भागलपुर: बिहार के भागलपुर जिले से एक खबर आई है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। बात सिर्फ खबर की नहीं, एक छोटी बच्ची की जिंदगी की है, जो अपने पापा को ढूंढते-ढूंढते एक ऐसे दरिंदे के चंगुल में फंस गई, जिस पर लोग आस्था और विश्वास रखते थे। नाथनगर इलाके के एक आश्रम का महंत, धर्मानंद बाबा। 5 साल की वो मासूम अपने पिता को खोजते हुए आश्रम पहुंची थी, लेकिन उसे नहीं पता था कि वहां उसके साथ क्या होने वाला है। इस घटना ने पूरे इलाके में बवाल काट दिया था और अब जाकर इस मामले में अदालत का बड़ा फैसला आया है।
मामला साल 2024 का है, जब इस जघन्य वारदात ने भागलपुर में हंगामा खड़ा कर दिया था। सोमवार को भागलपुर की पॉक्सो मामले की विशेष न्यायाधीश सुगंधा प्रसाद की अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया।
अदालत ने दोषी धर्मानंद बाबा को पूरे 20 साल की कैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, अदालत ने दोषी पर 20 हजार रुपए का आर्थिक दंड भी लगाया है।
अगर बाबा यह जुर्माना नहीं भरता है, तो उसे एक साल की अतिरिक्त कैद काटनी पड़ेगी।
आश्रम में हुई खौफनाक वारदात
घटना के दिन, वह मासूम बच्ची घर में अकेली थी। उसके पिता का उस आश्रम में आना-जाना लगा रहता था।
बच्ची अपने पिता को ढूंढते-ढूंढते आश्रम पहुंच गई। वहां धर्मानंद बाबा ने उसे बहला-फुसलाकर अपनी गिरफ्त में ले लिया।
फिर जबरन अपनी गोद में बैठाया और उसके साथ वो घिनौनी हरकत की, जिसके बारे में सोचकर भी रूह कांप जाती है।
बच्ची ने चीखना-चिल्लाना शुरू किया, तो उसकी आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण आश्रम के बाहर जुट गए। ग्रामीणों ने इस बाबा को रंगे हाथों पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई भी की।
लेकिन मौका पाकर वो दरिंदा भीड़ से बचकर भाग निकला। दोषी बाबा जगदीशपुर थाना क्षेत्र के वादे गांव का रहने वाला है।
पुलिस की भागदौड़ और बाबा की गिरफ्तारी
बच्ची के साथ दुष्कर्म की जानकारी मिलते ही उसकी मां ने तुरंत डायल-112 पर फोन करके पुलिस को बुलाया। सूचना मिलते ही मधुसूदनपुर पुलिस थाने से महिला पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचीं।
उन्होंने बच्ची को फौरन शुक्रवार रात करीब 11 बजे जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका मेडिकल टेस्ट किया गया।
इधर, पुलिस हरकत में आ गई थी। सिटी डीएसपी द्वितीय राकेश कुमार के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम बनाई गई।
इस टीम ने महज 24 घंटे के अंदर ही आरोपी धर्मानंद बाबा को धर दबोचा। दरअसल, बाबा भागलपुर से भागकर मुंगेर चला गया था।
वो वहां असरगंज थाना अंतर्गत जलालाबाद स्थित एक दूसरे आश्रम में छिपा हुआ था। पुलिस ने बड़ी घेराबंदी कर उसे मुंगेर से गिरफ्तार किया और फिर कोर्ट में पेश किया।
पीड़िता के परिजनों के बयान के आधार पर ही इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी।
आश्रम में तनाव और चेले-चपाटियों का पलायन
इस घटना से ग्रामीणों और स्थानीय लोगों में जबरदस्त गुस्सा था। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि मधुसूदनपुर थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष सह इंस्पेक्टर मोहम्मद सफदर अली को भारी पुलिस बल के साथ मौके पर मुस्तैद रहना पड़ा था, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
लोगों के भारी आक्रोश को भांपते हुए आश्रम में रहने वाले दूसरे सेवक और चेले-चपाटी भी अपनी जान बचाने के लिए आश्रम के मुख्य गेट पर ताला जड़कर मौके से फरार हो गए थे। हर तरफ गुस्सा था और उस गुस्से का असर सीधे आश्रम पर पड़ रहा था।
अदालत का फैसला और न्याय की उम्मीद
पॉक्सो मामले की विशेष लोक अभियोजक शंकर जयकिशन मंडल ने सरकार की ओर से इस मामले में मजबूती से बहस की। उन्होंने कुल 8 गवाहों की गवाही दर्ज कराई, जिन्होंने इस मामले को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई।
इन्हीं गवाहियों और सबूतों के आधार पर अदालत ने धर्मानंद बाबा को दोषी करार दिया और उसे कठोर सजा सुनाई।
अदालत ने पीड़ित मासूम बच्ची को 3 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की भी सिफारिश जिला विधिक सेवा प्राधिकार से की है। यह मुआवजा उस बच्ची की जिंदगी में हुए गहरे जख्मों को तो नहीं भर सकता, लेकिन शायद थोड़ी मदद दे सके।
यह फैसला उन सभी लोगों के लिए एक सबक है, जो आस्था और विश्वास का दुरुपयोग करके ऐसे घिनौने अपराध करते हैं। पुलिस और न्यायपालिका ने अपनी भूमिका बखूबी निभाई और अंततः उस 5 साल की मासूम को इंसाफ मिला, जो अपने पिता को ढूंढने निकली थी और जिसका सामना एक दरिंदे से हो गया था।

