अमृतसर: सिख पंथ में मर्यादा और मान-सम्मान की बात जब उठती है, तो मामला गरमा जाता है। ऐसा ही कुछ इस समय पंजाब के सियासी और धार्मिक गलियारों में हो रहा है। उत्तराखंड में एक बड़ी ‘जीत’ के बाद जब कुछ निहंग सिंह दल पंजाब लौटे, तो सबकी उम्मीद थी कि उनकी शौर्यगाथा सुनाई जाएगी, उनके प्रयासों की सराहना होगी। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। वहां से लौटे निहंग जसदीप सिंह से जुड़ा एक पुराना और बेहद निजी विवाद अचानक सोशल मीडिया पर ऐसे उछाला गया कि मानो आग लग गई हो। इस आग को लगाने का आरोप लगा विक्की थॉमस नाम के एक शख्स पर, जिसने जसदीप सिंह की कुछ आपत्तिजनक तस्वीरें लीक कर दीं। बस फिर क्या था, इस हरकत से पंजाब का धार्मिक माहौल गर्मा गया और निहंग जत्थेबंदियों के बीच गहरा रोष फैल गया।
इस पूरे मामले पर अब बरजिंदर सिंह परवाना ने मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने विक्की थॉमस को सीधे-सीधे चेतावनी दी है और कहा है कि इस तरह पंथ और निहंगों की छवि खराब करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
परवाना ने साफ लफ्जों में बताया कि कैसे कुछ लोग खालसा पंथ की बड़ी उपलब्धियों को अनदेखा कर एक पुराने विवाद को बेवजह तूल दे रहे हैं, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा।
उत्तराखंड की जीत और पुराना विवाद: जब जत्थेबंदियों ने संभाला मोर्चा
परवाना ने अपने बयान में सबसे पहले उत्तराखंड के उस 'मोर्चे' का जिक्र किया, जिसे उन्होंने 'जीत' बताया। उन्होंने कहा, "जब उत्तराखंड जाने का समय आया था, तब कोई आगे नहीं आया।
" यह एक ऐसा पल था जब सिख पंथ से जुड़े किसी मुद्दे पर एक ठोस कार्रवाई की जरूरत थी, लेकिन लोग कतरा रहे थे। ऐसे में कुछ नौजवानों ने जिम्मेदारी संभाली।
परवाना ने आगे बताया कि बाबा बलबीर सिंह, बाबा मेजर सिंह (जो बुड्ढा दल से संबंध रखते हैं) और अमृतपाल सिंह मेहरों की टीम ने मिलकर वहां मोर्चा संभाला। इन बहादुर सिंहों ने न केवल प्रशासन के साथ सीधे बातचीत की, बल्कि दोषियों को एक सख्त संदेश देकर स्थिति को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया।
यह खालसा पंथ के लिए एक गौरवशाली पल था, एक ऐसी उपलब्धि जिस पर सबको फक्र होना चाहिए था।
लेकिन बरजिंदर सिंह परवाना को इस बात का गहरा दुख है कि आज उस गौरव और उपलब्धि की चर्चा करने के बजाय, निहंग जसदीप सिंह से जुड़े एक पुराने विवाद को सोशल मीडिया पर बेवजह और जबरन उठाया जा रहा है। उनका कहना है कि यह पंजाब और खालसा पंथ की छवि को धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश है, जिसका मकसद निहंग सिंह फौजों को बदनाम करना है।
मोहाली के सोहाना साहिब गुरुद्वारे में जिस तरह निहंग जसदीप सिंह पर हमले की कोशिश हुई थी, उसके बाद उनकी निजी तस्वीरों का सामने आना इस पूरी घटना को और भी पेचीदा बना देता है।
विक्की थॉमस पर तीखा हमला: मर्यादा और निजी जीवन पर सवाल
बरजिंदर सिंह परवाना ने विक्की थॉमस पर सीधे और तीखे शब्दों में हमला बोला। उन्होंने विक्की थॉमस के ‘सिंह’ शब्द के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया और कहा कि वह इस पवित्र शब्द का गलत इस्तेमाल करता है।
