अररिया: बिहार के अररिया जिले से एक ऐसी खबर आई है, जिसने पंचायती राज व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। सोचिए, एक मुखिया अपनी पंचायत में जमीन का विवाद सुलझाने पहुंचा हो और वहीं उस पर जानलेवा हमला हो जाए। जी हां, ऐसा ही कुछ हुआ रानीगंज प्रखंड की मझुवा पश्चिम पंचायत में, जहां मुखिया किशन शर्मा को लोगों के बीच ही धारदार हथियार से लहूलुहान कर दिया गया। घटना मंगलवार की है, जब मुखिया साहब वार्ड नंबर-11 में एक पुराने भूमि विवाद को खत्म कराने की कोशिश कर रहे थे। ये सिर्फ एक हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र के उस छोटे स्तंभ पर चोट है, जो गांव-देहात में लोगों की समस्याओं को निपटाने में दिन-रात एक करता है।
किशन शर्मा पर हुए इस हमले में उनके हाथ पर गहरी चोट आई है। घटना के तुरंत बाद वहां अफरा-तफरी मच गई।
आस-पास मौजूद लोगों ने बिना देर किए घायल मुखिया को रानीगंज रेफरल अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टर राजू कुमार ने उनका प्राथमिक उपचार किया, लेकिन चोट की गंभीरता को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए अररिया सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया।
फिलहाल, मुखिया जी का इलाज जारी है और वो खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं, लेकिन ये घटना कई सवाल खड़े करती है – आखिर जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा का क्या होगा?
हमले की कहानी: मुखिया की जुबानी
घायल मुखिया किशन शर्मा ने अस्पताल में बताया कि यह हमला अचानक नहीं हुआ है, बल्कि उन्हें करीब दस दिन पहले ही जान से मारने की धमकी मिली थी। उन्होंने बताया कि मंगलवार को जब वे वार्ड नंबर-11 में भूमि विवाद की पंचायती कर रहे थे, तो वहां चार आदिवासी युवक मौजूद थे।
बात-चीत चल रही थी कि तभी माहौल गरमा गया। मुखिया के मुताबिक, एक युवक ने अचानक अपनी कमर से हथियार निकाला और उन पर गोली चला दी।
गनीमत रही कि गोली उन्हें छू भी नहीं पाई। लेकिन खतरा अभी टला नहीं था।
गोली चलने के ठीक बाद, दूसरे युवक ने मौका देखते ही एक धारदार हथियार निकाला और मुखिया पर हमला कर दिया। किशन शर्मा ने खुद को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन हथियार सीधा उनके हाथ पर लगा, जिससे गहरा घाव हो गया और खून बहने लगा।
यह पूरा वाकया इतनी तेजी से हुआ कि आस-पास मौजूद लोग भी कुछ समझ नहीं पाए और अचानक हुए इस हमले से दहशत में आ गए। मुखिया ने बताया कि धमकी मिलने के बावजूद उन्होंने सोचा नहीं था कि बात इतनी आगे बढ़ जाएगी।
हमलावर कौन? पुलिस जांच में जुटी
हमले के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए घायल मुखिया को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। सूचना मिलते ही रानीगंज थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची और फिर अस्पताल जाकर मुखिया किशन शर्मा का बयान दर्ज किया।
रानीगंज थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मुखिया किशन शर्मा का बयान दर्ज कर लिया गया है। उनके लिखित आवेदन और बयान के आधार पर संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की जाएगी और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि इस पूरे मामले की गहनता से जांच की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, अभी तक किसी की गिरफ्तारी की खबर नहीं है, लेकिन पुलिस आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है।
जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि जब जनप्रतिनिधि गांव-देहात के छोटे-मोटे विवादों को सुलझाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं, तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "मुखिया जी लोगों की भलाई के लिए दिन-रात लगे रहते हैं। अगर उन पर ही ऐसे हमला होने लगेगा, तो फिर कोई भी विवाद सुलझाने के लिए आगे नहीं आएगा।
इससे गांव-समाज में अराजकता बढ़ेगी।"
यह घटना सिर्फ अररिया की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक चेतावनी है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले जनप्रतिनिधियों को किस तरह के खतरों का सामना करना पड़ता है। पुलिस प्रशासन को न केवल इस मामले के आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ना होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम भी उठाने होंगे।
रानीगंज पुलिस की जांच जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को उनके किए की सजा मिलेगी।

