गोंडा: गोंडा की सड़कों पर अब तक जो तांडव मचा हुआ था, उस पर लगाम कसने की तैयारी हो गई है। जिले में आए दिन होने वाले सड़क हादसों और भयंकर जाम से मुक्ति दिलाने के लिए प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। सोचिए, आप गाड़ी चला रहे हों और अचानक कहीं से कोई गाड़ी गलत दिशा से कट मार दे, या फिर यू-टर्न लेने के चक्कर में पूरा ट्रैफिक थम जाए? ये सिर्फ एक कल्पना नहीं, बल्कि गोंडा की सड़कों का रोज़ का सच था, ख़ासकर हाईवे पर। नेशनल हाईवे पर लोगों ने अपनी सहूलियत के लिए जहां-तहां कट बना लिए थे, जो अब जानलेवा साबित हो रहे थे। लेकिन अब इन 'मौत के कटों' पर हमेशा के लिए ताला लगने वाला है।
गोंडा जिला प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग खंड लखनऊ ने मिलकर इन सड़कों को सुरक्षित बनाने का बीड़ा उठाया है। जिले की गोंडा-लखनऊ और गोंडा-बलरामपुर हाईवे पर ऐसे 17 अवैध कटों को चिह्नित किया गया है, जिन्हें बंद करने का काम जल्द ही शुरू होने वाला है।
परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की टीम ने मिलकर चौपाल सागर से लेकर गोंडा के बड़गांव चौराहा तक एक-एक कट को बारीकी से परखा और उनकी पहचान की। ये वो कट थे जिनकी वजह से न जाने कितनी जानें जा चुकी हैं और कितने लोग घंटों जाम में फंसे रहे हैं।
अवैध कट; क्यों बने और कैसे जानलेवा हुए?
ये जो कट हैं, ये सरकारी नहीं हैं। दरअसल, जब हाईवे बनते हैं, तो सुरक्षा मानकों के तहत एक निश्चित दूरी पर ही कट या यू-टर्न पॉइंट बनाए जाते हैं।
लेकिन कई बार कुछ लोग अपनी दुकानों, घरों या खेतों तक सीधी पहुंच बनाने के लिए, या फिर बस थोड़ी दूरी बचाने के चक्कर में, इन नियमों को ताक पर रखकर खुद ही सड़क में छेद कर देते हैं। ये 'जुगाड़ वाले कट' भले ही कुछ लोगों को सहूलियत देते हों, लेकिन ये दूसरों की जान के दुश्मन बन जाते हैं।
जैसे ही कोई वाहन इन अवैध कटों से निकलता है, वह मुख्य यातायात धारा में अचानक आ जाता है, जिससे तेज रफ्तार वाहनों के बीच टकराव का खतरा बढ़ जाता है। अक्सर देखा जाता है कि एक तरफ ट्रैफिक जाम होने पर लोग इन्हीं अवैध कटों का सहारा लेकर दूसरी तरफ जाने की कोशिश करते हैं।
नतीजा? दोनों तरफ का ट्रैफिक रुक जाता है और भीषण जाम लग जाता है, जिसमें एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं भी फँस जाती हैं। इन कटों की वजह से सिर्फ एक्सीडेंट ही नहीं होते, बल्कि हाईवे पर वाहन चलाने वाले भी हर पल एक अज्ञात खतरे की आशंका में रहते थे।
इन 17 जगहों पर बंद होंगे ये 'खतरनाक रास्ते'
परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की संयुक्त निगरानी टीम ने जिन 17 स्थानों को चिह्नित किया है, उनकी एक पूरी फेहरिस्त तैयार की गई है। इनमें कई ऐसे पॉइंट हैं जिनके आसपास भीड़भाड़ वाले इलाके या धार्मिक स्थल हैं, जिससे वहां खतरा और बढ़ जाता है।
सोचिए, मंदिर या अस्पताल के बाहर ही अगर कोई ऐसे कट से गुजरे और दुर्घटना का शिकार हो जाए, तो कितनी बड़ी त्रासदी होगी?
- जिला अस्पताल
- दुःख हरण नाथ मंदिर
- शिव मंदिर
- मां काली भवानी देवी मंदिर
- गुरु नानक चौराहा
- मंडे नाला
- फोरबिसगंज रोड
- पीएनबी एटीएम हारीपुर
- जय महाकाल
- सरस्वती शिशु मंदिर
- पथवालिया पोस्ट ऑफिस
- अमित व आर्यन मोटर
इन नामों से ही पता चलता है कि ये जगहें कितनी आम आवाजाही वाली हैं और इन पर अवैध कट होना कितना खतरनाक हो सकता है। अब इन सभी जगहों पर सुरक्षा दीवारें या बैरियर लगाकर इन्हें स्थायी रूप से बंद किया जाएगा।
खर्च का ब्यौरा और आगे की रणनीति
राष्ट्रीय राजमार्ग खंड लखनऊ के अवर अभियंता सर्वेश ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इन 17 अवैध कटों को बंद करने में 5 लाख रुपये से ज़्यादा का खर्च आएगा। यह सिर्फ गोंडा की बात है, लेकिन विभाग की नज़र दूसरे हाईवेज पर भी है।
सर्वेश जी ने बताया कि अन्य हाईवेज पर बने अवैध कटों को भी चिन्हित करके रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उन्हें भी जल्द से जल्द बंद किया जा सके। इसका मतलब है कि यह अभियान सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे प्रदेश में ऐसी लापरवाहियों पर लगाम कसी जाएगी।
पहले भी चली है ऐसी मुहिम, मिले हैं अच्छे नतीजे
ऐसा नहीं है कि यह पहली बार है जब प्रशासन ने इस तरह का कदम उठाया है। पिछले महीने भी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने गोंडा में अंबेडकर चौराहा से लेकर कर्नलगंज तक एक बड़ा अभियान चलाया था।
उस दौरान 20 से भी ज़्यादा अवैध कटों को बंद किया गया था। और यकीन मानिए, इसके नतीजे काफी सकारात्मक रहे।
उन इलाकों में सड़क दुर्घटनाओं में खासी कमी देखने को मिली, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली।
इसी सफलता से उत्साहित होकर अब यह नया अभियान शुरू किया गया है। उम्मीद है कि इन 17 नए कटों के बंद होने से गोंडा की सड़कों पर सुरक्षा और सुगमता दोनों बढ़ेगी।
लोगों को अब आए दिन के जाम और दुर्घटना के डर से मुक्ति मिलेगी। प्रशासन का यह कदम साफ दिखाता है कि जनता की सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है।
अब देखना ये है कि यह अभियान कितनी तेजी से पूरा होता है और गोंडा की सड़कें कितनी जल्दी 'जानलेवा' से 'जान बचाने वाली' बन पाती हैं।