परवाना ने याद दिलाया कि विक्की को पहले भी इस तरह की हरकतों के लिए यहां से 'भगाया' जा चुका है, यानी उसे पंथ की मर्यादा के खिलाफ जाने पर समाज से बहिष्कृत किया गया था। परवाना ने साफ तौर पर कहा कि जसदीप सिंह अपनी गलती के लिए पहले ही 'पंच सिंहों' (सिख धर्म की पांच सदस्यीय धार्मिक अदालत) के सामने पेश होकर सजा भुगत चुका है।
इसका मतलब है कि धार्मिक तौर पर इस मामले का निपटारा हो चुका है और जसदीप सिंह ने अपनी गलती स्वीकार कर प्रायश्चित भी कर लिया है। ऐसे में विक्की थॉमस को कोई हक नहीं है कि वह किसी सिंह का 'बाना' (निहंगों की पारंपरिक वेशभूषा), 'दुमाला' (पगड़ी) या 'चक्कर' (प्रतीकात्मक हथियार) उतरवाने की बात करे।
यह एक निहंग सिंह की पहचान और गौरव पर सीधा हमला है, जिसे पंथ कभी स्वीकार नहीं कर सकता।
परवाना ने विक्की थॉमस के निजी जीवन पर भी सवाल उठाए, जिससे यह साफ होता है कि यह विवाद केवल जसदीप सिंह की तस्वीरों तक सीमित नहीं, बल्कि विक्की थॉमस के चरित्र और उसके पंथ के प्रति समर्पण पर भी सवाल उठा रहा है। परवाना ने कहा कि जो व्यक्ति खुद शराब के साथ अपने पिता का जन्मदिन मनाता हो और जिसने एक किन्नर से शादी करके उसे छोड़ दिया हो, वह दूसरों को पंथ की मर्यादा नहीं सिखा सकता।
यह बयान विक्की थॉमस की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है और उसकी नीयत पर संदेह पैदा करता है कि वह किस अधिकार से किसी दूसरे सिंह की मर्यादा पर टिप्पणी कर रहा है।
निहंग सिंह फौजों की बदनामी और परवाना की कड़ी चेतावनी
परवाना ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि विक्की थॉमस की इन हरकतों के कारण उत्तराखंड वालों को मौका मिल गया है। उनका मानना है कि एक व्यक्ति की कथित गलती की वजह से पूरी निहंग सिंह फौज और उसकी जत्थेबंदियों की आलोचना हो रही है।
निहंग सिंह, जो अपनी बहादुरी, निडरता और पंथ के प्रति अगाध श्रद्धा के लिए जाने जाते हैं, उनकी छवि को इस तरह से खराब करना पूरे सिख समुदाय के लिए असहनीय है। यह उस विरासत पर हमला है जिसे गुरुओं ने सदियों तक अपने खून-पसीने से सींचा है।
बरजिंदर सिंह परवाना ने पंजाब और पंजाबियत से जुड़े तमाम लोगों से अपील की है कि वे ऐसे तत्वों को पहचानें जो हमेशा सिख प्रचारकों का विरोध करते हैं और पंथ के अंदर फूट डालने की कोशिश करते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में विक्की थॉमस को चेतावनी दी कि उसे पहले भी समझाने और मामले को खत्म करने की कोशिश की गई थी, लेकिन वह नहीं माना।
अब पंजाब के लोगों और पंथ के साथ धोखा करने का अंजाम उसे भुगतना पड़ेगा। परवाना ने दृढ़ता से कहा कि गुरु साहिब की कृपा से उसे जल्द ही सही जवाब दिया जाएगा।
यह बयान एक स्पष्ट संदेश है कि पंथ अपनी मर्यादा और गौरव की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है और ऐसे तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा जो उसकी जड़ों पर प्रहार करते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सिख समाज में आत्म-मंथन का दौर शुरू कर दिया है, जहां एक तरफ पंथ की उपलब्धियों को सराहा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोगों की हरकतों से उठते विवादों पर भी गंभीर चिंतन हो रहा है। सवाल यह है कि ऐसे मामलों को कैसे निपटाया जाए ताकि पंथ की एकता और मर्यादा बनी रहे और कोई भी व्यक्ति अपने निजी स्वार्थों के लिए पूरे समुदाय को बदनाम न कर सके।

