर स्कूल इसी सोमवार से खुल गए।
सुबह ठीक 7:30 बजे से इन स्कूलों में नियमित पढ़ाई शुरू हो गई। बच्चों का स्वागत करने के लिए स्कूलों के गेट पर बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए थे और शिक्षकों ने खुद आगे बढ़कर बच्चों को तिलक लगाया और फूल दिए।
ऐसा लग रहा था मानो बच्चे किसी त्यौहार में शामिल होने आए हों।
एक दिन पहले ही, जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) ने सभी स्कूलों को आदेश दिया था कि साफ-सफाई, पीने के पानी की व्यवस्था और क्लासरूम की सेटिंग पूरी तरह दुरुस्त कर ली जाए। ताकि बच्चों को पहले दिन कोई दिक्कत न हो।
सिर्फ इतना ही नहीं, पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों के कैंपस में पेड़-पौधे लगाने के निर्देश भी दिए गए थे। मतलब, पढ़ाई के साथ-साथ प्रकृति का भी ध्यान रखना है।
'स्कूल चलो अभियान' का बिगुल
प्रदेश सरकार के निर्देश पर ‘स्कूल चलो अभियान’ की शुरुआत 1 जुलाई से हो गई है, और ये अभियान 15 जुलाई तक चलेगा। इस अभियान का सबसे बड़ा मकसद यही है कि प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में ज़्यादा से ज़्यादा बच्चों का दाखिला हो सके।
कोई भी बच्चा स्कूल से छूटे नहीं, सबको शिक्षा का अधिकार मिले।
जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र कुमार पांडेय ने इस मौके पर बताया कि, "पहले दिन सभी विद्यार्थियों का तिलक लगाकर और फूल भेंट कर स्वागत किया गया। जो नए बच्चे स्कूल में आए हैं, उन्हें स्कूल के नियमों, अनुशासन, पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी गतिविधियों और बाकी सुविधाओं के बारे में भी बताया गया।
ताकि वे नए माहौल में आसानी से घुल-मिल सकें और उन्हें कोई झिझक महसूस न हो।" उनकी कोशिश है कि बच्चे सिर्फ स्कूल आएँ नहीं, बल्कि स्कूल को अपना घर जैसा महसूस करें।
चुटकी भंडार स्कूल की छात्राएँ अब नए पते पर
इस खुशी के माहौल के बीच एक खबर ऐसी भी है, जो कुछ बच्चों के लिए थोड़ी अलग रही। हुसैनगंज में एक स्कूल था, ‘चुटकी भंडार गर्ल्स इंटर कॉलेज’, जिसे सील कर दिया गया था।
अब यहाँ की 97 छात्राओं को आसपास के दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कर दिया गया है। ये छात्राएँ आज यानी बुधवार से अपने नए स्कूलों में पढ़ाई शुरू करेंगी।
बची हुई छात्राओं का दाखिला भी जल्द ही करवा दिया जाएगा।
सिर्फ छात्राएँ ही नहीं, बल्कि इस स्कूल की शिक्षिकाओं के समायोजन (adjustment) की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। उनसे पूछा गया है कि वे किन-किन स्कूलों में जाना पसंद करेंगी, ताकि उन्हें भी जल्द से जल्द नई जगह मिल सके।
‘चुटकी भंडार’ स्कूल के प्रबंधक पवन वर्मा ने तो एक नया स्कूल भवन बनाने के लिए 4 करोड़ रुपए का एस्टीमेट भी तैयार कर लिया है। मतलब, जल्द ही इस स्कूल को एक नई पहचान मिलने की उम्मीद है, और बच्चों को फिर से एक स्थायी ठिकाना मिल पाएगा।
उम्मीद है कि ये सारे बदलाव बच्चों के भविष्य के लिए अच्छे साबित होंगे और उन्हें बिना किसी रुकावट के शिक्षा मिलती रहेगी।

