अररिया: राजस्थान के कोटा शहर को अक्सर सपनों का शहर कहते हैं, खासकर उन हजारों नौजवानों के लिए जो इंजीनियर या डॉक्टर बनने का ख्वाब अपनी आंखों में पाले वहां पहुंचते हैं। लेकिन अररिया की एक 17 साल की बिटिया, जया श्री, के लिए कोटा सपनों का नहीं, बल्कि एक डरावनी कहानी का गवाह बन गया। सोचिए... एक पिता रात में अपनी बेटी से फोन पर सामान्य बातचीत करता है, सब ठीकठाक लगता है। फिर अचानक फोन आता है कि बेटी गंभीर हालत में मिली है। पिता अपनी बेटी को बचाने के लिए कोटा जाने की तैयारी कर ही रहे होते हैं, कि उसी बेटी का दर्द से कराहता हुआ फोन आता है, 'पापा, मुझे बचा लीजिए...' और फिर हमेशा के लिए सन्नाटा छा जाता है। ये कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि अररिया में हुई एक सच्ची और दिल दहला देने वाली घटना है।
यही दर्दनाक कहानी है अररिया के रानीगंज की रहने वाली जया श्री की। वह कोटा में JEE की तैयारी कर रही थी, लेकिन संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी मौत हो गई।
मंगलवार, 30 जून की रात को जब उसका शव रानीगंज स्थित उसके घर पहुंचा, तो पूरे इलाके में मातम छा गया। जिसने भी ये खबर सुनी, उसका दिल दहल गया।
परिवार सदमे में है, उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आखिर उनकी होनहार बेटी के साथ ये सब कैसे हो गया। उनके सपनों का महल पल भर में ढह गया।
इंजीनियर बनने का सपना और कोटा का सफर
जया श्री कोई साधारण बच्ची नहीं थी। उसने अररिया से 10वीं की परीक्षा शानदार नंबरों से पास की थी।
उसकी आंखों में बड़े-बड़े सपने थे – इंजीनियर बनकर देश का नाम रोशन करना चाहती थी, अपने परिवार का मान बढ़ाना चाहती थी। इसी सपने को पूरा करने के लिए उसने राजस्थान के कोटा का रुख किया, जो अपनी बेहतरीन कोचिंग संस्थानों के लिए पूरे देश में मशहूर है।
जया मोशन एजुकेशन संस्थान में रहकर JEE की तैयारी कर रही थी। उसे पूरा यकीन था कि कोटा में रहकर वो अपने लक्ष्य को हासिल कर लेगी।
उसके पिता, युगेश पंजियार उर्फ पूनम पंजियार, बताते हैं कि उनकी बेटी बेहद मेहनती और लगनशील थी। घर से दूर होने के बावजूद, वो अपनी बेटी से हर रोज रात करीब नौ बजे फोन पर बात किया करते थे।
ये उनकी रोज की दिनचर्या का हिस्सा था। पिता को बेटी के बारे में हर छोटी-बड़ी बात पता होती थी, उसकी पढ़ाई, उसकी सेहत, सब कुछ।
ये फोन कॉल ही उनके बीच का एक मजबूत पुल थे, जो दूरियों के बावजूद उन्हें जोड़े रखते थे।
आखिरी बातचीत और अनहोनी की आहट
शनिवार, 28 जून की रात थी। रोज की तरह युगेश पंजियार ने अपनी बेटी जया से फोन पर बात की।
करीब आधे घंटे तक उनकी सामान्य बातचीत हुई। जया ने अपने पिता को अपनी पढ़ाई और क्लास से जुड़ी बातें बताईं।
उसने यह भी साझा किया कि वह मेस में खाना खाने जा रही है, और खाना खाने के बाद अपनी मां से भी बात करेगी। सब कुछ सामान्य लग रहा था।
किसी को क्या पता था कि ये उसकी अपने पिता से आखिरी बातचीत होने वाली थी, और अगली सुबह तक सब कुछ बदल जाएगा।
रात के 10 बज गए, लेकिन जया का फोन नहीं आया। उसकी मां को चिंता हुई।
उन्होंने कई बार जया के नंबर पर फोन लगाया, लेकिन दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। मां-बाप का मन अनहोनी की आशंका से घिरने लगा।
