अयोध्या: सुबह का वक्त था, धूप हल्की-हल्की खिल रही थी, लेकिन आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय में उस वक्त जो हलचल मची, उसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। ठीक 10:30 बजे, यूनिवर्सिटी के मुखिया, यानी कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, ने अचानक ही कॉलेज में एंट्री मारी। कोई प्री-प्लानिंग नहीं, कोई पहले से खबर नहीं – ये था बिल्कुल 'औचक' निरीक्षण। कुलपति साहब ने आते ही सीधे कॉलेज की पढ़ाई-लिखाई और प्रैक्टिकल वाली व्यवस्थाओं का जायजा लेना शुरू कर दिया। ये कोई रूटीन दौरा नहीं था, बल्कि साफ तौर पर ये देखने आए थे कि ज़मीन पर क्या चल रहा है और बच्चों को कैसी शिक्षा मिल रही है। उनका इरादा साफ था: कहीं कोई कमी न रह जाए, जो छात्रों के भविष्य पर भारी पड़े।
महाविद्यालय परिसर में कदम रखते ही डॉ. सिंह की निगाहें सीधे अलग-अलग प्रयोगशालाओं की तरफ गईं।
एक-एक लैब में उन्होंने बड़ी बारीकी से देखा कि वहां मौजूद उपकरण किस हालत में हैं – क्या वे काम करने लायक हैं या सिर्फ धूल फांक रहे हैं? कौन-कौन से नए उपकरण खरीदे गए हैं और उनका इस्तेमाल हो रहा है या नहीं? उन्होंने गौर किया कि उपलब्ध संसाधन पर्याप्त हैं या उनमें सुधार की गुंजाइश है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के ज़माने में अगर हमारे छात्रों को सिर्फ किताबी ज्ञान देकर मैदान में उतार दिया जाएगा, तो वे कहीं टिक नहीं पाएंगे।
उन्हें व्यवहारिक ज्ञान चाहिए, और वो सिर्फ तभी मिल सकता है जब लैब आधुनिक, सुसज्जित और पूरी तरह फंक्शनल हो। उन्होंने साफ निर्देश दिए कि उपकरणों का नियमित रख-रखाव हो, उनकी सर्विसिंग समय पर हो।
जो उपकरण खराब हैं, उन्हें ठीक करवाया जाए या नए खरीदे जाएं। साथ ही, उन्होंने ये भी कहा कि जो भी जरूरी संसाधन कम पड़ रहे हैं, उन्हें तुरंत उपलब्ध कराया जाए ताकि विद्यार्थियों को पढ़ाई का एक बेहतर और समृद्ध माहौल मिल सके।
उनकी प्राथमिकता साफ थी: शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं।
महाविद्यालय में लैब से नर्सरी स्कूल तक का जायजा
सिर्फ बड़े बच्चों की पढ़ाई ही नहीं, कुलपति डॉ. सिंह ने महाविद्यालय के भीतर संचालित नर्सरी स्कूल प्रयोगशाला का भी बड़े ध्यान से अवलोकन किया।
उन्होंने देखा कि नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए कौन-कौन सी शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध है, उन्हें खेल-खेल में सिखाने के लिए क्या-क्या गतिविधियां करवाई जा रही हैं। डॉ.
सिंह ने महसूस किया कि छोटे बच्चों के सीखने का तरीका अलग होता है और उन्हें सिर्फ किताबों से नहीं, बल्कि गतिविधियों और अनुभव से सिखाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की नींव जितनी मजबूत होगी, उनका भविष्य उतना ही उज्ज्वल होगा।
इसलिए प्रारंभिक शिक्षा में सिर्फ अक्षर ज्ञान ही नहीं, बल्कि बच्चों की रचनात्मकता और सोचने-समझने की शक्ति को बढ़ाना भी बेहद जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को कहा कि नर्सरी स्कूल में बच्चों के लिए सीखने का एक खुशनुमा और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किया जाए, जहां वे खुलकर अपनी जिज्ञासाओं को शांत कर सकें।
बच्चों के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं उपलब्ध हों, इस पर भी उनका विशेष ध्यान रहा।
निरीक्षण के दौरान डॉ. सिंह ने कॉलेज प्रशासन को साफ-सफाई के मामले में भी कोई कोताही न बरतने की हिदायत दी।
उनका स्पष्ट मानना था कि एक स्वच्छ और व्यवस्थित माहौल ही बेहतर शिक्षा को बढ़ावा देता है। उन्होंने प्रयोगशालाओं के सुव्यवस्थित संचालन और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने कहा कि छात्रों को हर वो संसाधन मिलना चाहिए जिससे उनकी पढ़ाई आसान और प्रभावी बन सके। डॉ.
सिंह ने ये भी स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय अपने शिक्षा, अनुसंधान और प्रशिक्षण के स्तर को लगातार ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में समय-समय पर इस तरह के औचक निरीक्षण होते रहेंगे, ताकि छोटी-मोटी कमियों को भी तुरंत पकड़ा जा सके और उनका निवारण किया जा सके।
उनका कहना था कि ये निरीक्षण सिर्फ गलती निकालने के लिए नहीं, बल्कि सुधार की दिशा में एक कदम हैं।
इस महत्वपूर्ण मौके पर कुलपति के साथ विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी और अकादमिक जगत के दिग्गज मौजूद थे। इनमें निदेशक प्रसाद डॉ.
राम बटुक सिंह, कृषि महाविद्यालय की डीन डॉ. प्रतिभा सिंह, सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की डीन डॉ.
साधना सिंह, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. डी.
नियोगी, मात्स्यिकी महाविद्यालय के डीन डॉ. सीपी सिंह और डॉ.
जसवंत सिंह प्रमुख थे। सभी ने कुलपति को कॉलेज में चल रही विभिन्न गतिविधियों और भविष्य की विस्तृत योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया।
कुलपति के इस दौरे ने एक बार फिर ये संदेश दिया कि आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय अपने छात्रों के भविष्य को गढ़ने और उन्हें उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करने के लिए पूरी तरह संकल्पित है और इसके लिए वे लगातार प्रयासरत रहेंगे।

