पंचकूला: हरियाणा में एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सबको चौंका दिया है। कल्पना कीजिए, आप सालों तक सरकारी सेवा में रहे हों और जिस दिन आपकी नौकरी का आखिरी दिन हो, जिस दिन आप रिटायर होकर आराम की जिंदगी शुरू करने वाले हों, उसी दिन आपको जेल जाना पड़े? ऐसा ही कुछ हुआ है एक हाई-प्रोफाइल IAS अधिकारी प्रदीप कुमार डागर के साथ। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने उन्हें उनके रिटायरमेंट के ठीक दिन गिरफ्तार कर लिया। जी हां, ये कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि हरियाणा के बहुचर्चित IDFC फर्स्ट बैंक फंड घोटाले से जुड़ा एक कड़वा सच है, जिसकी आंच अब बड़े-बड़े अधिकारियों तक पहुंच रही है।
CBI की टीम ने देर रात कार्रवाई करते हुए प्रदीप डागर को धर दबोचा और सीधा पंचकूला की विशेष अदालत में पेश किया। अब उन्हें दो दिन की रिमांड पर लिया गया है, ताकि इस पूरे गड़बड़झाले की परतें और गहराई से खोली जा सकें।
डागर को लंबे समय से जांच में सहयोग न करने और जांच एजेंसी से बचकर भागने का आरोप था। सीबीआई उनकी लोकेशन ट्रेस कर रही थी, और जैसे ही वह पकड़ में आए, कहानी ने एक नया मोड़ ले लिया।
अब सवाल यह है कि इस गिरफ्तारी के बाद और कितने बड़े नाम सामने आने वाले हैं?
रिटायरमेंट के दिन गिरफ्तारी: कहानी में ट्विस्ट
मामला और भी दिलचस्प इसलिए हो जाता है क्योंकि प्रदीप डागर गिरफ्तारी के डर से पहले से ही अंडरग्राउंड चल रहे थे। उन्हें अपनी गिरफ्तारी का पूरा अंदेशा था, शायद इसीलिए उन्होंने अग्रिम जमानत याचिका भी लगाई थी, जिस पर 2 जुलाई को सुनवाई होनी थी।
लेकिन सीबीआई ने उन्हें उस सुनवाई से पहले ही अपनी गिरफ्त में ले लिया। यह कोई पहली गिरफ्तारी नहीं है; इस बड़े घोटाले में प्रदीप डागर तीसरे IAS अधिकारी हैं जिन्हें सलाखों के पीछे भेजा गया है।
इससे पहले IAS आरके सिंह और पंकज अग्रवाल भी इसी मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं, जिससे साफ है कि जांच की आंच काफी दूर तक फैली हुई है।
प्रदीप डागर को इस साल 8 अप्रैल को ही परिवहन विभाग के निदेशक और विशेष सचिव पद से निलंबित कर दिया गया था। उस वक्त वे हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) में सदस्य सचिव के पद पर तैनात थे।
सीबीआई का कहना है कि डागर जांच में लगातार सहयोग नहीं कर रहे थे और बचने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया।
क्या है IDFC फर्स्ट बैंक घोटाला?
यह घोटाला हरियाणा सरकार के कई विभागों के पैसों से जुड़ा हुआ है, जिसे राज्य के इतिहास में सबसे बड़ी हेराफेरी में से एक माना जा रहा है। कुल मिलाकर करीब 504 करोड़ रुपए की बड़ी रकम IDFC फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ सेक्टर-32 स्थित शाखा से कथित तौर पर फर्जी एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) और शेल कंपनियों के जरिए निकाल ली गई।
सोचिए, सरकार के आठ अलग-अलग विभागों का पैसा, जो जनता के विकास कार्यों के लिए था, किस तरह से गायब कर दिया गया।
इस पूरे मामले की शुरुआत हरियाणा सरकार के अनुरोध पर हुई, जब स्टेट विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो ने इसे सीबीआई को सौंपा। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।
यह सिर्फ एक बैंक या एक विभाग का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित तरीके से सरकारी खजाने को चूना लगाने का बड़ा खेल प्रतीत होता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में सेंध: 169 करोड़ का खेल
घोटाले की एक बड़ी कड़ी हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) से जुड़ी है। सीबीआई की जांच में सामने आया कि HSPCB के बैंक खातों में अकेले 169 करोड़ रुपए की बड़ी गड़बड़ी हुई है।
जब इस मामले की गहराई में जाया गया तो पुलिस ने एक डाटा एंट्री ऑपरेटर को गिरफ्तार किया। उस ऑपरेटर ने पूछताछ में बताया कि एक IAS अफसर के कहने पर ही यह सारा पैसा चंडीगढ़ के IDFC फर्स्ट बैंक शाखा में ट्रांसफर किया गया था।
प्रमोटी IAS अधिकारी प्रदीप डागर अगस्त 2022 से दिसंबर 2025 तक HSPCB के सदस्य सचिव रहे थे। इसी दौरान ये गड़बड़ियां सामने आईं।
सीबीआई का मानना है कि उनकी भूमिका इस बड़े पैमाने पर हुई धांधली में काफी अहम है। अब उनसे रिमांड के दौरान उन सभी सवालों के जवाब मांगे जाएंगे जो इस 169 करोड़ की हेराफेरी से जुड़े हुए हैं।
जांच से भाग रहे थे डागर? अग्रिम जमानत का दांव
सीबीआई ने प्रदीप डागर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत जांच की मंजूरी ली थी। इस जांच के दौरान कई अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ हो चुकी है।
सूत्रों की मानें तो प्रदीप डागर को भी जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया था, लेकिन वे लंबे समय से जांच एजेंसी की पहुंच से बाहर थे। शायद गिरफ्तारी से बचने के लिए ही उन्होंने अग्रिम जमानत का रास्ता चुना था, जिस पर 2 जुलाई को पंचकूला जिला अदालत में सुनवाई होनी थी।
लेकिन सीबीआई ने उन्हें मोहलत नहीं दी और सुनवाई से पहले ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अब उन्हें कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा।
घोटाले की जड़ें गहरी: और भी बड़े नाम?
इस पूरे घोटाले की जड़ें काफी गहरी दिखाई दे रही हैं। सीबीआई सूत्रों की मानें तो हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन विनीत गर्ग भी जांच के दायरे में हैं।
ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि सीबीआई की टीम जल्द ही उनसे भी पूछताछ कर सकती है। इसका मतलब है कि यह सिर्फ प्रदीप डागर या पहले गिरफ्तार हुए दो अन्य IAS अधिकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इस मामले में और भी कई बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
गिरफ्तारी के बाद प्रदीप डागर की संपत्तियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, उनकी गुरुग्राम में तीन महंगी प्रॉपर्टी और रोहतक में एक प्रॉपर्टी भी बताई जा रही है।
सीबीआई इन संपत्तियों और उनके स्रोत की भी जांच कर सकती है, ताकि यह पता चल सके कि क्या ये संपत्तियां इस घोटाले से अर्जित धन से खरीदी गई थीं। इस गिरफ्तारी के बाद हरियाणा के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है और सबकी नजरें सीबीआई की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