रात करीब 11 बजे, परेशान पिता ने जया के साथ रहने वाली एक दूसरी छात्रा से संपर्क किया और उससे जया के कमरे में जाकर देखने को कहा। उनकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी, हर गुजरता पल एक भारी बोझ जैसा लग रहा था।
अभी वे इस उधेड़बुन में थे, तभी एक अज्ञात नंबर से उनके पास फोन आया। फोन करने वाले ने बताया कि उनकी बेटी घायल अवस्था में एक फ्लाईओवर के नीचे मिली है और उसे तुरंत अस्पताल ले जाया जा रहा है।
ये खबर सुनते ही पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। उनके सपनों पर मानो बिजली गिर गई हो।
“पापा, मुझे बचा लीजिए...” दर्द से कराहती आखिरी आवाज
सोचिए, एक पिता जिसे अभी-अभी अपनी बेटी के घायल होने की खबर मिली हो, वो क्या महसूस कर रहा होगा? युगेश पंजियार तुरंत कोटा जाने की तैयारी करने लगे। इसी बीच उसी अज्ञात नंबर से दोबारा फोन आया।
इस बार फोन पर खुद जया श्री थी। उसकी आवाज दर्द से भरी थी, कमजोर थी और उसमें मदद की एक चीख थी।
उसने केवल इतना ही कहा, 'पापा, मुझे बचा लीजिए..
. मेरे शरीर में बहुत दर्द हो रहा है।
' ये सुनकर पिता का कलेजा फट गया होगा।
ये सिर्फ 30 सेकंड की बातचीत थी, लेकिन ये जया के पिता के लिए हमेशा के लिए एक चुभन बन गई, एक ऐसा घाव जो शायद कभी नहीं भरेगा। बातचीत के तुरंत बाद अस्पताल कर्मी ने फोन ले लिया और जया को आराम करने की बात कही।
पिता ने सोचा, चलो, बेटी अब अस्पताल में सुरक्षित है, इलाज हो रहा है, वो ठीक हो जाएगी। उनके मन में उम्मीद की एक हल्की किरण जगी थी।
लेकिन सिर्फ आधे घंटे बाद एक और फोन आया। इस बार खबर ऐसी थी, जिसने युगेश पंजियार के पैरों तले जमीन खींच ली।
फोन करने वाले ने बताया कि जया श्री अब इस दुनिया में नहीं है। एक पिता की उम्मीद पल भर में टूट गई।
उनकी बेटी का इंजीनियर बनने का सपना, उनके सारे अरमान, सब कुछ खत्म हो गया।
पुलिस जांच और परिजनों की इंसाफ की मांग
कोटा पुलिस फिलहाल पूरे मामले की गंभीरता से जांच में जुटी है। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह साफ नहीं है कि छात्रा फ्लाईओवर से गिर गई थी या फिर यह आत्महत्या का मामला है।
मामला उलझा हुआ है और कई सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और अन्य तथ्यों के आधार पर हर पहलू की गहराई से जांच की जा रही है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
इधर, अररिया के रानीगंज में जब जया श्री का पार्थिव शरीर पहुंचा, तो उसे अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पूरे गांव में शोक का माहौल था।
स्थानीय लोग और परिजन सभी सदमे में हैं। उनकी एक ही मांग है – राजस्थान सरकार और कोटा पुलिस इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करे।
वे चाहते हैं कि जया की मौत की वास्तविक वजह सामने आए और अगर कोई दोषी है, तो उसे सख्त से सख्त सजा मिले। परिजनों ने बताया कि जया श्री का सपना एक दिन इंजीनियर बनकर देश और परिवार की सेवा करने का था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
फिलहाल सभी की निगाहें कोटा पुलिस की जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। उम्मीद है कि जल्द ही इस दर्दनाक और रहस्यमय पहेली से पर्दा उठेगा और जया श्री को इंसाफ मिल पाएगा।

